• September 29, 2022 10:33 pm

बांसुरी बनाने को डोलू बांस उगाने की तैयारी

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Apr 6, 2021
बांसुरी बनाने को डोलू बांस उगाने की तैयारी
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पीलीभीत,जेएनएन : शासन की एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल बांसुरी कुटीर उद्योग की सबसे बड़ी समस्या असोम से डोलू प्रजाति का बांस बनाने में खर्च काफी ज्यादा आने की रही है। ऐसे में अब जिले में ही अधिक नमी वाली जमीन पर इस बांस की खेती कराने की योजना बनाई गई है, जिससे बांसुरी बनाने में उद्यमियों की लागत कम हो सके और मुनाफा बढ़ सके। कारीगरों को जरूरत पर तत्काल बैंक ऋण तथा उत्पाद की बिक्री के लिए भी जिला प्रशासन और उद्योग विभाग सहयोग करेगा।

तराई के इस शहर में बांसुरी उद्योग तकरीबन सवा सौ साल पुराना है। पहले यहां 70 से अधिक बांसुरी कारोबारी हुआ करते थे, इनके अलावा सैकड़ों की संख्या में कारीगर अपने अपने घरों पर बांसुरी बनाने का काम करते थे। काफी पहले बांसुरी बनाने वाला डोलू बांस असोम के सिल्चर से सीधे ट्रेन के माध्यम से यहां मंगा लिया जाता था। जिस पर ज्यादा किराया भी खर्च नहीं होता था। बाद में मीटर गेज ट्रेनें असोम के लिए जाना बंद हो गईं। क्योंकि वहां सभी लाइनें ब्राडगेज की हो चुकी थीं। ऐसे में कारीगरों को सड़क मार्ग से बांस मंगाना पड़ा। उसमें भाड़ा काफी अधिक लगने लगा। ऐसे में बांसुरी की लागत काफी बढ़ गई। मुनाफा घटता गया। तब यह कुटीर उद्योग दम तोड़ने लगा। सरकार ने बांसुरी को एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल कर रखा है। ओडीओपी में शामिल हुए दो साल हो गए लेकिन बांसुरी उद्योग में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई। जिलाधिकारी पुलकित खरे बांसुरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत तौर पर काफी रुचि ले रहे हैं। असोम चौराहा को बांसुरी चौराहा बनाया गया। डीएम ने बांसुरी कारीगरों के पास स्वयं जाकर उनकी समस्याएं जानी। तब यही बात सामने निकलकर आई कि बांसुरी बनाने में इस्तेमाल होने वाला डोलू बांस असोम से मंगाना बहुत महंगा पड़ता है। इस पर डीएम ने उस प्रजाति के बांस को यहां उगाने की संभावनाओं पर सामाजिक वानिकी विभाग को निर्देशित किया। डोलू बांस को यहां उगाने की तैयारी शुरू कर दी गई।

इनसेट

जिलाधिकारी के निर्देश पर जिले में डोलू प्रजाति के बांस का वृहद स्तर पर पौधरोपण करने की योजना बनी है। यह पौधरोपण दस हेक्टेयर क्षेत्रफल में होगा। त्रिपुरा के एक नर्सरी संचालक के माध्यम से डोलू बांस की पौध मंगाई जाएगी। नर्सरी संचालक से बात हो गई है। पौधरोपण के लिए भूमि की तलाश की जा रही है।

संजीव कुमार, डीएफओ सामाजिक वानिकी


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