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लव-जिहाद कानून पर गुजरात सरकार को झटका

ByPrompt Times

Aug 26, 2021
लव-जिहाद कानून पर गुजरात सरकार को झटका
  • हाईकोर्ट ने लव-जिहाद एक्ट-5 पर से रोक हटाने की राज्य सरकार की मांग वाली याचिका खारिज की

26 अगस्त 2021 | गुजरात हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते राज्य के लव जिहाद एक्ट की महत्वपूर्ण धाराओं (3,4,5 और 6) पर रोक लगा दी थी। इसी स्टे को हटाने के लिए आज फिर गुजरात हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें हाईकोर्ट ने धारा 5 पर लगी रोक को हटाने के लिए सरकारी वकील द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है। महाधिवक्ता ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें कहा गया था कि नियमानुसार धर्मांतरण के लिए कलेक्टर की अनुमति की आवश्यकता है। सरकार की इस मांग का याचिकाकर्ता ने विरोध किया था।

बता दें, हाईकोर्ट ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर पिछले हफ्ते फैसला सुनाया था। जमीयत ने इस कानून पर रोक लगाने की मांग की थी। याचिका पर फैसला देते हुए हाईकोर्ट ने इस कानून की धारा- 3,4,5 और 6 के संशोधनों को लागू करने पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने कहा, पुलिस में FIR तब तक दर्ज नहीं हो सकती जब तक ये साबित नहीं हो जाता कि शादी जोर-जबरदस्ती से और लालच देकर की गई है।

कोर्ट रूम में अनुच्छेद 5 पर क्या चर्चा हुई?
उच्च न्यायालय: 
हमें 19 अगस्त को पारित आदेश को बदलने का कोई कारण नहीं दिखता है।
याचिकाकर्ता अधिवक्ता मिहिर जोशी: यदि अधिनियम की धारा 5 को स्थगन आदेश में शामिल नहीं किया जाता है, तो संपूर्ण न्यायालय आदेश लागू नहीं होगा और न्यायालय का आदेश अनुपयोगी हो जाएगा।
महाधिवक्ता: धारा (5) के अनुसार विवाह से किसी का कोई लेना-देना नहीं है, तो कोर्ट इसे क्यों रोके? दलील के समय धारा 5 पर बात नहीं हुई थी। इसके चलते यह धारा मेरे दिमाग में भी नहीं थी।
महाधिवक्ता: मान लीजिए कि कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन करना चाहता है और उस पर कोई दबाव नहीं, कोई लालच नहीं तो उसे जिला कलेक्टर से अनुमति लेने की क्या जरूरत है।

मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने अधिनियम की धारा 3,4, 4ए से 4सी, 5, 6 और 6ए पर रोक लगा दी। राज्य के गृह मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश का अध्ययन करने के बाद निर्णय लिया जाएगा। पिछले महीने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की गुजरात शाखा ने हाईकोर्ट में एक अर्जी दाखिल कर कहा था कि राज्य सरकार के नए कानून के कुछ प्रावधान असंवैधानिक हैं।

निषेध आदेश सभी धर्मों के लिए फायदेमंद : जमीयत
जमीयत उलमा गुजरात के सचिव असलम कुरैशी ने कहा, ‘जब गुजरात सरकार ने धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम में अन्यायपूर्ण तरीके से संशोधन किया, तो हमने एक साथ सोचा कि यह संशोधन न केवल एक धर्म के लिए बल्कि सभी धर्मों के युवाओं के लिए एक समस्या होगी।’ मानवता की रक्षा में हमने वरिष्ठ वकीलों से चर्चा के बाद इस मुद्दे से लड़ने का फैसला किया। हम कानून द्वारा दिए गए अधिकारों की वापसी की वकालत करते हैं। दो साल पुरानी शादियों में भी कानून का उलंघन कर उत्पीड़न शुरू हो गया। उम्मीद है कि प्रतिबंध के बाद अब युवाओं का उत्पीड़न बंद होगा. हम अदालत के इस आदेश का स्वागत करते हैं और हमें विश्वास है कि अदालत निकट भविष्य में संविधान में निहित मौलिक अधिकारों को देखते हुए अपना फैसला सुनाएगी।

15 जून को गुजरात फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट लागू हुआ
इससे पहले दिन में मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति बीरेन वैष्णव की पीठ ने कहा था कि अंतरिम आदेश लोगों के अनावश्यक उत्पीड़न को रोकने के लिए है। गुजरात सरकार ने 15 जून को गुजरात धर्म स्वतंत्रता अधिनियम (संशोधन) अधिनियम, 2021 लागू किया। कानून में शादी के जरिए जबरन धर्म परिवर्तन करने पर सजा का प्रावधान है।

जबरन धर्म परिवर्तन पर 5 साल तक की सजा
गुजरात में लव जिहाद कानून 15 जून को अस्तित्‍व में आ गया था। इस कानून के तहत पांच साल की सजा और अधिकतम 5 लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान है। इसे धार्मिक स्‍वतंत्रता एक्‍ट, 2003 में संशोधन करके लाया गया है।

पीड़िता नाबालिग तो 7 साल की कैद
गुजरात सरकार ने इस अधिनियम में पीड़िता के नाबालिग होने पर 7 साल तक की कैद और 3 लाख रुपए तक का जुर्माने का प्रावधान किया है। इसके साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिए भी कम से कम 7 साल की सजा का प्रावधान है।

Source;-“दैनिक भास्कर”  

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