• June 10, 2026 3:43 am

शिक्षा के प्रति गंभीरता

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31 अगस्त 2022 | राज्य के स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए 500 करोड़ रुपये की स्वीकृति देकर सरकार ने शिक्षा के प्रति गंभीरता का प्रदर्शन किया है। इसकी अत्यंत आवश्यकता थी क्योंकि कई जर्जर स्कूल भवनों में छात्र खतरे की आशंका के बीच ज्ञान अर्जित करने को मजबूर हैं।

दरअसल, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भेंट-मुलाकात कार्यक्रम में ग्रामीण क्षेत्रों से जर्जर स्कूल भवनों की शिकायतें आई थीं। कहीं वर्षा का पानी स्कूल की कक्षाओं में भर जाता है तो कहीं छत का प्लास्टर टूटकर गिरने की शिकायत है। इन सबके बावजूद पालक अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि शिक्षा से ही भविष्य बदलेगा। नक्सल क्षेत्रों में तो पालक इतने जागरूक हैं कि शिक्षा के लिए नक्सलियों से भी लोहा लेने को तैयार हैं।

ऐसे क्षेत्रों में बंद स्कूलों को दोबारा शुरू कराने के लिए ग्रामीणों ने खुद ही लकड़ी, बांस व घासफूस की झोपड़ी तैयार कर दी है। एक बात तो साफ है कि पालक अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर चिंतित हैं। ऐसे में पुराने और जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत का निर्णय मील का पत्थर बन सकता है। स्कूली शिक्षा के प्रति सरकार की गंभीरता का अंदाजा तो इसी से लगाया जा सकता है कि यहां पहली बार अंग्रेजी माध्यम के सरकारी स्कूल खोले गए।

स्वामी आत्मानंद के नाम से शुरू किए गए इन अंग्रेजी स्कूलों की इतनी मांग है कि इस वर्ष 279 और अगले वर्ष 422 और स्कूल खोलने की योजना बनानी पड़ी है। स्कूलों में शिक्षण का स्तर उत्कृष्ट बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। स्वामी आत्मानंद के नाम से ही 32 हिंदी माध्यम के स्कूलों को भी संचालित किया जा रहा है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के बंद पड़े 294 स्कूलों को दोबारा खोला गया है। स्कूल भवनों, खेल मैदानों, लाइब्रेरी, पुस्तकालय आदि का विकास तो किया जा रहा है परंतु प्रश्न यह है कि सरकारी स्कूलों में अध्यापन का स्तर क्या उस मापदंड तक पहुंच पाएगा, जहां पहुंचाने की सोच सरकार की है।

हिंदी पट्टी के इस राज्य में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के लिए योग्य शिक्षकों की तलाश का काम भी आसान नहीं है। सरकार ने 10 हजार शिक्षकों की भर्ती की योजना बनाई है तो हो सकता है कि भविष्य में अध्यापन के स्तर में व्यापक सुधार परिलक्षित होने लगे। वैसे स्कूली शिक्षा से परे उच्च शिक्षा की चर्चा भी यहां करना अनिवार्य है। राज्य के सरकारी महाविद्यालयों में प्राध्यापकों के आधे से ज्यादा यानी 5,028 में से 2,635 पद रिक्त हैं। राज्य के नौ शासकीय विश्वविद्यालयों में प्राध्यापकों के 697 पदों में से 425 रिक्त हैं।

इधर अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोलने के बाद सरकार अगले सत्र से अंग्रेजी माध्यम के स्वामी आत्मानंद महाविद्यालयों को भी खोलने की तैयारी कर रही है। यह भी ध्यान रखना होगा कि इससे पूर्व वर्तमान में संचालित महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों में प्राध्यापकों की नियुक्ति अवश्य की जाए क्योंकि इसके बिना उच्च शिक्षा की दशा में सुधार संभव नहीं है। आशा की जानी चाहिए कि आने वाले समय में राज्य शिक्षा के केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाएगा।

सोर्स :-“नईदुनिया”        


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