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500 साल पहले कैसे शुरू हुई थी लंगर परंपरा, पाकिस्तान से जुड़ी है कहानी?

ByPrompt Times

Nov 15, 2024
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पाकिस्तान के फर्रुखाबाद में स्थित गुरुद्वारा सच्चा सौदा साहिब से लंगर परंपरा शुरू हुई थी. लंगर के जरिये देश-विदेश में लोगों को खाना खिलाया जा रहा है. बाबा गुरु नानक साहिब ने 20 रुपये से पहली बार साधुओं को खाना खिलाया था. जिसके बाद से ही यह परंपरा चलन में आ गई थी.

 

पाकिस्तान में स्थित गुरुद्वारा सच्चा सौदा साहिब वहीं स्थान जहां से लंगर की परंपरा शुरुआत हुई थी, जो आज दुनिया भर में सिखों की पहचान है. सिखों का समर्पण और सेवा भाव दुनियाभर में प्रसिद्ध है. लंगर परंपरा की शुरुआत 500 साल पहले हुई थी. श्री गुरु नानक साहिब को 15-16 की उम्र में उनके पिता मेहता कालू ने 20 रुपये देकर व्यापार करने के लिए फारूकाबाद (चुहड) भेज दिया था. उस समय यह स्थान श्री ननकाना साहिब गुरुद्वारा से थोड़ी ही दूर एक बड़ा व्यापार का केंद्र था.

 

पिता (मेहता कालू) ने बाबा गुरु नानक साहिब को व्यापार करने के लिए 20 रुपए दिए थे. बाबा नानक व्यापार करने के लिए जा रहे थे. इसी दौरान रास्ते में उनको कुछ भूखे साधु मिले. साधुओं ने बाबा को बताया कि वह पिछले काफी दिनों से भूखे हैं. इस बात का पता चलते ही बाबा ने उन्हें खाने के लिए कुछ पैसे दिए, लेकिन साधुओं ने उनसे पैसा लेने से मना कर दिया. उन्होंने कहा कि हम पैसा नहीं लेंगे और आगे उन्होंने कहां कि अगर आप अपने हाथ से बनाकर खाना खिलाओगे, तो हम खा लेंगे.

खाली हाथ लौटे बाबा गुरु नानक साहिब

यह बात सुनते ही श्री गुरु नानक साहिब काफी खुश हो गए और अपने साथियों के साथ साधुओं के लिए खाना बनाने में लग गए. सभी साधुओं ने खूब चाव से खाना खाया. साधुओं को खाना खिलाने में बाबा नानक के सभी पैसे खत्म हो गए थे. पैसे खत्म होने के बाद बाबा खाली हाथ घर लौटे. उन्होंने कुछ भी नहीं खरीदा था, जिसे वह अपने पिता को मेहता कालू को दिखा सकें. साधुओं को खाना खिलाने के बाद बाबा गुरु नानक साहिब गांव तलवंडी (ननकाना साहिब) पहुंचे.

 

नहीं पहुंचे थे घर

गांव पहुंचने के बाद बाबा अपने घर नहीं गए क्योंकि उन्हें पता था कि पिता जी नाराज होंगे. बाबाजी अपने घर के पास झाड़ियों में छिपकर बैठे थे. जब घर वालों को पता चला कि बाबा नानक साहब घर नहीं पहुंचे, तो परिवार वाले काफी डर गए. उन्होंने तुरंत बाबा की तलाश शुरू की. काफी देर खोजने के बाद बाबा नानक साहब मिले. 20 रुपये खर्च होने की बात सुनते ही बाबा जी के पिता काफी नाराज हो गए.

परिवार के समझाने के बाद शांत हुआ था गुस्सा

परिवार और पड़ोस में रहने वाले लोगों के समझाने के बाद बाबा गुरु नानक साहिब का गुस्सा शांत हो गया था. जिसे जगह बाबा गुरु नानक साहिब छुपे थे उस जगह को आज गुरुद्वारा तंबू साहिब के नाम से जाना जाता है.

 

source – prompt times


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