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बचपन में पशुओं की देखभाल करना सीखी, शादी के बाद उसी को बनाया कमाई का जरिया

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13  सितंबर 2022 | भारत में 48 साल बाद हो रही वर्ल्ड डेयरी समिट में देशभर के 800 किसान भी आए हैं। इन किसानों को इसलिए बुलाया गया है, ताकि वे दुनिया के करीब 50 देशों से आए डेलिगेट्स से कुछ नया सीख सकें और उन्हें भारत की श्वेत क्रांति के बारे में बता सकें।

समिट में आए PM नरेंद्र मोदी ने छोटे-छोटे पशुपालकों, खासकर महिलाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ”भारत का डेयरी सेक्टर साढ़े आठ लाख करोड़ रुपए का है, इसकी ड्राइविंग फोर्स हमारी महिलाएं, माताएं-बहनें हैं। मैं वर्ल्ड डेयरी सटि से जुडे सभी महानुभावों से भारत की नारी शक्ति की इस भूमिका को रिकॉग्नाइज करने और इसे विभिन्न प्लेटफार्म तक ले जाने का भी आग्रह करुंगा।” केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भी इन महिलाओं से मुलाकात की।

चारा देने, दूध निकालने से मोलभाव तक खुद करती हैं ये महिलाएं
राजस्थान का अजमेर जिला रोजाना 4 लाख लीटर दूध का उत्पादन करता है। जिला दूध संघ अजमेर 26 पशुपालक किसानों को लेकर इस समिट में आया है। 26 में से 8 महिलाएं हैं। ये वे महिलाएं हैं जो रोजाना पशुओं को चारा देने से लेकर उनका दूध निकालकर डेयरी पर सप्लाई करती हैं।

गीता चौधरी, रतन देवी, ममता देवी बताती हैं कि बचपन से उन्हें परिवारवालों ने पशुओं का रखरखाव करना सिखाया। यही वजह रही कि शादी के बाद भी उन्हें पशुपालन में दिक्कत नहीं आई। बल्कि इन महिलाओं ने पशुपालन को अपना रोजगार बना लिया। इस समिट में राजस्थान से आईं आठ में से किसी भी महिला के पास 10 से कम पशु नहीं हैं। इतना ही नहीं, ये महिलाएं खुद ही मोलभाव करती हैं।

कुल मिलाकर मतलब ये है कि आज ये महिलाएं पशुपालन कारोबार की वजह से आत्मनिर्भर बनी हैं। गीता देवी के अनुसार, वे रोजाना करीब 30 लीटर दूध डेयरी को सप्लाई करती हैं। अब वे इतनी सक्षम हो गई हैं कि गांव की दूसरी महिलाओं को भी पशुपालन के लिए प्रेरित कर रही हैं।

हरे चारे की समस्या, फिर भी दूध उत्पादन अच्छा
रतन देवी 35 पशु पालती हैं और रोजाना 130-135 लीटर दूध उत्पादन करती हैं। वे बताती हैं कि उत्तर प्रदेश के मुकाबले राजस्थान में कई समस्याएं हैं। सबसे पहली और बड़ी समस्या हरा चारा पैदा न होने की है। राजस्थान में एक साल बारिश तो दो साल सूखा रहता है। इस वजह से पशु हरे चारे की बजाय गेहूं और चावल के भूसे पर आधारित रहती हैं।

हरियाणा और मध्यप्रदेश की कुछ मिलें भूसे की सप्लाई राजस्थान में करती हैं। एक पशु के एक दिन के चारे पर राजस्थान का किसान औसतन 100 रुपए खर्च करता है। रतन देवी बताती हैं कि हरे चारे की उपलब्धता नहीं होने के बावजूद राजस्थान के पशु दूध अच्छा देते हैं। उसकी एक वजह ये है कि सांगवान, राठी, गिर प्रजाति जैसी गायों की संख्या वहां बहुत है। ये गाय दूध उत्पादन के लिए सर्वोत्तम मानी जाती हैं।

राजस्थान में प्रति किलो दूध पर पांच रुपए देती है सरकार
अजमेर की ममता देवी बताती हैं, हमारे राज्य में बंपर दूध उत्पादन के लिए एक स्कीम काफी कारगर है। वो ये है कि सरकार प्रति किलो दूध उत्पादन पर पांच रुपए अपनी तरफ से पशुपालकों को देती है। ममता रोजाना 45 लीटर दूध डेयरी को सप्लाई करती हैं तो 250 रुपए सरकार उनके खाते में भेजती है। हालांकि उत्तर प्रदेश में ऐसा नहीं है।

Source:-“दैनिक भास्कर”


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