वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिले CM शिवराज, स्ट्रीट वेंडर योजना के लिए मांगी मदद
मध्यप्रदेश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिले CM शिवराज, स्ट्रीट वेंडर योजना के लिए मांगी मदद

मध्य प्रदेश (MP) के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala sitaraman) से मुलाकात की. उन्होंने प्रदेश के आर्थिक हालात और ज़रूरतों पर बात की. सीएम ने स्ट्रीट वेंडर योजना में सिविल रेटिंग खत्म करने की मांग की.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारण से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने NEWS18 से बातचीत में कहा, ‘मध्य प्रदेश केंद्र सरकार की योजनाओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाला राज्य है. पीएम स्वनिधि योजना में स्ट्रीट वेंडर की सिविल रेटिंग नहीं होने की वजह से बैंक कर्ज़ नहीं देते हैं. इसलिए उन्होंने वित्त मंत्री से सिविल रेटिंग खत्म करने की मांग की है. निर्मला सीतारमण ने इस पर सहमति दी है.’ उन्होंने बताया कि गांव में ग्रामीण स्ट्रीट वेंडर योजना एमपी ने शुरू की है. इसमें 10 हजार रुपये ब्याज रहित देते हैं. इस योजना में राज्य की मदद करने का आश्वासन वित्त मंत्री ने दिया है.

एमपी की उपलब्धिशिवराज सिंह चौहान ने कहा, ‘वित्त मंत्री से उस संबंध में बात हुई जिसमें ये प्रावधान है कि आत्मनिर्भर भारत योजना में राज्य सुधार करेंगे तो अतिरिक्त पैसा दिया जाएगा. इसमें चार पैमाने सुधारने पर राज्य सरकार GDP का 3 फीसदी तक अतिरिक्त पैसा ले सकता है. एमपी ने तीन पैमानों पर सुधार किया है. हर सुधार पर .075 अतिरिक्त पैसा दिया जाता है.’ उन्होंने बताया कि आधारभूत ढांचे की बड़ी योजनाएं 31 मार्च 2021 तक पूरी होनी हैं. इनके लिए राज्य सरकार ने केंद्र से 1600 करोड़ रुपये मांगे थे. इसमें से 660 करोड़ रुपये केंद्र ने मंज़ूर किए थे, उसमें से 330 करोड़ मिल चुके हैं. बचे हुए 330 करोड़ देने की मांग की है. उन्होंने बताया कि बचे हए 1000 करोड़ में से भी 660 करोड़ भी स्वीकृत हुआ है.

1 फीसदी कर्ज़ की मांग
सीएम शिवराज ने बताया कि कोरोना की वजह से मध्य प्रदेश की भी आर्थिक स्थिति खराब हुई है. इस बार केंद्र से राज्य को 6900 करोड़ रुपये कम मिले हैं. उन्होंने बताया कि हमने मांग की है कि जिन राज्यों में वित्तीय प्रबंधन ठीक है उन्हें एक फीसदी अतिरिक्त कर्ज लेने की इजाज़त दी जाए. उन्होंने बताया कि बजट के पैमाने पर मध्य प्रदेश अच्छा प्रदर्शन करेगा. केंद्र को पैमाने तय करने हैं. राज्यों के लिए कुछ सुझाव भी भेजे जाएंगे.

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