• June 9, 2026 1:46 am

यूएई करेगा भारत को 4 लाख करोड़ देने का ऐलान, देखता रहेगा चीन, सन्न रह जाएगा पाकिस्तान!

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नवंबर 3 2023 ! भारत में चुनावी माहौल चल रहा है. देश को निवेश की जरुरत है. ऐसे में यूएई अपने दोस्त की मदद करने के लिए आ सकता है. जी हां, ऐसी रिपोर्ट सामने आ रही है कि खाड़ी देशों में भारत का सबसे अच्छा दोस्त यूएई यहां पर बड़ा निवेश कर सकता है. यह निवेश करीब 50 बिलियन डॉलर यानी 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का हो सकता है. इस खबर से चीन जो मौजूदा समय में विदेशी निवेश को तरस रहा है परेशान हो सकता है. वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के होश उड़ सकते हैं क्योंकि पड़ोसी मुल्क खाड़ी देशों के सामने सिर्फ कटोरा लेकर मदद मांगता हुआ नजर आता है.

अगर इस खबर को भारत के नजरिए से देखने को कोशिश करें तो काफी अच्छी खबर हो सकती है. इसका कारण भी है. पहला जो यूएई भारत का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है के साथ रिश्ते और ज्यादा बेहतर होंगे. दूसरा इन पैसों से भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और इंफ्रा को काफी मजबूती मिलेगी. जिससे देश की इकोनॉमी को बूस्ट मिलेगा. यह खबर ऐसे समय पर आई है, जब भारत को निवेश की काफी जरुरत है. ताकि इंफ्रा के काम में और ज्यादा तेजी लाई जा सके.

मौजूदा समय में भारत या यूं कहें पीएम मोदी के यूएई के साथ रिश्ते काफी मजबूत हो चुके हैं. साल 2014 से पीएम बनने के बाद नरेंद्र मोदी यूएई का चार बार दौरा कर चुके हैं. इससे पहले आखिरी बार यूएई का दौरा साल 1981 में भारत की तत्कालिक पीएम इंदिरा गांधी ने किया था. वहीं यूएई भी भारत के साथ अपने रिश्तों को और ज्यादा मजबूत करना चाहता है. इसका कारण भी है, भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ दुनिया के बड़े देशों में सबसे ज्यादा है. यही वो सबसे बड़ी वजह है कि यूएई भारत में 50 बिलियन डॉलर का दांव खेल रहा है. मौजूदा समय में यूएई और भारत के बीच नॉन ऑयल बाइलेटरल ट्रेड 100 अरब डॉलर का हो चुका है.

यूएई इस निवेश से भारत के मिडिल क्लास को टारगेट करना चाहता है. इसका कारण भी है. भारत के मिडिल क्लास की देश की आबादी में बड़ी हिस्सेदारी है. भारत में ऐसे लोगों की संख्या करीब 44 करोड़ है. मतलब साफ है कि इस तबके की भारत की इकोनॉमी और ग्रोथ में बड़ी हिस्सेदारी है. साल 2030-31 तक भारत में इस तबके की संख्या 71.5 करोड़ हो सकती है, जो कुल आबादी का 47 फीसदी के बराबर है. ऐसे में यूएई का दाव भारत में काफी सोच समझकर किया है. वैसे यह ऐलान कब होगा और कितना ज्यादा अभी तक पुख्ता नहीं है. लेकिन इसका ऐलान साल 2024 के चुनावों से पहले हो सकता है.

जिस तरह से यूएई भारत के लिए जरूरी है. उसी तरह से यूएई के लिए भारत भी हमेशा जरूरी रहा है. इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यूएई की कुल आबादी में से भारत के लोगों की संख्या करीब 30 फीसदी है. यही 30 फीसदी लोग भारत में विदेशी मुद्रा के रूप में भारत में भेजते हैं, जिसकी वजह से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार पाकिस्तान के मुकाबले में करीब 100 गुना ज्यादा है. रिपोर्ट के मुताबिक यूएई में भारत से केरल के लोग सबसे ज्यादा मिलते हैं. आने वाले दिनों में यूएई में भारतीयों की संख्या में और ज्यादा इजाफा देखने को मिल सकता है.

यूएई और भारत के बीच बेहतर होते आर्थिक रिश्तों से चीन और पाकिस्तान दोनों परेशान हो सकते हैं. पहले बात चीन की कर लेते हैं. चीन की परेशानी इसलिए भी बढ़ सकती है क्योंकि भारत को लगातार विदेशी निवेश मिल रहा है. इसका मतलब है कि भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ को और ज्यादा बूस्ट मिलेगा और आने वाले सालों में भारत एशिया में इकोनॉमिक मोर्चे पर चीन को पीछे छोड़ते एशिया का सिरमौर बन जाएगा.

बीते कुछ महीनों में भारत में उन विदेशी कंपनियों का आगमन हो रहा है जो पहले चीन में काम कर रही थी. जिसमें एपल का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है. वहीं टेस्ला भी भारत में आ रहा है. माइक्रॉन, फॉक्सकॉन और ताइवान की और भी कई कंपनियां भारत में आ रही है और निवेश करने के साथ भारत को दुनिया की सबसे बड़ी फैक्ट्री बनाने में मदद रही हैं. जो अभी तक चीन हुआ करता था. ऐसे में चीन का परेशान होना लाजिमी है.

यूएई एक मुस्लिम देश है और पाकिस्तान भी अपने आपको मुस्लिम देशों की कैटेगिरी में रखता है. पाकिस्तान के आर्थिक हालात किस तरह के हैं ये किसी से छिपे हुए नहीं है. कभी चीन तो कभी आईएमएफ और खाड़ी देशों के सामने हाथ फैलाने की पाकिस्तानी सरकार की आदत बन चुकी है. मुस्लिम कंट्री होने का हवाला देते हुए पाकिस्तान यूएई से कई बार एक दो बिलियन डॉलर मदद मांग चुका है. ऐसे में पाकिस्तान को पता चलेगा कि यूएई भारत में 50 बिलियन डॉलर या उससे ज्यादा का निवेश कर रहा है तो उस पर क्या बीतेगी?

पाकिस्तान चाहेगा कि यूएई पहले उसके यहां पर निवेश करें, लेकिन ऐसा मुमकिन इसलिए भी नहीं है कि पाकिस्तान में ऐसा कुछ नहीं जिस पर दांव खेला जा सके. यहां तक पॉलिटिकल स्थिरता ना के बराबर है. वहीं आतंकवाद चरम पर है. जिसे यूएई में बिल्कुल भी पसंद नहीं किया जाता. ऐसे में पाकिस्तान का यूएई का कदम हैरान कर सकता है.

सोर्स :- ” TV9 भारतवर्ष    


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