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क्या कम टेस्टिंग से छिप रही है दक्षिण एशिया में संकट की गंभीरता?

ByPrompt Times

Jul 23, 2020
क्या कम टेस्टिंग से छिप रही है दक्षिण एशिया में संकट की गंभीरता?
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भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित होने वालों का आंकड़ा 11 लाख को पार कर गया है. अमेरिका और ब्राजील के बाद भारत इस मामले में अब तीसरे नंबर पर आ गया है.

भारत की बड़ी आबादी को देखते हुए यह संख्या चौंकाती नहीं है, लेकिन इसके आस-पड़ोस के देश भी कोरोना की तगड़ी चपेट में हैं.

पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और अफगानिस्तान में हमें बड़े पैमाने पर कोरोना के मामले देखने को मिल रहे हैं.

ग्लोबल हॉटस्पॉट बना भारत

हर 20 दिन में कोरोना वायरस से संक्रमित होने वालों का आंकड़ा दोगुना हो रहा है और इस तरह से भारत अब इस महामारी का ग्लोबल हॉटस्पॉट बन गया है. देश में अभी भी मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है.

हालांकि, इस इलाके के दूसरे देशों में रोजाना आने वाले मामलों की संख्या एक अलग ट्रैजेक्टरी दिखाती है. ज्यादातर देशों में मई और जून में तेज उछाल आने के बाद संक्रमितों की संख्या में गिरावट का ट्रेंड दिख रहा है.

पाकिस्ता में संक्रमण के ग्राफ के नीचे आने को लेकर एक सतर्कता भरी उम्मीद नजर आ रही है. कुल मामलों की संख्या के आधार पर पाकिस्तान इस इलाके में दूसरे नंबर पर है.

हर दिन 6,000 नए मामलों के साथ जून के मध्य में अपने चरम पर पहुंचने के बाद अब जुलाई मध्य में यह आंकड़ा गिरकर 2,000 केस रोजाना से भी कम पर आ गया है.

हालांकि, चिंता अभी भी बनी हुई है और कुछ लोगों का कहना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि वायरस पर नियंत्रण पा लिया गया है.

इसी तरह से बांग्लादेश में 16 जुलाई तक कुल 1,96,323 मामले आ चुके हैं. यहां जून मध्य से जुलाई की शुरुआत के बीच रोजाना नए आने वाले केसों की संख्या अपने चरम पर पहुंच चुकी है.

इसके बाद यहां पर पॉजिटिव आने वाले लोगों की संख्या घटने लगी है. बांग्लादेश में फिलहाल हर 28 दिन में मामले दोगुने हो रहे हैं.

अफगानिस्तान में संक्रमितों का आंकड़ा अपने पड़ोसी देशों के मुकाबले कम रफ्तार से दोगुना हो रहा है. मौजूदा वक्त में यहां हर 41 दिन में केस दोगुने हो रहे हैं. लेकिन, यहां पर आधिकारिक आंकड़ों की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठ रहा है.

नेपाल और श्रीलंका में संक्रमितों की संख्या काफी कम है.

नेपाल में सरकार ने 100 दिन तक लॉकडाउन रखा. उस दौरान वहां पर भारत से सटे हुए इलाकों में ज्यादातर केस देखने को मिले थे.

हालिया ट्रेंड दिखा रहा है कि कुल मामले रोजाना आने वाले नए मामलों की संख्या में यहां गिरावट हो रही है. लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है कि कम्युनिटी में केसों का पता ही नहीं चल पाना इसकी आंशिक वजह हो सकती है.

श्रीलंका में अप्रैल से ही मामलों में इजाफा शुरू हो गया था, लेकिन इसने देश में मामले कम रखने में सफलता हासिल की है. श्रीलंका ने एक सख्त लॉकडाउन लागू किया था. देश में पॉजिटिव आए मरीजों के कॉन्टैक्ट्स का पता लगाया गया और संक्रमितों के लिए सख्त क्वारंटीन नियमों को लागू किया गया.

बीबीसी सिंहला की सरोज पथिराना बताती हैं, “पब्लिक हेल्थ अफसरों, स्थानीय पुलिस, खुफिया अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन के जरिए एक व्यापक कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग सिस्टम यहां पर स्थापित किया गया था.”

श्रीलंका ने आगामी संसदीय चुनावों से पहले हाल में ही लॉकडाउन हटाया है.

कम टेस्ट होना

दक्षिण एशिया में दुनिया की कुल आबादी का एक-चौथाई हिस्सा रहता है. लेकिन, कुल संक्रमितों के केवल 11 फीसदी ही यहां पर पाए गए हैं.

