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कभी कर्ज की वजह से पूरी जमीन बेचनी पड़ी थी, 80 रुपए महीने में गाय चराई; आज घी से कमा रहे सालाना 3 करोड़ रुपए

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11 अप्रैल 2022 | खाने-पीने से लेकर सेहत और पूजा-पाठ, हर जगह गाय का घी स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक होता है और अगर ये घी कारोबार का हिस्सा बन जाए और सालाना करोड़ों की कमाई हो तो कैसा लगेगा? ऐसा गुजरात के राजकोट के रहने वाले रमेशभाई रुपारेलिया कर रहे हैं। वे श्रीगीर गौ कृषि जतन संस्था के नाम से अपनी गौशाला चलाते हैं और गिर गाय के दूध से बना घी बेचकर सालाना 3 करोड़ से अधिक की कमाई कर रहे हैं। रमेशभाई की संस्था में 100 से ज्यादा लोग काम करते हैं और वे इस वक्त 150 से ज्यादा गायों को पाल रहे हैं।

ऐसे में आज की पॉजिटिव खबर में गाय के घी से सालाना करोड़ों की कमाई करने वाले रमेशभाई के बारे में जानते हैं। जानते हैं कि उन्होंने इस कारोबार को कैसे शुरू किया? आज उनका बिजनेस किस तरह से चल रहा है? और आप भी यदि इस तरह का कारोबार शुरू करना चाहते हैं तो इसे कैसे कर सकते हैं?

80 रुपए महीने में चराते थे गाय
43 साल के रमेशभाई कहते हैं कि उनके परिवार में सभी अनपढ़ हैं। साल 2002-04 में घर की ऐसी हालत हो गई थी कि उन्हें अपनी पूरी 10 एकड़ जमीन बेचनी पड़ी थी। फिर उन्होंने गाय चराना शुरू कर दिया। इसके बदले उन्हें हर महीने 80 रुपए मिलते थे। घर चलाना मुश्किल हो गया था। इसके बाद वे 2010-11 में अपने परिवार के साथ गांव से शहर मजदूरी करने के लिए आ गए। यहां एक जैन परिवार रहता था जिसकी 10 एकड़ परती जमीन थी, जिसमें कोई फसल नहीं होती थी। रमेशभाई ने पहले 2 गाय और 2 बैल पाले। उन्होंने परती जमीन में प्याज की खेती की। गोबर और गौमूत्र से बनी खाद को खेत में डाला और इससे 35 लाख की कमाई की। यहीं से रमेशभाई की गाड़ी चल पड़ी। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे गाय बढ़ानी शुरू कर दीं और दूध, दही, घी का कारोबर शुरू कर दिया। इससे बने प्रोडक्ट्स बेचने शुरू कर दिए।

4 एकड़ जमीन में फैली है गौशाला
रमेशभाई कहते हैं कि अभी हमारी गौशाला 4 एकड़ जमीन में फैली हुई है। हम अभी और शेड बनवा रहे हैं, ताकि जो गायें दूध दे रही हैं, जो दूध नहीं दे रही हैं, जो छोटे बच्चे हैं, जो गायें बूढी हो चुकी हैं, जिन गायों का इलाज चल रहा है… सभी को अलग-अलग रखा जा सके। इससे इन्हें खिलाने-पिलाने में आसानी होती है और हम सभी का बराबर ध्यान रख सकते हैं। इस गौशाला की खासियत है कि रमेशभाई गिर गाय को पालते हैं। इनके प्रोडक्ट्स काफी महंगे बिकते हैं और यह सेहत के लिए लाभदायक होता है। इन गायों की कद काठी भी बिल्कुल अलग होती है।

रमेशभाई कहते हैं कि प्याज की खेती से जो आमदनी हुई थी, उसी से हमने ये जमीन खरीदी। पहले यह बंजर जमीन थी, लेकिन खेत के पीछे नदी है, जिससे हमें फायदा हुआ। राज्य में उस वक्त नरेंद्र मोदी की सरकार थी। हमें गौ पालन के लिए 10 लाख की सहायता राशि भी दी गई थी।

गिर गाय की पहचान
रमेशभाई कहते हैं कि इस गाय को जब आप देखेंगे तो यह सबसे अलग तरह की दिखाई देती है। इसके सिर उलटे मटके की तरह होते हैं और कान नीचे की ओर पान के पत्ते के आकार में लटके होते हैं। आंख भीतर की ओर होती है। मुंह ज्यादा लंबा नहीं होता है। पीठ चौड़ी होती है।

रमेशभाई अपनी गौशाला में गिर गायों को पालते हैं। गिर गाय का दूध, घी काफी महंगा मिलता है।

रमेशभाई अपनी गौशाला में गिर गायों को पालते हैं। गिर गाय का दूध, घी काफी महंगा मिलता है।

जिस गाय को लोग छोड़ देते थे उसे रमेशभाई ले आए
जब कोई गाय शारिरिक रुप से कमजोर हो जाती है, बच्चा नहीं देती है, दूध देना बंद कर देती है तो लोग इसे सड़कों पर छोड़ देते हैं। ऐसी गायें किसी काम की नहीं होती हैं, लेकिन, रमेशभाई इस तरह की 30 गायें अपनी गौशाला लाए और उनका उचित इलाज कर पाला और इसी से आज इनकी गौशाला में 150 से अधिक गायें हैं।

