विदेशी 'राफेल' को कबूतरों से बचाएगी ये स्वदेशी तकनीक, भारतीय वायुसेना ने जताई थी चिंता
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विदेशी ‘राफेल’ को कबूतरों से बचाएगी ये स्वदेशी तकनीक, भारतीय वायुसेना ने जताई थी चिंता

विदेशी ‘राफेल’ को कबूतरों से बचाएगी ये स्वदेशी तकनीक, भारतीय वायुसेना ने जताई थी चिंता

भारतीय वायु सेना बहुचर्चित राफेल लड़ाकू विमानों की सुरक्षा के लिए बेहद चिंतित है। यह चिंता किसी शत्रु राष्ट्र की ओर से नहीं, बल्कि एयरबेस के आसपास मंडराने वाले कबूतरों से है। अंबाला एयरबेस, जहां पर सभी 36 राफेल आने हैं, वहां काफी संख्या में कबूतर उड़ते रहते हैं। इनकी वजह से लड़ाकू विमानों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है। दिल्ली के एलिवेटेड मेट्रो स्टेशनों के शेड, एफसीआई के खुले गोदाम, रेलवे स्टेशन एवं माल गोदाम के लिए बने शेड आदि जगह कबूतरों के लिए महफूज मानी जाती हैं।

360 डिग्री एंगल पर लोहे की कंटीली झाड़

विदेशी ‘राफेल’ को कबूतरों से बचाने के लिए एक स्वदेशी तकनीक विकसित की गई है। ये कबूतर प्रजनन के लिए जहां अपना घोंसला बनाते हैं, वहां 360 डिग्री एंगल पर लोहे की कंटीली झाड़ लगाई जाएगी। चूंकि ये कबूतर दिल्ली में भी विमानों के लिए खतरा बने हुए हैं, इसलिए मेट्रो ने कुछ स्टेशनों पर इस तकनीक का इस्तेमाल किया है। रेलवे, एफसीआई और दूसरे विभागों, जिनके खुले शेड हैं, उन्हें भी यह तकनीक अपनाने की सलाह दी जा रही है। अंबाला जिला प्रशासन ने एयरबेस के आसपास कबूतर पालने वालों से भी आग्रह किया है कि वे हवाई जहाजों की सुरक्षा के मद्देनजर ऐसा न करें।

दुर्घटनाग्रस्त होने से बाल-बाल बचा था जगुआर

बता दें कि जून माह में वायु सेना का लड़ाकू विमान पक्षी के टकरा जाने की वजह से दुर्घटनाग्रस्त होते-होते बचा था। पायलट की सूझबूझ से जगुआर की अंबाला एयरबेस पर सुरक्षित लैंडिंग कराई गई। इसके बाद वायु सेना ने आम लोगों के लिए अपने ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट किया था। जिसमें आग की लपटों से घिरा एक विमान दिखाया गया था। वायु सेना ने सिविल प्रशासन से आग्रह किया था कि वह एयरफील्ड के आसपास कबूतर पाल रहे लोगों को समझाएं। उन्हें बताएं कि ये कबूतर लड़ाकू जहाज के कितने खतरनाक हो सकते हैं। कबूतरों के चलते राफेल एवं दूसरे लड़ाकू जहाजों की उड़ान प्रभावित होगी।

कबूतरों पर खासी निगरानी

अंबाला जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि एयरबेस के आसपास ही नहीं, बल्कि निकटवर्ती सभी शेडों का भी निरीक्षण किया जा रहा है। प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि वहां कबूतरों को घोंसला बनाने की जगह न मिले। लोगों से भी कह दिया गया है कि वे एयरबेस के आसपास कबूतर न रखें। सूत्र बताते हैं कि बड़े शहरों के आसपास जितने भी एयरबेस हैं, वहां कबूतरों पर खासी निगरानी रखी जा रही है। एयरबेस के 10-15 किलोमीटर के क्षेत्र में बने शेडों पर लोहे की कंटीली झाड़ लगाई जाएगी।

दिल्ली मेट्रो भी है परेशान

दिल्ली मेट्रो के एलिवेटेड यानी जमीन के ऊपर बने स्टेशनों पर विशालकाय शेड लगे हुए हैं। सीआईएसएफ के एक अधिकारी के मुताबिक, पिछले पांच छह साल में इन शेडों के नीचे रहने वाले कबूतरों की तादाद कई गुना बढ़ गई है। खासतौर पर, नांगलोई, पीरागढ़ी और द्वारका लाइन मेट्रो स्टेशनों, गुरुग्राम मेट्रो लाइन और पंजाबी बाग मेट्रो लाइन के एलिवेटेड स्टेशनों पर कबूतरों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। ये कबूतर दिन में इधर-उधर उड़ते रहते हैं, जबकि रात को यहां वापस आ जाते हैं।

रेलवे और एफसीआई भी करेंगे इस तकनीक का इस्तेमाल

एलिवेटेड मेट्रो स्टेशनों के शेड अंदर की ओर से ऐसे बने हैं कि इन कबूतरों को घोंसला बनाने में आसानी रहती है। शेड के नीचे आंधी तूफान और बरसात जैसी आपदाओं से कबूतर बच जाते हैं। अब हवाई जहाजों की सुरक्षा के मद्देनजर एलिवेटेड स्टेशनों के शेड पर लोहे की कंटीली झाड़ लगाई जा रही है। ये केवल उन्हीं जगहों पर लगेगी, जहां पर घोंसला बनता है। वहीं, रेलवे और एफसीआई भी अपनी उन जगहों पर इस तकनीक का इस्तेमाल करेगा, जहां कबूतरों के घोंसले बने हैं। लोहे की कंटीली झाड़ से कबूतरों को घोंसला बनाने का मौका नहीं मिलता और इसलिए वे उस जगह को छोड़ देते हैं।

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