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नई समस्या-कोरोना से जुलाई में ठीक हुए 25 से ज्यादा लोगों को टीबी की शिकायत, पोस्ट कोविड में पहली बार सामने आए मामले

ByPrompt Times

Sep 18, 2021

18-सितम्बर-2021 | प्रदेश में मई-जून में जिन लोगों को कोरोना हुआ था, उनमें से अब तक 25 लोगों में टीबी की बीमारी निकल गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक टीबी के मरीजों में कोरोना का खतरा ज्यादा रहता है क्योंकि ऐसे मरीजों के फेफड़े पहले से संक्रमित रहते हैं। लेकिन ऐसे केस पहली बार आए हैं, जिनमें संबंधित व्यक्ति को टीबी नहीं था, उसे कोरोना हुआ और ठीक होने के बाद वह टीबी से ग्रसित हो गया।इस प्रवृत्ति से विशेषज्ञों में हैरानी भी है और मेडिकल कॉलेज के श्वसन रोग (रेस्पिरेटरी) विभाग ने कुछ छात्रों को कोरोना के बाद टीबी पर पीजी स्टूडेंट को रिसर्च करने के लिए टॉपिक भी दे दिया है।कोरोना से स्वस्थ होने के बाद जिन मरीजों को टीबी हुआ है, वे अप्रैल-मई में कोरोना से संक्रमित हुए थे। ज्यादातर केस गंभीर संक्रमण वाले थे, लेकिन मरीज जुलाई तक ठीक हो गए थे। इनमें से ज्यादा मरीज दो-तीन हफ्ते तक लगातार खांसी के बाद अंबेडकर अस्पताल की पोस्ट कोविड ओपीडी में पहुंचे। जांच में उन्हें टीबी निकला और डाक्टरों ने हिस्ट्री ली, तब पता चला कि लगभग सभी कोरोना से गंभीर रूप से संक्रमित होकर ठीक हुए थे। इनके एक्सरे में भी छाती में संक्रमण की पुष्टि भी हुई और इलाज शुरू किया गया है। ऐसे मरीजों के फेफड़े अब भी 30 प्रतिशत तक संक्रमित हैं। हालांकि डाक्टरों का दावा किया कि नियमित दवा लेने से सभी स्वस्थ हो जाएंगे। इनमें से कुछ मरीज राजधानी तथा कुछ अन्य शहरों के भी हैं।

बैक्टीरिया दबे रहे होंगे कोरोना के बाद बाहर आए
सीनियर गैस्ट्रो सर्जन डॉ देवेंद्र नायक व न्यूरो सर्जन डॉ राजीव साहू का कहना है कि कोरोना के पहले लोगों के शरीर में जो टीबी के बैक्टीरिया से दब गए होंगे। कोरोना होने के बाद ये बाहर आए हांेगे। कई बार इम्युनिटी पॉवर बेहतर रहने से लोगों में टीबी के बैक्टीरिया दब जाते हैं।

बाल झड़ने से लेकर ब्रेन स्ट्रोक व पैरालिसिस भी
पोस्ट कोविड बीमारियों में बाल झड़ने से लेकर जोड़ों में दर्द, थकान, आंखों लालिमापन, मानसिक तनाव, डायबिटीज, ब्रेन स्ट्राेक, कार्डियक समस्या मुख्य रूप से सामने आई है। प्रदेश में कोरोना से स्वस्थ हुए मरीजों के लिए सबसे पहले अंबेडकर अस्पताल में पोस्ट कोविड ओपीडी शुरू की गई। इसके बाद सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों व जिला अस्पतालों में यह ओपीडी चल रही है। हालांकि लगातार केस कम आने के बाद पोस्ट कोविड ओपीडी में मरीजों की संख्या घटी है। बावजूद कोरोना से स्वस्थ हुए लोगों की समस्या कम नहीं हुई है।

दो हफ्ते से ज्यादा खांसी तो बलगम जांच करवाएं
मेडिकल कॉलेज के सीनियर कार्डियक सर्जन डॉ कृष्णकांत साहू और कैंसर सर्जन डॉ यूसुफ मेमन के अनुसार दो हफ्ते से ज्यादा खांसी हो तो बलगम जांच करवा लें, क्योंकि टीबी की पुष्टि होती है। कोरोना के बाद कई खांसी से पीड़ित हैं, हालांकि अधिकांस में टीबी नहीं निकला है।

एक्सपर्ट व्यू; ऐसे केस पहली बार, थीसिस जरूरी
कोरोना के बाद टीबी होने के केस पहली बार आए हैं, इसीलिए थीसिस करवा रहे हैं। दो हफ्ते से ज्यादा तक लगातार खांसी आए तो बलगम जांच जरूर करवाएं। इससे टीबी है या नहीं, इसका पता चलेगा।

Source:- “दैनिक भास्कर”

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