25 जून 2022 |अगर आपके सपने बड़े हों, तो उन सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत भी उस स्तर की करनी पड़ती है. सच कहा गया है कि सफलता की दौड़ व्यक्ति को स्वयं घोषित करनी होती है. ऐसे में कई बार उन सपनों को पूरा करने के लिए किया गया कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता. इस बात का उदाहरण महाराष्ट्र के वरुण कुमार बरनवाल और बिहार के मनोज कुमार रॉय ने दिया है. जो कभी साइकिल का पंक्चर बनाने व अंडे बेचने का काम किया करते थे, वे आज अफसर के पद पर रहकर देश की सेवा कर रहे हैं.
हालांकि, दोनों ही अपने जीवन में बेहद गरीबी का सामना कर चुके हैं. दोनों ने अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए दुकान व रेहड़ी पर काम किया और इसी के साथ निरंतर प्रयास करते हुए यूपीएससी की परीक्षा पास की.
पंक्चर की दुकान से चलती थी रोजी-रोटी
आईएएस वरुण कुमार बरनवाल (IAS Varun Kumar Barnwal) महाराष्ट्र के पालघर जिले के बोईसर के रहने वाले हैं. वरुण के पिता की साइकिल के पंक्चर बनाने की एक दुकान थी, जिससे पूरे परिवार की रोजी-रोटी चला करती थी. साल 2006 में वरुण ने कक्षा 10वीं की परीक्षा दी थी. परीक्षा समाप्त होते ही चार दिन बाद हार्ट अटैक चलते वरुण के पिता की अचानक मृत्यु हो गई थी, जिस कारण पूरे परिवार पर परेशानियों का पहाड़ टूट पड़ा था.
शिक्षकों ने भरी 11वीं व 12वीं की फीस
वरुण पढ़ाई में काफी अच्छे थे. इसी कारण से उनकी मां ने उन्हें पिती की मृत्यु के बाद भी पढ़ाई नहीं छोड़ने दी. वहीं वरुण ने भी पढ़ाई के साथ-साथ घर खर्च चलाने के लिए अपने पिता की साइकिल रिपेयरिंग की दुकान संभाल ली. बता दें कि वरुण 10वीं कक्षा के टॉपर रहे थे, जिस कारण उनकी पढ़ाई के प्रति लगन के देखते हुए कक्षा 11वीं व 12वीं की फीस स्कूल के शिक्षकों ने मिलकर भरी थी. वहीं कॉलेज में दाखिले की फीस के 10 हजार रुपए उस डॉक्टर ने भरे थे, जिसने वरुण के पिता का इलाज किया था. इतनी मदद के बाद वरुण ने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा.
Source "ZEEन्यूज़ हिंदी"
