सेना से जुड़कर आम से खास हो गए जवान
राज्य

सेना से जुड़कर आम से खास हो गए जवान

सेना से जुड़कर आम से खास हो गए जवान

रानीखेत (अल्मोड़ा)देश की आन बान शान की रक्षा की शपथ लेकर कुमाऊं रेजीमेंट केंद्र के 151 रिक्रूट विधिवत रूप से थल सेना का अंग बन गए। मुख्य अतिथि केआरसी के कमांडेंट ब्रिगेडियर जीएस राठोर ने कहा कि देश सेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं होती। जवानों ने फौज में आकर जीवन का सर्वश्रेष्ठ निर्णय लिया है। सीमाओं की रक्षा के लिए उन्होंने कहा कि यदि सर्वोच्च बलिदान करना पड़े तो उससे भी पीछे नहीं हटना चाहिए। सेना के सोमनाथ मैदान में आयोजित कसम परेड में नव प्रशिक्षित जवानों से शानदार परेड का नजारा पेश किया। मुख्य अतिथि कमांडेंट ब्रिगेडियर जीएस राठौर सहित तमाम अधिकारियों ने परेड की सलामी ली। परेड कमांडर कैप्टन सुमुख एमएस की देखरेख में जवानों पूरे मैदान में शानदार ड्रिल पेश किया। इसके बाद बटालियन पंडित धर्मशिक्षक सूबेदार मेजर दिनेश जोशी ने गीता और राष्ट्रीय ध्वज को साक्षी मानकर जवानों को देश सेवा की शपथ दिलाई।

कमांडेंट ब्रिगेडियर राठौर ने जवानों की हौसला आफजाई की, कुमाऊं रेजीमेंट केंद्र के इतिहास से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि देश ही ही सबसे बड़ी सेवा है। जवानों से उन्होंने ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ सीमाओं की निगहबानी करने का आह्वान किया। इस दौरान डिप्टी कमांडेंट कर्नल निखिल श्रीवास्तव, टीबीसी कर्नल केके मिश्र आदि ने भी परेड की सलामी ली।

उत्तराखंड से सबसे अधिक 104 जवानों ने ली शपथ
रानीखेत। सोमनाथ मैदान में सबसे अधिक उत्तराखंड से 104 जवानों ने शपथ ली। इसके बाद हरियाणा से 14, राजस्थान से 14, उत्तर प्रदेश से 12, गुजरात से एक, मध्य प्रदेश से चार, बिहार से एक और आंध्र प्रदेश से एक जवान ने शपथ ली।

ये जवान हुए गौरव मैडल से सम्मानित
सिपाही भूपेंद्र यादव, निखिल राणा, योगेश सिंह, विक्रम सिंह, राकेश कांडपाल।

सामंत परिवार की चौथी पीढ़ी भी सेना में
पहले परदादा, दादा फिर पिता और अब बेटा भी फौज में यह कहानी है। खटीमा के सिपाही विजय सामंत की। थल सेना का अंग बनने के बाद बेहद प्रसन्न दिखे विजय ने बताया कि अपने परिवार में वह चौथी पीढ़ी के व्यक्ति हैं जो देश सेवा के लिए फौज में आए हैं। अपने पिता की इकलौती संतान होने के बावजूद बचपन से ही उनमें सेना में जाने की ललक पैदा हुई। पांच साल की उम्र से ही उन्होंने खड़ी पहाड़ियों में दौड़ का अभ्यास शुरू कर दिया था। उनकी यही ललक उन्हें सेना में खींच लाई। उनका कहना है कि राष्ट्र से बड़ा कोई नहीं है। मां भारती की रक्षा के लिए वह सर्वोच्च बलिदान करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उनके पिता चंचल सिंह सामंत कुमाऊं स्कॉट से सेवानिवृत्त हैं। बेटे को देश सेवा की शपथ लेता देख पूरे परिवार की आंखें नम हो आई। मां हरिप्रिया ने कहा कि उन्हें गर्व है कि परिवार से एक और लाल सेना में गया है। विजय के परदादा वीर सिंह ने वर्मा की लड़ाई लड़ी, जबकि उनके दादा नारायण सिंह बंगाल इंजीनियरिंग में थे। विजय के परिजनों ने कहा कि जब देश है तब ही लोग भी हैँ। राष्ट्र से सर्वोपरि कोई नहीं है। सीमाओं को सुरक्षित रखना ही जवान का कर्तव्य है। युवाओं को अधिक से अधिक संख्या में सेना में जाकर देश सेवा करनी चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *