महिलाओं के हाथों प्राकृतिक खेती की कमान देख राज्यपाल भी हैरान
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महिलाओं के हाथों प्राकृतिक खेती की कमान देख राज्यपाल भी हैरान

महिलाओं के हाथों प्राकृतिक खेती की कमान देख राज्यपाल भी हैरान

कृषि-पर्यावरण विकास सोसाइटी (एइडीएस) द्वारा डॉ. वाई.एस. परमार कृषि एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में आयोजित तीन दिवसीय इंटरनेशनल कान्?फ्रेंस के शुभारंभ पर राज्?यपाल बंडारू दत्?तात्रेय सोलन पहुंचे। इस दौरान उन्?होंने यहां कई राज्?यों से पहुंचे रिसर्च स्?टूडेंट और प्रोफेशरों को संबोधित किया और प्राकृतिक खेती सहित पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित भी किया। इस मौके पर उन्?होंने बातचीत के दौरान कहा कि प्रदेश में जब भी कृषि पर आधारित सेमीनार होता है तो महिलाएं भी

कृषि-पर्यावरण विकास सोसाइटी (एइडीएस) द्वारा डॉ. वाई.एस. परमार कृषि एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में आयोजित तीन दिवसीय इंटरनेशनल कान्फ्रेंस के शुभारंभ पर राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय सोलन पहुंचे। इस दौरान उन्होंने यहां कई राज्यों से पहुंचे रिसर्च स्टूडेंट और प्रोफेसर को संबोधित किया और प्राकृतिक खेती सहित पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित भी किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जब भी कृषि पर आधारित सेमीनार होता है तो महिलाएं भी काफी संख्या में पहुंच रही हैं। यह हैरानी की बात है कि महिलाएं अपने हाथों में प्राकृतिक खेती की कमान ले रही हैं। यह प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के विकास के लिए अच्छा संकेत है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कृषक गतिविधियों में विविधता लाने की आवश्यकता पर बल दिया जाएगा। मधुमक्खी पालन, जड़ी-बूटियों की खेती, कृषि, मुर्गी पालन और पशुपालन जैसी गतिविधियां अपनाने के प्रति प्रेरित किया जाना चाहिए, ताकि फसल न होने की स्थिति में किसानों को आय के वैकल्पिक साधन उपलब्ध हो सकें।

वैश्विक स्तर पर एक ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे प्रत्येक को पेट भर भोजन मिल सके और प्राकृतिक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना गरीबी को भी काफी हद तक कम किया जा सके। जल स्रोतों के अंधाधुंध दोहन पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इस संबंध में नीतियों के पुन:निर्धारण की आवश्यकता है। इससे पहले, नौणी विवि के कुलपति डॉ. परविदर कौशल ने बताया कि सम्मेलन में 15 राज्यों और पांच देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। कृषि पर्यावरण विकास सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ छत्तर पाल सिंह ने भी सम्मेलन के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से बताया। सम्मेलन के संयोजक डॉ. नदीम अख्तर ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा।

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