ई-रिक्शा चालक के बेटे ने कायम की मिसाल, लंदन के इस बड़े संस्थान तक पहुंचने वाले पहले भारतीय बने
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ई-रिक्शा चालक के बेटे ने कायम की मिसाल, लंदन के इस बड़े संस्थान तक पहुंचने वाले पहले भारतीय बने

6 साल पहले विकासपुरी के पास चंद्र विहार में रहने वाले कमल सिंह (Kamal singh Indian Ballet Dancer) ने ‘एबीसीडी‘ फिल्म देखी और फिर वहीं से शुरू हुआ सफर रूस से होते हुए लंदन तक पहुंचने का. दरअसल, 20 साल के कमल (Kamal singh) इंग्लिश नेशनल बैले स्कूल, लंदन के लिए चुने जाने वाले पहले भारतीय बने हैं.

डांस ​सीखने का फैसला आसान नहीं था
कमल के पिता ई-रिक्शा चालक हैं, परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर है. ऐसे में बैले जैसी डांस फॉर्म सीख पाना काफी मुश्किल था. मगर कमल के गुरु फर्नांडो अगलेरा ने कमल का हाथ कभी नहीं छोड़ा. कमल और उनके गुरु के मार्गदर्शन ने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा संसाधन नहीं, बल्कि अवसर खोजती है. 

कमल को इंग्लिश नेशनल बैले स्कूल लंदन में दाखिला मिल गया है. यहां एक वर्ष का प्रशिक्षण पूरा कर कमल प्रोफेशनल बैले डांस की दुनिया में अपना कदम रखेंगे.

ऐसे मिले अपने गुरु से
इंटरनेट पर काफी रिसर्च के बाद कमल को फर्नांडो अग्लेरा का पता मिला, फ्री ट्रायल के बाद कमल का डांस स्कूल में सिलेक्शन हुआ. फर्नांडो ने बताया कि कमल शुरू से ही प्रतिभाशाली और अनुशासित स्टूडेंट थे. उनकी मेहनत में कभी कोई कमी नहीं होती थी. कमल के आगे सबसे बड़ा चैलेंज उनकी आर्थिक स्थिति थी. ऐसे में उनके गुरु ने स्कूल की ओर से उन्हें स्कॉलरशिप दिया दी. इसके बाद कमल के पिताजी करनैल सिंह को स्कूल में बुलाया और प्रशिक्षण शुरू करने की बात कही.

पिता ने रखी ये शर्त
जब कमल ने अपने पिताजी से पहली बार बैले डांस फॉर्म को अपनाने की बात कही, तब उनके पिताजी इस फैसले खुश नहीं थे. हालांकि उन्होंने कुछ समय बाद एक शर्त पर कमल को आगे बढ़ने की अनुमति दी. कमल के पिता चाहते थे कि कमल पहले 12th पास करें.

परिवार और गुरु का प्रोत्साहन मिलने के बाद कमल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. इंग्लिश स्कूल ऑफ बैले में चयन होने के बाद कमल की आर्थिक रूप से सहायता करने के लिए पूरी दुनिया उनके साथ खड़ी है.

क्राउड फंडिंग कैम्पेन से लाखों की मदद मिली
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे क्राउड फंडिंग से कमल 17 लाख के करीब फंड जुटा चुके हैं. हालांकि लंदन में रहने और पढ़ाई पूरी करने के लिए उन्हें ज्यादा पैसों की जरूरत होगी. लेकिन दो वक्त के खाने और जीवन की मूलभूत सुविधाओं के लिए जद्दोजहद करने वाले कमल और उनके परिवार के लिए ये अवसर किसी वरदान से और फर्नांडो अगलेरा किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं.

फर्नांडो अगलेरा ने कमल मे छुपी हुई प्रतिभा को पहचान के हर संभव तरीके से कमल की मदद की. अपनी मेहनत और लगन के दम पर आज कमल का सपना पूरा होने जा रहा है. कमल उस मुकाम पर हैं, जहां से उन्हें  देश का नाम रोशन करने के साथ ही खुद का भविष्य भी उज्ज्वल नजर आता है.















ZEE

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