ईमानदारी की भेंट चढ़े राजनांदगांव एसपी जितेंद्र शुक्ला

राजनांदगांव के एसपी जितेंद्र शुक्ला जोकि अपनी कर्तव्य निष्ठा ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं उनके साथ लगातार ऐसा व्यवहार किया जा रहा है जैसे कि सरकार ईमानदार अधिकारियों को फील्ड में रखना ही नहीं चाहती पिछले 1 साल में उनका दो बार ट्रांसफर हो चुका है इससे पहले भी सुकमा से उनका ट्रांसफर सिर्फ इसलिए कर दिया गया था कि उन्होंने अपनी कर्तव्य प्रणिता को प्राथमिकता दी और एक मंत्री की बात को नहीं मानी अगर ऐसे ही ईमानदार अधिकारियों को लगातार स्थानांतरित कर प्रताड़ित किया जाएगा तो आने वाले समय में अधिकारियों से आप कैसे अच्छे कार्य की उम्मीद कर सकते हैं जो अधिकारी कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार होते हैं उनके अपने उसूल होते हैं और वह अपने हिसाब से काम करते हैं परंतु ऐसे अधिकारियों के साथ लगातार हो रहे स्थानांतरण से आने वाली पीढ़ी के अधिकारी शायद ही ईमानदारी दिखाने की हिम्मत जुटा सके एसपी राजनंदगांव जितेंद्र शुक्ला ने बस्तर में रहते हुए भी नक्सल अभियानों में जवानों के अंदर एक नई अलख जगाई थी और उनके कार्यकाल में नक्सलियों में एक दहशत का माहौल हुआ करता था उन्होंने अबूझमाड़ को विश्व स्तर तक पहुंचाया इसके अलावा भी बहुत से रचनात्मक कार्यों के द्वारा उन्होंने कम्युनिटी पुलिसिंग को भी बढ़ावा दिया परंतु वह हमेशा ही गंदी राजनीति के शिकार होते रहे हैं अगर ऐसे ही अच्छे और सच्चे अधिकारियों का दमन शासन के द्वारा किया जाएगा तो फिर आने वाले समय में अधिकारी सिर्फ एक कठपुतली की तरह ही रह जाएंगे इसलिए शासन को ईमानदार अधिकारियों की हौसला अफजाई करना चाहिए ना कि हर 6 माह में ट्रांसफर कर उनकी मानसिकता को बदलने की कोशिश करनी चाहिए.

मनमोहन पात्रे

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