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बांग्लादेश में शरणार्थी कैंप में इंदिरा गांधी की नजर में आए थे

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03 मई 2022 | मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आज 71 साल के हो गए हैं। गहलोत की छवि देश-प्रदेश में एक शार्प नेता की है। पिछले 45 साल से गहलोत किसी न किसी पद पर रहे हैं। 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के समय गहलोत ने एनएसयूआई कार्यकर्ता के तौर पर बंगाल में शरणार्थी शिविरों में काम किया। उसी वक्त तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की निगाहों में आए। इंदिरा गांधी की निगाहों में आना गहलोत के सियासी करियर के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इसके बाद गहलोत लगतार तरक्की करते गए।

गहलोत ने जिस वक्त राजनीति ज्वॉइन की, उस समय कांग्रेस में बड़े-बड़े नेता थे जिनका प्रदेशव्यापी आधार था, उन सबको सियासी मोर्चे पर शिकस्त दी।। वर्ष 1980 में पहली बार जोधपुर से सांसद बनने से लेकर तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने तक पिछले 42 साल में गहलोत लगातार पार्टी के कंपीटीटर्स को मात देते रहे हैं। इसके चलते कांग्रेस में गुटबाजी भी खूब पनपी है।

जादूगर पिता से जादू सीखा, स्टूडेंट लाइफ में कई बार जादूगर बने
अशोक गहलोत के पिता लक्ष्मण सिंह गहलोत जादूगर थे। जादू की कला गहलोत ने भी पिता सेसीखी थी। कई बार स्अूडेंट लाइफ में गहलोत जादू का प्रदर्शन करते थे। इसी वजह से कई बार गहलोत को उनके समर्थक जादूगर कहते हैं।

हाईकमान को हमेशा राजी रखने का फार्मूला बना सक्सेस मंत्र
गहलोत 42 साल पहले जोधपुर से सांसद बने तब कांग्रेस के दिग्गज नेता उनके कंपीटीटर थे, लेकिन गांधी परिवार के विश्वास के दम पर कोई उनके सामने नहीं ठहरा। राजनीतिक जानकारों के अनुसार गहलोत ने ऐसे ही अपने से सीनियर नेताओं को मात नहीं दी, इसके पीछे कई फैक्टर रहे। गहलोत शुरू से ही कांग्रेस की नब्ज समण् गए थे हकि लंबा चलना है तो पार्टी हाईकमान तक सीधी पहुंच और विश्वास होना चाहिए। गहलोत ने इन्हीं दो सूत्रों पर हमेशा काम किया। इंदिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी, सोनिया गांधी तक गहलोत की चली।

हाईकमान को हमेशा राजी रखने का फार्मूला बना सक्सेस मंत्र
गहलोत 42 साल पहले जोधपुर से सांसद बने तब कांग्रेस के दिग्गज नेता उनके कंपीटीटर थे, लेकिन गांधी परिवार के विश्वास के दम पर कोई उनके सामने नहीं ठहरा। राजनीतिक जानकारों के अनुसार गहलोत ने ऐसे ही अपने से सीनियर नेताओं को मात नहीं दी, इसके पीछे कई फैक्टर रहे। गहलोत शुरू से ही कांग्रेस की नब्ज समण् गए थे हकि लंबा चलना है तो पार्टी हाईकमान तक सीधी पहुंच और विश्वास होना चाहिए। गहलोत ने इन्हीं दो सूत्रों पर हमेशा काम किया। इंदिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी, सोनिया गांधी तक गहलोत की चली।

डॉक्टर बनना चाहते थे गहलोत
गहलोत साइंस ग्रेजुएट हैं, एलएलबी करने के साथ इकनॉमिक्स में पीजी हैं। गहलोत डॉक्टर बनना चाहते लेकिन मेडिकल एंट्रेस टेस्ट क्लीयर नहीं कर सके। गहलोत ने खुद एक निजी अस्पताल के समारोह में 2019 में यह बात कही थी।

Source;- ‘’दैनिक भास्कर’


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