08 फ़रवरी 2023 | अनुवांशिक बीमारी ड्यूचटन मस्कुलर डिस्ट्राफी (डी.एम.डी.) से ग्रस्त बच्चों के इलाज-वित्त सहायता की उम्मीद से देश के 29 राज्यों के अभिभावकों ने ‘एक ही दिन-एक ही समय के निर्धारित मिशन’ के तहत हर जिले के डी.सी. दफ्तरों को राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री के नाम से ज्ञापन सौंपा तथा हर दिन मौत से जूझती अनमोल जिंदगियों को बचाने की गुहार से हाथों में स्लोगन तख्ते थाम कर शांतमय विरोध प्रदर्शन किया, वहीं बीमारी समक्ष बेबस होकर आत्महत्या करने वाले परिवार की स्मृति में भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करवाई।
इस मौके पंजाब केसरी टीम के सान्निध्य में जिला मालेरकोटला से अजय गर्ग, शशि मित्तल, नवीन गोयल, हरजिदर सिंह धलेर, सराज मुहम्मद, जिला लुधियाना से गुरप्रीत सिंह, राज सिंगला, सुनीता सिंगला, सर्बजीत कौर, हरमिन्द्र सिंह, जिला मोहाली से अंग्रेज सिंह, विवेक कुमार, जिला नवांशहर से विक्रांत राणा, जिला जालंधर से अमित कुमार, जिला अमृतसर से विक्रमजीत सिंह, जिला संगरूर से सुभाष गोयल, बरनाला से विजय गोयल ने रोष प्रकट करते कहा कि डी.एम.डी. ग्रस्त दवाइयों-इलाज के अभाव से तड़प रहे हैं तथा माता-पिता मासूम बच्चों को ऐसे मौत के साये तले देखकर स्वयं का मानसिक संतुलन खोकर आत्महत्या कर रहे हैं।
इतना ही नहीं असमर्थ अभिभावक सिर्फ बच्चों की रुद्ध पुकार ‘पापा समय बहुत कम है… सरकारों को कहकर मुझे बचा लो क्योंकि मैं जीना चाहता हूं’ को नम आंखों से देखकर आसमान के फरिश्तों की तरफ ताक रहे हैं परन्तु देश के भविष्य को असामयिक मौत से बचाकर जीवनदान में कारगर जीन्स थैरेपी पर पूर्ण कार्य में जुटे वैज्ञानिक, डॉक्टरों को भी सरकारी फंड-बजट की कमी से जूझना पड़ रहा है।
वहीं, सरकारें मेक इन इंडिया तहत आत्मनिर्भर स्वस्थ देश के लुभावने सपने दिखा रही हैं, पर धरातल पर सब शून्य है तथा नेताओं को सैंकड़ों बार चेताने के बावजूद भी कोई मानवीय दर्द का असर नहीं हो रहा है जिससे सरकारी असंवेदनशीलता प्रति नाराजगी बढ़ी तो गणतंत्र दिवस को मध्य प्रदेश में बच्चों के इलाज में असमर्थ दंपति ने 2 बालकों संग सल्फास खाकर आत्महत्या के भयानक रास्ते को चुनना बेहतर समझा।
