खुद की कंपनी बना उत्पादों की ब्रांडिंग
बिहार

खुद की कंपनी बना उत्पादों की ब्रांडिंग

मधुबनी। कृषि कानूनों को लेकर देशभर में आंदोलन चल रहा है। किसान इन्हें कृषि और खुद के हित में नुकसानदायक बता रहे हैं। बड़ी कंपनियों के हावी होने की बात भी कह रहे हैं। इससे इतर मधुबनी के किसान खुद की कंपनी बनाकर सफल हो रहे। वे किसान से लेकर व्यापारी तक की भूमिका में हैं। सालाना टर्नओवर तकरीबन 10 लाख है। इस साल इसे पांच गुना तक करने का लक्ष्य है।

खजौली प्रखंड के कन्हौली गांव निवासी स्नातक पास किसान बिलट प्रसाद सिंह ने जनवरी, 2019 में आसपास के गांवों के किसानों को जोड़कर कंपनी बनाने की पहल की। धीरे-धीरे कर एक दर्जन गांवों के 60 किसान जुड़ गए। खजौली कृषक प्रोड्यूसर नामक कंपनी बनाई गई। जैविक खेती का निर्णय लिया गया। उसी वर्ष बिलट प्रसाद सिंह, अशोक कुमार सिंह व सुनील कुमार ने 10 कट्ठे में काला धान की खेती की। उस वक्त 10 हजार खर्च हुए थे। प्रतिकट्ठा 77 किलो उपज हुई थी। 50 फीसद धान बीज के लिए रख लिया गया। शेष धान से चावल तैयार किया गया। 200 रुपये प्रतिकिलो की दर से चार क्विंटल चावल दिल्ली के व्यापारी को बेचा। इससे 80 हजार रुपये मिले। इसके अलावा धान का बीज बेच 75 हजार की आमदनी की। तीनों किसानों की सफलता देख वर्ष 2020 में तीन दर्जन किसानों ने करीब 70 क्विंटल काला धान का उत्पादन किया। चावल व बीज की बिक्री कर पांच लाख व काला गेहूं, हरी सब्जियों की जैविक खेती से कंपनी को छह लाख मिले।

कंपनी से जुड़े किसान अशोक कुमार सिंह, हेमनाथ महतो, चंद्रेश्वर महतो व राम किशन महतो सहित अन्य का कहना है कि कंपनी से जुड़ने के चलते खेती से लेकर फसल बेचने तक में आसानी हो गई है। किसानों को उपज के अनुसार उनका हिस्सा मिल जाता है। कंपनी के एमडी बिलट प्रसाद सिंह कहते हैं कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा ने काला धान व गेहूं उत्पादन के लिए फरवरी, 2020 में प्रमाणपत्र दिया था। इस वर्ष कंपनी का टर्नओवर करीब 50 लाख करने का लक्ष्य है। अब खरीदार उपज खरीदने के लिए खुद संपर्क करने लगे हैं।

जिला कृषि पदाधिकारी सुधीर कुमार कहते हैं कि किसानों का यह अच्छा प्रयास है। कंपनी बनाकर काम करने से उपज बेचने में बिचौलियों की भूमिका खत्म हो गई। इसका लाभ उन्हें मिल रहा।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक काला चावल : एंथ्रोसाइनिग की वजह से इस धान का रंग काला होता है। इंडियन राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट, कटक सहित देश के अन्य संस्थानों ने इस चावल में फाइबर, विटामिन-ई, जिक व आयरन की होने की पुष्टि की है। इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

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