हर महीने 40 लाख तक की कमाई
रमेशभाई कहते हैं कि इन गायों के दूध से बना घी 3,500 सौ रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिकता है। 123 देशों में एक्सपोर्ट करता हूं। देश के अलावा सबसे ज्यादा विदेशों में US, UK, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और साऊदी अरब में इनके प्रोडक्ट्स की डिमांड है। वे कहते हैं कि महीने का 40 लाख तक का कारोबार है और ये लगातार बढ़ रहा है। जब रमेशभाई ने इसे शुरू किया था उस वक्त वे महज 5 से 6 हजार रुपए ही कमा पाते थे।

रमेशभाई गिर घी को 3,500 रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचते हैं। 123 देशों में एक्सपोर्ट करते हैं।

रमेशभाई गिर घी को 3,500 रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचते हैं। 123 देशों में एक्सपोर्ट करते हैं।

रमेशभाई कहते हैं कि सिर्फ 7वीं तक की पढ़ाई की है, लेकिन आज विदेशों से लोग मेरे यहां ट्रेनिंग लेेने के लिए आते हैं। उनका दावा है कि जो गिर घी वो बनाते हैं वह सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। कई बीमारियों के इलाज में यह कारगर साबित होता है। इसे वैदिक और आयुर्वेदिक रूप से तैयार किया जाता है। इसके अलग-अलग नाम होते हैं। 32 लीटर दूध के मक्खन से एक किलोग्राम घी तैयार किया जाता है।

सभी प्रोडक्ट्स की ऑनलाइन डिमांड
रमेशभाई कहते हैं कि वे संस्थान के नाम से एक वेबसाइट चलाते हैं। इसी पर अपने प्रोडक्ट्स की सभी जानकारियां उपलब्ध होती हैं और खरीदने वाले ऑनलाइन बुकिंग करते हैं। इनके द्वारा इसकी पैकिंग कर पार्सल किया जाता है।
रमेशभाई कहते हैं कि वे सबसे ज्यादा घी का बिजनेस करते हैं, लेकिन इसके साथ ही खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाले मसालों से लेकर सेहत के लिए लाभकारी प्रोडक्ट्स भी तैयार करते हैं। यहां तक कि वे साबुन, नाक में रखने वाला ड्रॉप, शहद, च्यवनप्राश जैसी चीजें भी बेचते हैं।

रमेशभाई कई तरह के प्रोडक्ट्स बनाते हैं और इसे अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेचते हैं। गिर घी के सेवन से कई तरह के स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।

रमेशभाई कई तरह के प्रोडक्ट्स बनाते हैं और इसे अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेचते हैं। गिर घी के सेवन से कई तरह के स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।

गिर घी खाने के फायदे
गिर घी के इस्तेमाल से बच्चों की हड्डियों में मजबूती आती है। यह इम्यूनिटी बढ़ाता है और यादाश्त के लिए फायदेमंद होता है। मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए भी इस घी का सेवन किया जा सकता है। जिन्हें डायबिटीज, दिल की बीमारी है वे डॉक्टर की सलाह से इसका सेवन कर सकते हैं। उम्रदराज लोग घी के सेवन से हड्डी में दर्द और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों से राहत पा सकते है। गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह काफी फायदेमंद होता है।

यदि आप भी गौपालन कर अपना कारोबार करना चाहते हैं तो…
रमेशभाई का कहना है कि सबसे पहले हमें इसकी पूरी मार्केटिंग के बारे में जानकारी होनी चाहिए। बहुत लोग इधर-उधर से वीडियो देख शुरू कर लेते हैं और बाद में उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। यदि जानकारी न हो तो हमें अपना काम शुरू करने से पहले वैसे लोगों से जानकारी लेनी चाहिए, जो ये कारोबार कर रहे हैं। इस तरह के बिजनेस के लिए सरकार भी मदद कर रही है तो इसका फायदा उठाया जा सकता है। जहां पर गाय का पालें, उन जगहों की साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए ताकि गायें बीमार न पड़ें।

रमेशभाई ने सिर्फ 7वीं तक की पढ़ाई की है, लेकिन आज विदेशों से लोग उनसे ट्रेनिंग लेने के लिए आते हैं।

रमेशभाई ने सिर्फ 7वीं तक की पढ़ाई की है, लेकिन आज विदेशों से लोग उनसे ट्रेनिंग लेने के लिए आते हैं।

वे अपना ट्रेनिंग सेंटर भी चलाते हैं और युवाओं को इसकी पूरी जानकारी देते हैं। रमेशभाई कहते हैं कि हमारे स्टूडेंट्स अलग-अलग धर्मों से आते हैं। इससे कोई भी मेहनती व्यक्ति अपना बेहतर कारोबार कर सकता है।

गायों को रहने के लिए ऊपर से शेड के साथ छोटे-छोटे घर बनाएं ताकि चारों तरफ से वो हवादार हो। जमीन चिकनी और हलकी ढलाव वाली होनी चाहिए ताकि इसे साफ-सुथरा रखा जा सके। गायों की प्रजनन प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी होनी जरूरी है।

Source :- “दैनिक भास्कर”


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