चुनाव तारीखों के एलान से ठीक पहले ममता बनर्जी ने कामगारों के वेतन में बढ़ोतरी का किया एलान
पं.बंगाल

ममता की बड़ी घोषणा शरणार्थी कॉलोनियों को बिना शर्त दस्तावेज उपलब्ध कराएगी बंगाल सरकार

कोलकाता। बंगाल में कुछ माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने गुरुवार तो एक और बड़ा दांव खेला है। उन्होंने राज्य में बड़ी संख्या में रहने वाले मतुआ शरणार्थियों को रिझाने के लिए राज्य की सभी शरणार्थी कॉलोनियों को नियमित करने एवं इसमें रहने वाले सभी परिवारों को बिना शर्त जमीन के आधिकारिक दस्तावेज (पट्टे) उपलब्ध कराने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शरणार्थी कॉलोनियों में रहने वाले जिन परिवारों को अभी तक पट्टा नहीं मिला है, उन सभी को पट्टा दिया जाएगा।‌ ममता ने कहा कि जो शरणार्थी कॉलोनी अभी तक नियमित नहीं हुआ है उन सभी को नियमित किया जाएगा। इसी कड़ी में राज्य सरकार ने गुरुवार को 31 और कॉलोनियों को मंजूरी दे दी है।

परिणामस्वरूप, 3,750 और शरणार्थी परिवारों को पट्टे मिलने वाले हैं। गुरुवार को राज्य सचिवालय नवान्न में कैबिनेट की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ममता ने यह भी चेतावनी दी कि वह केंद्र सरकार के संगठनों के स्वामित्व वाली जमीन से किसी भी शरणार्थी को बलपूर्वक हटाने नहीं देंगी। दरअसल ममता का यह बयान उन खबरों के बीच आया है जिनमें कहा गया है कि ऐसे विभिन्न स्थानों को खाली करने के नोटिस जारी कर दिए गए हैं। ममता ने साफ कहा कि उनकी सरकार ऐसे सभी शरणार्थियों को पट्टे (भूमि दस्तावेज) देगी। ममता ने कहा, हमें जानकारी मिली है कि बांकुड़ा और हावड़ा में कुछ स्थानों पर केंद्र सरकार के संगठनों ने बेदखली नोटिस लगाए हैं। लेकिन हमारी सरकार ऐसा नहीं होने देगी। हम उन्हें (शरणार्थियों को) योग्यता के आधार पर दलील (आधिकारिक दस्तावेज) देंगे। ममता ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने बीते दो साल में राज्य में 213 शरणार्थी कॉलोनियों को नियमित किया है और 2,79,000 पट्टे जारी किए हैं। ममता ने कहा कि राज्य सरकार कोलकाता के बेहला, जादवपुर और ढाकुरिया सहित राज्य के सभी हिस्सों में एक सर्वेक्षण कर रही है। उस सर्वेक्षण के आधार पर भूमि के पट्टे प्रदान किए जायेंगे।

ममता ने दावा किया कि कोई भी शरणार्थी अपने अधिकार से वंचित नहीं होगा। कोई कॉलोनी नहीं छोड़ी जाएगी। इधर, ममता की घोषणा के बाद यह सवाल उठता है कि राज्य उन कॉलोनियों में जमीन का दस्तावेज कैसे देगा, जहां केंद्र सरकार की जमीन है? जमीन को पहले राज्य सरकार के हाथों में आना होगा। तब राज्य भूमि का पट्टा देने में सक्षम होगा। ऐसे में इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य के बीच एक बार फिर टकराव की संभावना है। गौरतलब है कि मतुआ संप्रदाय का बंगाल में 50 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर प्रभाव है। राज्य के खासकर उत्तर 24 परगना, नदिया व दक्षिण 24 परगना जिले में इनकी गहरी पैठ है।

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