मालाबार अभ्यास 2020 में दिखा भारत का दम, अब समुद्र में भी बेदम होगा ड्रैगन
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मालाबार अभ्यास 2020 में दिखा भारत का दम, अब समुद्र में भी बेदम होगा ड्रैगन

मालाबार युद्ध अभ्यास (Malabar exercise) का आज तीसरा दिन है. अरब सागर (Arab Sea) में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाएं साझा युद्ध अभ्यास कर रही हैं. अमेरिका के USS निमित्ज और भारत के INS विक्रमादित्य पर तैनात लड़ाकू विमानों के जरिए युद्ध जैसी स्थितियों में हो रहा ये सैन्य अभ्यास चीन (China) के लिए किसी कड़े संदेश से कम नहीं है.

1992 में हुई थी शुरुआत
मालाबार अभ्यास की शुरुआत वर्ष 1992 में भारत और अमेरिकी नौसेना के बीच बतौर द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में शुरू हुई थी. इसके ठीक 23 साल बाद वर्ष 2015 में, जापान (Japan) भी इसका स्थायी सदस्य बन गया था. अब ऑस्ट्रेलिया (Australia) भी इसमें शामिल हो चुका है. आइए बताते हैं कि क्या मायने हैं इस अभ्यास के और यह सैन्य अभ्यास भारत की समुद्री शक्ति को कितना मजबूत करेगा? 

शांति और समृद्धि के लिहाज से भारत-प्रशांत क्षेत्र के लिए यह अभ्यास कितना महत्वपूर्ण है?  ऑस्ट्रेलिया के इस अभ्यास में शामिल होने के बाद समुद्री सुरक्षा परिदृश्य कितना बदल जाएगा और मालाबार अभ्यास भारत के समुद्री सिद्धांतों को कितना संबल प्रदान करेगा? ऐसे कई सवालों का जवाब आइए आपको बताते हैं.

इसलिए महत्वपूर्ण है मालाबार अभ्यास
सेवानिवृत्त वाइस एडमिरल प्रदीप चौहान के मुताबिक मालाबार युद्धाभ्यास ने क्वाड (Quad) के चार देशों की नौसेना की शक्तियों में जबर्दस्त इजाफा किया है. अभ्यास के जरिए विभिन्न परिस्थितियों में एक सामूहिक प्रयास के तहत समुद्री क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए होने वाले इस आयोजन की प्रासंगिकता और महत्व हर साल बढ़ता जा रहा है. युद्धाभ्यास के जरिए चीन को स्पष्ट करने के लिए यह कड़ा संदेश दिया गया है कि इस महासागर और किसी भी महासमर में भारत अकेला नहीं है. इस अभ्यास के जरिए भारत ने साबित किया है कि नियमों की पालना करते हुए किसी भी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है. 

इसलिए खास है मालाबार अभ्यास 2020
मालाबार अभ्यास इस बार इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले यह आयोजन बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) में होता था और इस बार यह भारत-प्रशांत क्षेत्र के पूर्वोत्तर यानी अरब सागर में भी किया जा रहा है. मालाबार अभ्यास का पहला चरण बंगाल की खाड़ी में आयोजित किया गया था. दूसरी खासियत यह है कि इस बार हर देश ने युद्धाभ्यास में अपने बेहद अत्याधुनिक जहाज और सैन्य उपरकरण भेजे हैं. यहां पहुंचे समुद्री बेड़े में पनडुब्बी, विमान वाहक और विमान भी शामिल हैं. पूरे बेड़े में मौजूद सभी हथियारों और विमानों को एक साथ संचालित किया जा रहा है. इसलिए 2020  का यह अभ्यास और भी महत्वपूर्ण हो गया है और यकीनन इसके जरिए चीन को बहुत स्पष्ट संकेत और कड़ा संदेश दोनो एक साथ दिए गए हैं.

डिफेंस एक्सपर्ट की राय
रक्षा विशेषज्ञ आलोक बंसल के मुताबिक यहां युद्ध की स्थिति में कई देशों की नौसेनाओं के बीच सामंजस्य स्थापित करने की ट्रेनिंग भी दी जा रही है. यह अभ्यास एक-दूसरे के संचार मॉडल को समझने में भी मददगार है. रक्षा विशेषज्ञ आलोक बंसल बताते हैं कि यह चार लोकतांत्रिक देशों का संयुक्त समुद्री सैन्य युद्धाभ्यास है. 2007 में भी ऐसा हुआ था लेकिन बाद में ऑस्ट्रेलिया इससे अलग हो गया. 2015 तक सिर्फ भारत और अमेरिका के साथ ही मालाबार अभ्यास आयोजित हुया. 2015 में इस गठजोड़ में जापान शामिल हुआ और काफी विचार-विमर्श के बाद ऑस्ट्रेलिया भी क्वाड का प्रमुख हिस्सा बन गया.

इसलिए ज्यादा परेशान है चीन?
चीन में इस वक्त सबसे बड़ी चिंता का विषय ये है कि नौसेना की चार प्रमुख शक्तियां एक साथ आई हैं और हिंद महासागर क्षेत्र में एक साथ अभ्यास कर रही हैं. यानी एक साथ इस चतुष्कोणीय चक्रव्यूह से निपटना बीजिंग के लिए असंभव है. क्वाड ग्रुप की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया, जापान भारत और अमेरिका इसके महत्वपूर्ण सदस्य हैं, जो एक साथ काम कर रहे हैं.

















ZEE

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