भिंड में कमरे में शुरू की मशरूम की खेती, रोज कमा रहे ढाई से तीन हजार रुपये
मध्यप्रदेश

भिंड में कमरे में शुरू की मशरूम की खेती, रोज कमा रहे ढाई से तीन हजार रुपये

भिंड। युवाओं को स्वरोजगार करने के लिए शासन की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। वित्तीय संस्थानों की सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन भी दिए जा रहे हैं। इसके बाद भी बहुत ज्यादा सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आ रहे हैं,लेकिन शहर के एक युवा ने न केवल अपने दम पर घर में मशरूम की खेती शुरू कर स्वरोजगार किया। बल्कि अब वह दूसरों को भी राह दिखा रहे हैं। 34 वर्षीय दीपक मिश्रा बताते हैं कि यूट्यूब की मदद से उन्होंने तीन साल पहले इस खेती की शुरूआत की थी।

शहर की शास्त्री कॉलोनी बी ब्लॉक में रहने वाले दीपक मिश्रा पोस्ट ग्रेजुएट हैं। वर्ष 2006 से 2012 तक उन्होंने मर्चेंट नेवी में नौकरी की, लेकिन परिवारिक परिस्थितियों के चलते उन्हें यह नौकरी छोड़नी पड़ी। इसके बाद वर्ष 2013 से 2016 तक दिल्ली में किसी निजी कंपनी में काम किया। अपना व्यवसाय शुरू करने की चाह उन्हें घर खींच लाई। उन्होंने बताया कि जॉब छोड़ने के बाद मैंने स्वरोजगार स्थापित करने के लिए अपने प्रयास शुरू कर दिए। इसके बाद मुझे यूट्यूब पर घर में मशरूम की खेती शुरू करने का एक वीडियो मिला। इस वीडियो की मदद से मैंने घर में मशरूम की खेती शुरू करने की तैयारी कर दी। तीन साल पहले मैंने घर के एक कमरे में कंपोस्ट खाद तैयार कर तीस पॉलीबैग में मशरूम लगाने की शुरूआत की थी। जिनकी संख्या वर्तमान में बढ़कर अब 400 हो गई है।

सेहत के लिए फायदेमंद है मशरूमः

कुछ सालों से देशभर में खेती की ओर युवाओं का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। जैसे-जैसे हम आधुनिक युग की तरफ अग्रसर हो रहे हैं, वैसे ही लोग अपने शरीर के लिए पोषक तत्व युक्त, गुणकारी, पाचनशील, स्वादिष्ट उपयोगी सब्जी भी अपने भोजन में लेना पसंद कर रहे हैं। मशरूम से हमारे शरीर को काफी मात्रा में प्रोटीन, खनिज-लवण, विटामिन बी, सी व डी मिलती है जो अन्य सब्जियों की तुलना में काफी ज्यादा होती है। इसमें मौजूद फोलिक अम्ल की उपलब्धता शरीर में रक्त बनाने में मदद करती है, इसका सेवन मनुष्य के रक्तचाप, हृदयरोग, में लाभकारी होता है।

ढाई से तीन हजार रुपये हर रोज कम रहेः

दीपक मिश्रा बताते हैं कि वर्तमान में मेरे घर में 400 पॉलीबैग में बटन मशरूम लगी हुई है। जिससे हर रोज 150 से 170 पैकेट 200 ग्राम के मशरूम के तैयार होते हैं। जिनकी शहर के साथ-साथ मेहगांव, फूफ, रौन आदि जगहों पर खपत होती है। इससे मुझे हर रोज करीब ढाई से तीन हजार रुपये की कमाई हो जाती है। वहीं मशरूम तीन प्रकार की होती है। जैसे बटन मशरूम, ढिंगरी मशरूम (ऑयस्टर मशरुम) और दूधिया मशरूम (मिल्की)। फिलहार मेरे द्वारा बटन मशरूम की खेती की जा रही है।

लीज पर ली जमीन, 4 हजार तैयार करेंगे पॉलीबैगः

घर में मशरूम की खेती में सफलता मिलने के बाद दीपक मिश्रा ने शहर में लीज पर एक जमीन लेने की योजना तैयार की है। उनका कहना है कि लीज पर जमीन लेने और उसमें मशरूम की खेती शुरू करने की योजना लगभग तैयार हो चुकी है। एक या दो महीने में हम इसकी शुरूआत कर देंगे। हमारा लक्ष्य है कि हम पहली बार में मशरूम की खेती के लिए 4 हजार पॉलीबैग तैयार करेंगे। इसके साथ ही जो लोग मशरूम की खेती करना चाहते हैं, उन्हें निःशुल्क प्रशिक्षित भी किया जाएगा।

वर्जन

-अगर कोई किसान इस तरह या पारंपरिक खेती को छोड़कर आधुनिक खेती करना चाहता है। तो वह कार्यालय में आकर इसकी जानकारी ले सकता है। आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए शासन की ओर से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

एसपी शर्मा, उपसंचालक, किसान कल्याण एवं कृषि

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