सिलीगुड़ी गोहाटी व दिल्ली के मंडियों में जल्द पहुंचेगी जायसी बेर
उत्तरप्रदेश

सिलीगुड़ी गोहाटी व दिल्ली के मंडियों में जल्द पहुंचेगी जायसी बेर

अमेठी:– ‘बेर’ जिसकी रचनाकारों ने समय-समय पर अपने गीतों के द्वारा प्रशंसा की। वही ‘बेर’ जो कभी भगवान राम को रिझाने में मददगार साबित हुए थे। अब वही जायस की पहचान बन गए हैं। यहां के किसान बेर के उत्पादन से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। सिलीगुड़ी, गोहाटी, व दिल्ली की मंडियों में जल्द ही यह बेर पहुंचने वाले हैं।

शीतकालीन फल बेर खास स्वाद के चलते तमाम सीमाओं को लांघ कर देश के कई राज्यों के दिलों में मिठास घोलने का काम करती है। जायस के आस-पास की ऊसर भूमि में फैली बेर पट्टी किसानों को मुनाफा दे रही है। – इन प्रजातियों की होती हैं बेर

जायस बेर पट्टी में पेवंदी, गुलवा बंगऊ, कड़ाका, पंजाबी, कैथली प्रजाति की बेर पैदा होती हैं। अपने अनोखे स्वाद के चलते यह लोगों को खूब रिझाती हैं।

  • प्रदेश के बाहर भी होता है कारोबार

जायसी बेर उत्तर प्रदेश के साथ साथ सिलीगुड़ी, असम, गोहाटी, नागालैंड और दिल्ली की मंडियों में भी लाजवाब स्वाद के कारण अपनी खास पहचान रखती हैं। बेर बागान के मालिक रमेश कुमार सिंह, पप्पू मियां, गुड्डू मियां, हाशिम घोसी, घनश्याम महेश्वरी, जलील मियां, मसरुर हसन, गुड्डू इदरीसी, शौकत गफ्फारी आदि का कहना है कि बेर व्यापारी बाग को फूल आने से पहले ही खरीद लेते हैं और पूरे सीजन बेर के धंधे के साथ साथ बागान की भी देखरेख करते हैं।

  • मुनाफे का धंधा है बेर उत्पादन

बेर का व्यापार हमेशा यहां मुनाफे का सौदा साबित होता है। जनवरी के दूसरे सप्ताह से ही बेर का सीजन शुरू हो जाता है जो मार्च तक चलता है। जायसी बेर यहां फुटपाथों और साप्ताहिक बाजार में 30 से 40 रुपये प्रति किलो जबकि प्रदेश की अन्य मंडियों में जायसी बेर छह से आठ हजार रुपये प्रति कुंतल की दर से बेची जाती है।

  • स्वास्थ्य के लिए भी है फायदेमंद

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जायस के चिकित्सा प्रभारी डा. संजय जायसवाल का कहना है कि बेर फल खाने से शरीर को स्फूर्ति व ऊर्जा मिलती है ,बेर विटामिन सी का भी अच्छा स्त्रोत है।

  • किसानों को होती है बेर से अच्छी आय

जिला उद्यान अधिकारी बलदेव प्रसाद ने कहाकि जिले के बहादुरपुर विकास क्षेत्र में बेर की अच्छी खासी खेती किसान करते हैं। यहां की बेर दूसरे प्रांतों में भी जाती है। उद्यान विभाग बेर की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों की समय-समय पर मदद करता है।

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