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मध्य प्रदेश में किसानों को अच्छी बारिश का इंतजार, फसल हो रही खराब

ByPrompt Times

Aug 7, 2020
मध्य प्रदेश में किसानों को अच्छी बारिश का इंतजार, फसल हो रही खराब
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देश के कई राज्यों में जहां इन दिनों बारिश और बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है तो वहीं हिंदुस्तान के दिल मध्य प्रदेश को मॉनसून आधे से ज्यादा बीत जाने के बाद भी अच्छी बारिश का इंतजार है. मध्य प्रदेश में जहां पिछले साल सामान्य से ज्यादा बारिश ने किसानों की फसल चौपट कर दी थी तो इस साल मॉनसून की बेरुखी किसानों पर भारी पड़ रही है.

सामान्य से करीब 14 फीसदी कम बारिश का दंश झेल रहे मध्य प्रदेश के किसानों के लिए सीएम शिवराज तक को बादलों से बरसने की गुहार लगानी पड़ रही है और किसान को खड़ी फसल तक हटानी पड़ रही है. मॉनसून में कैसे मध्य प्रदेश के किसान झेल रहे हैं बारिश का सूखा… पढ़िए आजतक की इस ग्राउंड रिपोर्ट में.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का ट्वीट ये बताने के लिए काफी है कि हिंदुस्तान के दिल में मॉनसून की बेरुखी ने कैसे सरकार तक को लाचार कर दिया है. जहां एक तरफ देश के ज्यादातर हिस्सों में बाढ़ के हालात हैं तो वहीं मध्य प्रदेश में किसानों को अच्छी बारिश का इंतजार है. मध्य प्रदेश में इस साल बारिश की बेरुखी ने ऐसा सितम ढाया है कि खुद मुख्यमंत्री तक को बादलों से बरसने की गुहार लगानी पड़ रही है.

बारिश ना होने से जहां लोग तो परेशान हैं ही वहीं इसका सबसे ज्यादा असर अन्नदाताओं यानि किसानों पर पड़ रहा है. कहीं खड़ी फसल चौपट हो गयी तो कहीं फसल खराब होने की कगार तक पहुंच गयी है. सोयाबीन, धान, उड़द और प्याज की फसलों पर कम बारिश की जोरदार मार पड़ी है.

किसानों के इसी दर्द को समझने के लिए आजतक की टीम भोपाल से करीब 60 किलोमीटर दूर विदिशा जिले के खामखेड़ा गांव पहुंची. इस गांव के रहने वाले किसान राजकुमार बघेल ने करीब 25 बीघा खेत में सोयाबीन की फसल लगाई थी. शुरुआत में तो बारिश हुई लेकिन उसके बाद राजकुमार करीब एक महीने से अच्छी बारिश के लिए तरस गए हैं.

खराब हुई फसल

आलम ये है कि खेत के एक हिस्से में खड़ी सोयाबीन की फसल इतनी खराब हो गयी कि उसे हटाना पड़ा और खेत तक हांकना पड़ा. अब राजकुमार रोजाना खेत आते हैं और आसमान में छाए बादलों के बरसने का इंतजार करते हुए मुरझा रही सोयाबीन की बची हुई फसल को देखते रहते हैं. इनकी सोयाबीन की ये बची फसल भी खराब होने की कगार पर है. पत्तियां पीली पड़ गयी हैं और फूल गिरने लगे हैं.

‘आजतक’ से बात करते हुए किसान राजकुमार बघेल ने बताया कि इस साल उन्होंने सात क्विंटल सोयाबीन बोया था, उतना ही डीएपी भी डाला था. हकाई, जुताई सब मिलाकर करीब एक लाख रुपये का खर्च आया था. वो एक लाख तो नष्ट हो गया और अब दूसरी फसल के लिए फिर से कर्ज लेना पड़ेगा. बादल तो रोज होते हैं लेकिन पानी पता नहीं किधर चला जाता है.’

बादलों की बेरुखी विदिशा से करीब 350 किलोमीटर दूर बसे मंदसौर में भी देखने को मिल रही है. यहां के किसान भी कम बारिश की वजह से अपनी नजरों के सामने फसल बर्बाद होते देख रहे हैं. बता दें कि मंदसौर में इस साल जो किसान अल्पवर्षा से परेशान हैं वही किसान पिछले साल जोरदार बारिश और बाढ़ की वजह से अपनी फसल गंवा चुके हैं. ये लगातार दूसरा साल है जब मंदसौर में किसान परेशान हैं, पहले ज्यादा बारिश और अब बारिश ना होने से.

