• June 7, 2026 9:14 am

इसे बनाने वाले अरबपति का दावा- ये रोबोट इंसानों की भावनाएं समझेंगे, खुश रखेंगे; कीमत 2 लाख रुपए

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13 अप्रैल 2022 | जापान के अरबपति और फैशन टायकून युसाकू मेजावा ने दो साल पहले चांद पर जाने के लिए एक जीवन साथी की दुनियाभर में खोज शुरू कर सुर्खियां बटोरी थी। उन्होंने उस योजना काे बीच में रोककर नई घोषणा की है।​ मेजावा ने इंसानी भावनाओं को समझने और उनका अकेलापन दूर करने वाले रोबोट बनाने वाले स्टार्ट-अप में निवेश किया है। 

2 लाख रुपए से शुरू है रोबोट कीमत
मेजावा का कहना है कि ये रोबोट इंसानों का अकेलापन दूर कर सकते हैं और लाेगाें काे भावनात्मक रूप से खुश रख सकते हैं। रोबोट की कीमत 2 लाख रुपए से शुरू होती है। इसे 6000 रु. के मंथली पेमेंट पर ले सकते हैं।

इस रोबोट ने कोरोना काल के दौरान लोगों का ध्यान रखा है।

इस रोबोट ने कोरोना काल के दौरान लोगों का ध्यान रखा है।

महामारी के दौरान काम आए रोबोट
मेजावा ने जापानी रोबोटिक्स स्टार्टअप ग्रूव एक्स में पिछले महीने निवेश की घोषणा की, जो ‘लोवोट’ नाम से प्रोडक्ट बनाता है। लोवोट लव और रोबोट को मिलाकर बना है। ग्रूव एक्स के मुताबिक, उनके रोबोट कोरोना महामारी के दौरान उन लोगों का साथ देने में सफल हुए, जिन्हें कुछ मजबूरियों की वजह से अपनों से दूर रहना पड़ रहा था।

इसमें 50 से अधिक सेंसर
यह रोबोट 50 से अधिक सेंसर से बने हैं और इंसान की हर भावना को समझने में सक्षम हैं। फिलहाल यह जापान में बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। मेजावा ने दावा किया है कि यह रोबोट इंसानों को हमेशा खुश रखने और उन्हें स्वस्थ रख सकते हैं। इनका इस्तेमाल हॉस्पिटल में मानसिक रूप से परेशान मरीजों को भी ठीक करने में किया जा सकता हैं। ग्रूव एक्स जल्द ही जापान के बाहर इन रोबोट की डिलीवरी शुरू कर सकती है।

इस रोबोट का इस्तेमाल बच्चों की लर्निंग स्किल बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।

इस रोबोट का इस्तेमाल बच्चों की लर्निंग स्किल बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।

नर्सरी और प्राइमरी स्कूल के लिए भी उपयोगी
जापान के इनोवेशन नेटवर्क कॉरपोरेशन के मुताबिक, लोवोट उपकरणों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। कोरोना महामारी में स्वास्थ्य देखभाल में ये उपयोगी साबित हुए हैं। इनका इस्तेमाल नर्सरी, किंडरगार्टन और प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की लर्निंग स्किल बढ़ाने और पढ़ाई में उनकी रुचि बढ़ाने में भी किया जा सकता है। इस संबंध में किए गए प्रयोग सफल साबित हुए हैं।

’Source;- ‘’दैनिक भास्कर’


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