16 जनवरी 2023 | साल 2023 (year 2023) को शुरू हुए दो सप्ताह का समय हो गया है. इस दौरान दुनिया में पिछले साल की घटनाओं और गतिविधियों (Global events and Activities) के साथ इस साल की संभावनाओं पर भी काफी विश्लेषण हुआ है. 2019 से शुरू महामारी से उबरने से दौरान साल 2022 में ही उम्मीदें थी कि दुनिया काफी हद तक आर्थिक समस्याओं (Economic Challenges) से उबर सकेगी, लेकिन रूस यूक्रेन युद्ध (Russia Ukraine War) ने हालात और ज्यादा बिगाड़ दिए और आलम यह हो गया जिस मंदी से उबरने की उम्मीद पिछले साल की जा रही थी वह इस साल नहीं की जा रही है. पिछले 13 दिनों ने दुनिया को ऐसे संकेत दिए हैं जो बताते हैं कि आर्थिक दृष्टिकोण से यह साल कैसा होगा.
कई महीनों पहले से ही उम्मीद थी इस साल (year 2023) आर्थिक मंदी (Economic Recession) का ही रहेगा, लेकिन पिछले कुछ दिनों हालात यही बता रहे हैं कि स्थिति और खराब ही हो रही है. यह साल 2009 के बाद इस सदी का तीसरा सबसे खराब वर्ष होने की आशंका है. इस साल अभी तक दुनिया (World) के केंद्रीय बैंक उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं की मांग को कम करने की कोशिशों को देखते हुए ब्याज दरों में लगातार इजाफा कर रहे हैं. इरादा बढ़ती महंगाई पर लगाम कसने का है. यह अनुमान मजबूत हो रहा है कि 2022 की तुलना में 2023 ज्यादा ‘कठिन’ मुश्किल साल होगा.
रूस यूक्रेन युद्ध (Russia Ukraine War) के कारण जो दुनिया (World) में राजनैतिक और आर्थिक तनाव पैदा हुआ है वह कम होता तक नहीं दिखाई दे रहा है. युद्ध के खात्मे की उम्मीद दूर दर तक नजर नहीं आ रही है. इसके साथ ही चीन (China) और ताइवान के बीच तनाव गहरा बना हुआ है जिसके कम होने के भी आसार नजर नहीं हो रहे हैं. दूसरी तरफ उत्तर कोरिया भी के मिसाइल परीक्षणों ने इलाके में अलग तरह का तनाव बढ़ा दिया है. इसके अलावा अमेरिका चीन के बीच कारोबारी संघर्ष और व्यापकस्तरों पर जा रहा है.
इस साल दुनिया (World) में महंगाई (Inflation) कम होने की जगह बढ़ने की संभावना ज्यादा है. मांग और आपूर्ति दोनों की कमी, शिपिग की बढ़ती समस्या, ऊर्जा की कीमतों का संकट (Energy Crisis), खाद्य संकट गहराने की संभावना का बने रहने जैसे कई कारक है जिससे उम्मीद कम ही है कि महंगाई की रफ्तार कम हो पाएगी. इससे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में इजाफा करेंगे और वे करने भी लगे हैं. कर्ज की समस्या वैश्विक स्तर पर और बढ़ेगी. लेकिन कुछ कारक इस महंगाई की रफ्तार पर लगाम लगाने का काम भी कर सकते हैं. लेकिन ऐसा होने पर ये धीरे ही हो पाएगा.
साल 2022 में दुनिया को लगने लगा था कि कोविड-19 (Covid-19) महामारी से 2023 में छुटकारा मिल जाएगा. लेकिन चीन (China) में कोविड महामारी के हालात ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल रखा है. जिससे साफ लगता है कि अभी दुनिया (World) को कोविड से निपटने के उपाय जारी रखने होंगे. सबसे बड़ी समस्या चीन से आंकड़ों का ना आना और वहां जीरो टॉलरेंस के विपरीत हर तरह की पाबंदी हटाना है. इससे दुनिया में कोविड का नया वेरिएंट पनपने और फैलने की आशंका बलवती हो गई है और दुनिया के विशेषज्ञ कम से कम पूरी तरह सावधानी बरतने की सलाह देने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं. इसका अगले कुछ महीनों तक आर्थिक गतिविधियों पर असर जरूर होगा.
रूस यूक्रेन युद्ध ने दुनिया अभूतपूर्व किस्म का ऊर्जा संकट (Energy Crisis) पैदा कर दिया है. दुनिया में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ी हैं. रूस से यूरोप (Europe) को प्राकृतिक गैस मिलना बंद होने से वहां संकट की स्थिती है. यूरोप इस साल की सर्दी में ऊर्जा संकट से बचने में सफल हो सकता है, क्योंकि मौसम ने भी साथ दिया है और उपभोक्ताओं ने भी इस्तेमाल में कटौती की है. विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप में सर्दी का वह कहर नहीं दिख रहाहै जिससे ऊर्जा की मांग में इजाफा होगा और साथ ही यूरोप ने बचत पर भी ध्यान दिया है, दूसरी ओर दुनिया सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर तेजी से काम शुरू किया है. लेकिन इनके नतीजे आने में समय लगेगा.
साल 2023 में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का प्रभाव और भी चरम और तीखा होने का अनुमान है. 2022 में दुनिया (World) में अमेरिका यूरोप से लेकर चीन तक में चरम गर्मी, बाढ़, सूखा, चरम सर्दी, बेमौसम तीव्र तूफान जैसी घटनाओं (Extreme climate Events) ने दुनिया को जबर्दस्त नुकसान पहुंचाया जिससे लगभग हर देश को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. पाकिस्तान में अभूतपूर्व भीषण बाढ़, ब्रिटेन में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, यूरोप में सूखा, भारत में भीषण ग्रीष्म लहर, चीन में रिकॉर्ड तोड़ सूखा और गर्मी ने कहर ढाया था तो विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल भी मौसम का मिजाज इसी तरह का देखने को मिलेगा. यानि इस साल प्रकृति बहुत बड़े स्तर एक बार फिर आर्थिक नुकसान करवाएगी.
सोर्स :-“न्यूज़ 18 हिंदी|”
