11 मई 2023-बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उन्होंने ब्रिटेन की दिवंगत महारानी एलिजाबेथ की भी पोल खोल दी थी। जब हम लंदन गए, तो महारानी तक चर्चा पहुंची कि एक लड़का है, जो मिरेकल (चमत्कार) दिखाता है। उन्होंने हमें बुलवाया। एक कमरे में बैठे और ट्रांसलेटर के माध्यम से बातचीत शुरू हुई। हमने उनके राज खोलने शुरू किए। कमरा नंबर-होटलों की बातें बताईं। इसके बाद महारानी बोलीं कि यह तो बहुत शक्तिशाली है। इस पर हमने कहा कि हम नहीं, भगवान हनुमान जी शक्तिशाली हैं।
बता दें कि नीरज निगम मित्र मंडल द्वारा शहर के दशहरा मैदान में 5 दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन किया गया। प्रसिद्ध कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी महाराज के मुखारबिंद से कथा सुनाई गई। इसके अलावा लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का आयोजन भी किया गया। वहीं हर दिन शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें अलग-अलग लोगों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। हेमा मालिनी की नृत्य नाटिका की प्रस्तुति, लखबीर सिंह लक्खा की एक शाम खाटू के नाम, अनूप जलोटा की भजन संध्या का आयोजन हुआ। अंतिम दिन बुधवार को यज्ञ में पूर्णाहुति के साथ यज्ञ का समापन हुआ।
बोले- क्वीन की खोल दी थी पोल
दरबार से दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि जो अंग्रेज हाऊ डू यू डू करते थे वह भी सीता राम कर रहे हैं। जब हम पहली बार लंदन गए, तो पहले दिन तो किसी ने हमें पहचाना ही नहीं। पहले दिन हम बड़े शौक-शौक में तैयार हुए, चंदन लगाया कि हम बाहर निकलेंगे, लोग हमें देखेंगे। हम बाहर निकले, किसी ने हमारी तरफ नहीं देखा। एक डेढ़ घंटे रोड पर घूमते रहे। हमने कहा कि इससे अच्छा तो भारत है, इतनी देर में तो 20 हजार लोग आ जाते। लेकिन, हमने कहा रुक जाओ।
दूसरे दिन जब हमने दरबार लगाया और 8-10 के पर्चे बनाए। उधर की महारानी एलिजाबेथ के पास चर्चा पहुंची कि एक भारतीय लड़का आया है, वो बड़ा मिरेकल (चमत्कार) जानता है। वो हमारे पास आये। हमने कहा- इन्हें कमरे में लाओ। ट्रांसलेटर को भी बुलाया। हमने दस-बीस जो राज खोले, दो-तीन कमरा नंबर, होटलों के नाम दिए, वो हाथ जोड़कर बोलने लगे- ये व्यक्ति बहुत शक्तिशाली है। तब हमने कहा कि मैं शक्तिशाली नहीं हूं, भगवान हनुमान सबसे शक्तिशाली हैं। उसके बाद तो सब अंग्रेज पहचानने लगे।
सिंधिया भी अंतिम दिन हुए शामिल
बुधवार को लगे दिव्य दरबार में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल हुए। उन्होंने पंडित शास्त्री से मुलाकात की। दोनों के बीच चर्चा भी हुई।नागरिकों को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि संभाग और गुना के लिए आज का दिन ऐतिहासिक दिन है। पूरी टीम को इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के लिए बधाई। इस ऐतिहासिक मैदान में सभी कीर्तिमानों को तोड़कर महाराज के दर्शन के लिए गांव-गांव से लोग आए हैं। आज भारत विश्व पटल पर उजागर हो रहा है। एक नई शक्ति के रूप में भारत उभर रहा है। आर्थिक शक्ति के साथ-साथ आध्यात्मिक शक्ति के रूप में भी भारत उजागर हो रहा है। सिंधिया के साथ प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, पंचायत मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया, राज्यमंत्री सुरेश राठखेड़ा सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए।
पंडाल पड़ा छोटा
धीरेंद्र शास्त्री के दिव्य दरबार के लिए मंगलवार से ही लोगों का पहुँचना शुरू हो गया था। बुधवार सुबह ही कथा के लिए लगाया गया पंडाल भर गया था। दोपहर को जीतने भी लोग आए, उन्हें बाहर धूप में ही खड़ा होना पड़ा। हालांकि, इतनी तेज धूप होने के बाद भी हजारों की संख्या में नागरिक दिव्य दरबार में शामिल होने के किये पहुंचे। लोगों को असुविधा जरूर हुई, लेकिन वह पूरे समय तक कार्यक्रम स्थल पर डटे रहे। लोगों में फायर ब्रिगेड के ऊपर, पानी के टैंकरों पर और जिसे जहां जगह मिली, उसने वहां बैठकर कथा सुनी। दरबार में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं की संख्या रही।
अलसुबह पहुंचे गुना
पंडित धीरेंद्र शास्त्री भोपाल एयरपोर्ट पर रात 1:30 बजे फ्लाइट से उतरने के बाद गुना के लिए रवाना हुए। उन्हें लेने के लिए गुना से आयोजनकर्ता भी पहुंचे थे। भोपाल से गुना आते समय राघोगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह में रास्ते मे उनका स्वागत किया। इसके बाद पं. शास्त्री सड़क मार्ग से रवाना होकर बुधवार तड़के सुबह 5:30 बजे गुना पहुंचे। जहां वे सीधे कुशमौदा क्षेत्र में नव निर्मित डॉ. जितेन्द्र रघुवंशी के निवास पर पहुंचे और विश्राम किया। इसके पूर्व यहां पहुंचने पर डॉ. रघुवंशी ने पं. शास्त्री की आरती उतारकर और शॉल उड़ाकर उनका स्वागत किया। इसके बाद वे बंद कमरे में विश्राम करने चले गए। वह दोपहर में लगभग 1 बजे बाहर आए। इस दौरान हर कोई उनकी एक झलक पाने के लिए बेताब रहा।
पहुंचने वाले स्थानों पर काफी भीड़
भाड़पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के गुना में विभिन्न स्थानोंपर पहुंचने का कार्यक्रम सामने आने के बाद हरेकने इन पर पहुंचकर किसी भी तरह एक झलक पानेका प्रयास किया है। हालात यह रहे कि पं. शास्त्रीके विश्राम स्थल वाले घर में ही दो-तीन सौ लोग तोघर परिवार और रिश्तेदारों के रूप में देर रात में हीएकत्रित हो गए थे। इसके अलावा घर के बाहर भीतड़के सुबह से ही लोगों की भीड़ बनी रही। लगभग 3 हजार लोग उनके घर के बाहर दोपहर तक खड़े रहे। रास्ते मे गौशाला के सामने भी सैकड़ों नागरिक उनकी झलक पाने के लिए खड़े रहे।
सोर्स :- “दैनिक भास्कर”
