• June 6, 2026 8:04 am

आंखों में आंसू और कंधों पर बेटों का शव, 15 किमी कीचड़ में पैदल चले माता-पिता

ByPrompt Times

Sep 6, 2024
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महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है. जहां एक पति-पत्नी को चिकित्सा सुविधाओं और एंबुलेंस की कमी के कारण अपने दो बच्चों के शवों को 15 किमी तक कंधे पर ले जाना पड़ा. माता-पिता के रोने और बच्चों के शव को कंधे पर रखकर ले जाने का वीडियो वायरल हो रहा है.

 

 

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में एक दंपत्ति बीमारी की वजह से मौत हो जाने के कारण अपने दो बच्चों के शव को कंधे पर लेकर गांव पहुंचा. पति-पत्नी द्वारा दो मासूम लड़कों के शव को कंधे पर ले जाने का वीडियो हैरान कर देने वाला है. जानकारी के मुताबिक दोनों बच्चे बुखार से पीड़ित थे. वहीं स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और सही वक्त पर इलाज न मिलने के कारण दोनों बच्चों ने दम तोड़ दिया. एक की उम्र 6 वर्ष और दूसरे की 3 वर्ष बताई जा रही है.

 

 

महाराष्ट्र के पट्टीगांव गांव की इस घटना ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर किए जाने वाले तमाम दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. दो बच्चों में से बड़े भाई की उम्र 6 और छोटे की 3 साल बताई जा रही है. दोनों बच्चे बुखार से पीड़ित थे. गांव में उचित स्वास्थ्य सुविधा न होने के कारण माता-पिता अपने बच्चों को उपचार के लिए स्थानीय वैद्य के पास ले गए. वैद्य ने कुछ जड़ी-बूटियां दी, लेकिन दोनों बच्चों की हालत बिगड़ती चली गई. कुछ ही घंटों में दोनों भाइयों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी. जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए जिमलागट्टा के स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया.

 

 

इलाज कराने के लिए 15 किमी चले पैदल

पट्टीगांव को जिमलागट्टा के स्वास्थ्य केंद्र से जोड़ने वाली कोई पक्की सड़क नहीं होने और उस समय कोई एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध नहीं होने के कारण माता-पिता के पास अपने बच्चों को कंधों पर ले जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था. जिमलागट्टा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराने के लिए वे कीचड़ भरे रास्तों से होते हुए 15 किलोमीटर तक पैदल चलकर पहुंचे. हालांकि, डॉक्टर ने बताया कि तब तक बच्चों की मौत हो चुकी थी.

 

 

समय पर नहीं मिला इलाज

वहीं दंपत्ति को शवों को घर वापस लाने के लिए 15 किमी पैदल चलना पड़ा. वह पथरीले और कंटीले रास्ते पर चलकर वापस घर को लौटे. हालांकि अस्पताल की तरफ से कहा गया था कि वे एक एम्बुलेंस की व्यवस्था कर रहे हैं, लेकिन दुखी माता-पिता ने उस मदद से इनकार कर दिया और पैदल ही घर लौट आया.

गढ़चिरौली जिले में इस तरह की घटना कोई नई बात नहीं है. इसी तरह के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं. भामरागढ़, एटापल्ली और अहेरी तहसीलों के अन्य दूरदराज के गांवों से ऐसे मामले सामने आ चुके हैं. कई गांवों में अभी भी उचित सड़कों, चिकित्सा विशेषज्ञों और समय पर एम्बुलेंस सेवाओं मिलने का अभाव है. चिकित्सा के लिए कई बार ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग असहाय हो जाते हैं.

 

 

SOURCE – TV9 BHARATVARSH

 

 

 

 


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