22 अगस्त 2022 | आदिवासी समाज की प्रतिनिधि और अभी तक झारखण्ड की राज्यपाल रही द्रौपदी मुर्मू आखिरकार देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति बन गई हैं. राष्ट्रपति पद के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए प्रत्याशी के रूप में द्रौपदी मुर्मू ने विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को पराजित किया. द्रौपदी मुर्मू ने इस पद तक पहंचने से पहले अनेक बार दुखो और त्रासदी को झेला है. वर्ष 2010 से 2014के भीतर उनके दो बेटे और पति की मौत हो गई थी. इतना ही नहीं, उन्हें वर्ष 1984 में शादी कुछ समय बाद ही अपनी पहली संतान के रूप में 3 साल की बेटी की मौत देखनी पड़ी थी. इन तमाम दुखों का सामना करने के बावजूद मुर्मू ने हार नहीं मानी. हालांकि वो इस दौरान डिप्रेशन तक का शिकार रही थीं लेकिन उनके फौलादी हौसलों को कोई भी नहीं हिला सका. क्लर्क की नौकरी करने के बाद वे शिक्षक बनीं. फिर राजनीति में आ गई. पार्षद से लेकर विधायक और मंत्री तक का सफ़र भी उन्होंने पूरा किया. फिर वर्ष 2015 में वे झारखण्ड की राज्यपाल बनीं. और अब वे देश की राष्ट्रपति बन गई हैं. इस दौरान उन्हें अपने लीक से हटकर लिए गए फैसलों के लिए सराहना भी मिली.
राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार ऐलान होने के बाद मुर्मू खुद भी बहुत हैरान रहीं, और उन्हें पहले से इस बात की जानकारी तक नहीं थी. खुद उन्हें भी टीवी की ख़बरों से मालूम हुआ कि वो एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार घोषित की गई हैं. इस घोषणा के बाद उन्होंने कहा कि “मैं बहुत हैरान हूं और खुश भी हूं, मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे इतने बड़े पद के लिए उम्मीदवार बनाया जाएगा. वहीं उन्होंने भाजपा की सराहना करते हुए कहा कि इस पार्टी ने एक आदिवासी को देश के सबसे बड़े पद के लिए चुनकर यह साबित कर दिया है कि वह वास्तव में “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” के ध्येय पर अमल कर रही है. निश्चित ही, द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति बनने से देश में आदिवासी समुदाय और महिलाओं के प्रति सम्मान में और भी बढ़ोत्तरी होगी.
सोर्स :- वी के झा