सोयाबीन और प्याज की फसल लगाने वाले मंदसौर के चतरानंद पाटीदार ने ‘आजतक’ से बात करते हुए बताया कि पिछले साल इतना पानी बरसा कि फसल नष्ट हो गयी और इस साल फसल खड़ी है तो पानी नहीं बरस रहा है. पानी पड़े तो फसल चले, पानी बहुत कम पड़ रहा है. सोयाबीन नष्ट हो रहा है. प्याज भी बोया था लेकिन गर्मी से प्याज बिल्कुल खत्म हो गए.’

मध्यप्रदेश में बारिश का आंकड़ा (1 जून-2 अगस्त)

दरअसल, किसानों की ये परेशानी बेवजह नहीं है. मॉनसून के आंकड़ों पर नजर डालें तो समझ में आ जाएगा कि बारिश ने कैसे मध्य प्रदेश से दूरी बना रखी है. मौसम विभाग के मुताबिक-

– इस साल मध्य प्रदेश में सामान्य से कम बारिश हुई है.

– 1 जून से 2 अगस्त तक मध्य प्रदेश में सामान्य से 14% कम बारिश हुई है.

– प्रदेश के 20 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है.

– इनमें 9 जिले पश्चिमी मध्य प्रदेश में हैं तो वहीं 11 जिले पूर्वी मध्य प्रदेश में हैं.

– कम बारिश से सोयाबीन, उड़द, धान और प्याज की फसल पर संकट मंडरा रहा है.

भोपाल मौसम विभाग के इस चार्ट से आप आसानी से समझ सकते हैं कि कैसे मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बारिश सामान्य या उससे कम और ज्यादा हुई है. इस चार्ट में जो लाल रंग वाले हिस्से हैं वो सामान्य से कम बारिश वाले जिलों को दर्शा रहे हैं. जबकि हरा रंग सामान्य बारिश वाले जिलों के लिए है.

मौसम विभाग भी मान रहा है कि इस साल बारिश ने निराश किया है क्योंकि कोई ऐसा सिस्टम नहीं बना जिससे प्रदेश में अच्छी बारिश हो. मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक जीडी मिश्रा ने ‘आजतक’ से बात करते हुए बताया, ‘हिमालय की तराई में मॉनसून द्रोणिका एक जगह नहीं ठहर पा रही है और उत्तर-पूर्व के राज्यों की तरफ दबाव ज्यादा बना रही है. इसलिए वहां तो अच्छी बारिश हो रही है लेकिन मॉनसून में जो बारिश मध्य प्रदेश में होती है अब तक वैसी बारिश नहीं हुई.’

उन्होंने बताया, ‘मॉनसून सीजन में जो जुलाई और अगस्त का महीना होता है वो मध्य प्रदेश के लिए बड़ा पीक पीरियड होता है. जून में तो फिर भी ठीक वर्षा हुई लेकिन जुलाई ने थोड़ा हमें निराश किया है. इस बार सिस्टम ऐसा कोई बना नहीं जो प्रदेश को अच्छी वर्षा देता. इसलिए किसानों और लोगों में निराशा है.’

फसल खराब होने पर सरकार करेगी मदद

बारिश ना होने से किसानों को हो रहे नुकसान पर सरकार की भी नजर है. सूबे के कृषि मंत्री कमल पटेल एक तरफ इंद्र देवता से अच्छी बारिश की गुहार लगा रहे हैं तो ये भी बोल रहे हैं कि किसानों को अगर नुकसान होता है तो सरकार उन्हें अकेला नहीं छोड़ेगी, उन्हें राहत प्रदान करेगी.

अल्पवर्षा पर ‘आजतक’ से बात करते हुए कृषि मंत्री कमल पटेल ने कहा, ‘सरकार किसानों के साथ खड़ी है. हम इंद्र देवता से प्रार्थना करते हैं कि अच्छी बारिश कर दें ताकि बोवनी समय पर पूरी हो जाए. किसानों को राहत देने का प्रावधान है. उसके तहत सूखा के कारण या फसल खराब होती है या इल्ली का प्रकोप होता है या किसी प्रकार की प्राकृतिक आपदा होती है तो राहत दी जाती है ताकि उसे कर्ज न लेना पड़े. मध्य प्रदेश सरकार किसानों के साथ खड़ी हुई है.’



















AAJTAK


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