वायरोलॉजिस्ट डॉ. शाहिद जमील कहते हैं, “भारत और बाकी के दक्षिण एशिया में हर 10 लाख लोगों पर कुल मामले कम हैं, साथ ही हर 10 लाख लोगों में होने वाले टेस्ट की संख्या भी कम है.”

वह कहते हैं कि हालांकि इन देशों में होने वाले टेस्ट की कुल संख्या ज्यादा दिखाई देती है, लेकिन जब आप इन देशों की आबादी को देखते हैं तो होने वाले टेस्ट की संख्या नाकाफी नजर आती है.

मिसाल के तौर पर, भारत ने धीरे-धीरे अपनी टेस्टिंग को बढ़ाया है और अब तक यहां 1.03 करोड़ टेस्ट हो चुके हैं. पाकिस्तान ने अब तक 16 लाख से ज्यादा टेस्ट किए हैं.

लेकिन, इन देशों में प्रति व्यक्ति टेस्ट दूसरे ज्यादातर देशों के मुकाबले बहुत कम हैं.

पाकिस्तान और बांग्लादेश में तो टेस्टिंग के लेवल में गिरावट आई है. इसका असर पॉजिटिव आने वाले केसों की संख्या पर दिखाई देगा.

पाकिस्तान में अपने चरम पर 31,000 टेस्ट रोजाना किए गए थे. लेकिन, जून के आखिरी हफ्ते से इसमें गिरावट आने लगी. अब पाकिस्तान में बिना लक्षण वाले किसी भी शख्स की टेस्टिंग नहीं की जा रही है.

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और इसके आसपास के इलाकों में किए गए एक हालिया सर्वे से पता चला है कि यहां पर ही करीब 3 लाख लोग वायरस से संक्रमित हो सकते हैं, जिनमें से ज्यादातर बिना लक्षणों वाले मरीज हैं.

बांग्लादेश में भी टेस्टिंग के आंकड़ों में गिरावट का ट्रेंड नजर आ रहा है. साथ ही एक फर्जी नेगेटिव टेस्ट सर्टिफिकेट्स की बिक्री के एक घोटाले के सामने आने के बाद से इन टेस्ट की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं.

नेपाल में 16 जुलाई तक 3 लाख से थोड़े से ज्यादा टेस्ट हुए हैं. सरकार ने पहले कहा था कि वे जुलाई से 10,000 टेस्ट रोजाना करेंगे, लेकिन यह आंकड़ा अभी भी 4,000 टेस्ट रोजाना के स्तर के करीब है.

अफगानिस्तान में टेस्टिंग के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं. रेड क्रेसेंट ने हाल में ही चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि यहां पर आधिकारिक आंकड़ों के मुकाबले संक्रमितों की तादाद कहीं ज्यादा हो सकती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने किसी भी देश या इलाके में प्रति कनफर्म मामले में 10 से 30 टेस्टिंग का बेंचमार्क तय किया है.

दक्षिण एशियाई देश इस मानक पर काफी पीछे हैं. रूस और जापान की आबादी बांग्लादेश के आसपास है, लेकिन यहां पर हर पॉजिटिव केस पर क्रमशः 32 और 26 टेस्ट हो रहे हैं. बांग्लादेश में हर पॉजिटिव केस पर 5 टेस्ट हो रहे हैं जो कि डब्ल्यूएचओ के बेंचमार्क से कम है.

नेपाल में 14 जून तक हर पॉजिटिव केस पर 25 टेस्ट हो रहे हैं. इसके बाद का कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है.

गैर-भरोसेमंद आंकड़े

इन देशों में होने वाली मौतें पश्चिमी देशों के मुकाबले काफी कम हैं.

यह एक उत्साहजनक संकेत है, लेकिन एक ऐसे इलाके में जहां स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च का एक खराब ट्रैक रिकॉर्ड है, वहां पर ये आंकड़े सवाल पैदा करते हैं.

यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क के प्रोफेसर कामरान सिद्दीकी कहते हैं, “कई मौतें रजिस्टर भी नहीं की जाती हैं और इन मौतों की वजह को भी स्पष्ट नहीं किया जाता है.”

लेकिन, डॉ. शाहिद जमील का कहना है कि भले ही मौतों का आंकड़ा दर्ज किया जा रहा है, इसके बावजूद यह अंतर बेहद बड़ा है.

इन देशों में आबादी की औसत उम्र 18 से 34 साल के बीच है.





















BBC


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