16 जून 2023 ! PM नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे से पहले रक्षा खरीद परिषद ने आर्म्ड ड्रोन MQ-9 प्रीडेटर की खरीद को मंजूरी दे दी है। अब इसे आखिरी मंजूरी कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी से मिलनी है।
तीन बिलियन डॉलर में 30 MQ-9 ड्रोन अमेरिका से लिए जाएंगे। आर्मी, एयरफोर्स को 8-8 और नेवी को 14 ड्रोन मिलेंगे। अमेरिकी दौरे के दौरान PM नरेंद्र मोदी इस डील को मंजूरी दे सकते हैं।
MQ-9B सी-गार्जियन ड्रोन जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि इसे समंदर को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। इसके अमेरिका की जनरल एटॉमिक्स ने बनाया हैं।
यह ड्रोन हर प्रकार के मौसम में 30 घंटे से अधिक समय तक सैटेलाइट के सहारे उड़ान भर सकता है।
इसका स्काई वर्जन भी अब बना लिया गया है। इसे स्काई-गार्जियन ड्रोन कहते हैं। जनरल एटॉमिक्स की वेबसाइट के मुताबिक, इस ड्रोन के जरिए समुद्री क्षेत्र में दिन या रात में होने वाली हर एक्टिविटी की रियल टाइम में जानकारी दे सकता है।
यह ड्रोन इन-बिल्ट वाइड-एरिया मैरीटाइम रडार, ऑटोमेटिक आईडेंटिफिकेशन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट मेजर्स और एक सेल्फ कंटेन्ड एंटी सबमरीन वॉरफेयर यानी ASW किट से लैस है।
यह ड्रोन 2721 किलोग्राम की मिसाइलों को लेकर उड़ान भर सकता है। 40 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर उड़ने के कारण दुश्मन इस ड्रोन को आसानी से पकड़ नहीं पाते हैं। इसमें दो लेजर गाइडेड एजीएम-114 हेलफायर मिसाइलें लगाई जा सकती हैं। इसे ऑपरेट करने के लिए दो लोगों की जरूरत होती है।
अमेरिकी कंपनी जनरल एटॉमिक एयरोनॉटिकल के मुताबिक 2001 में MQ-9A ड्रोन ने पहली बार उड़ान भरी थी। इस ड्रोन का अपडेटेड वर्जन ही MQ-9B है। 2000 के बाद अमेरिकी सेना को चालक रहित एक ऐसे एयरक्राफ्ट की जरूरत हुई, जिसे रिमोट से कंट्रोल किया जा सके।
इसी के फलस्वरूप MQ-9A बना था। यह लगातार 27 घंटे तक उड़ान भर सकता था। इसके बाद इसी ड्रोन का अपडेटेड वर्जन MQ-9B SkyGuardian और MQ-9B SeaGuardian बना। मई 2021 तक अमेरिका के पास 300 से ज्यादा ऐसे ड्रोन थे।
QUAD चीनी दबदबे पर रोक लगाने के लिए बना भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का गठबंधन है। इसमें शामिल सभी देश MQ-9 प्रीडेटर ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
2020 में भारतीय नौसेना को समुद्री सीमा की निगरानी के लिए अमेरिका से दो ‘MQ-9B’ सी गार्जियन ड्रोन एक साल के लिए लीज पर मिले थे। बाद में लीज टाइम बढ़ा दिया गया।
इसके साथ ही फ्रांस, बेल्जियम, डोमिनिकन गणराज्य, जर्मनी, ग्रीस, इटली, नीदरलैंड, स्पेन, UK, UAE, ताइवान, मोरक्को जैसे देश इसका इस्तेमाल करते हैं।
सोर्स :- “दैनिक भास्कर”
