13 जून 2022 | राजधानी को वाटर प्लस सिटी बनाने के लिए निगम ने पूरी तैयारी कर ली है। राजधानी में सीवेज के पानी काे उपचारित कर इसका पुन: उपयोग किया जा रहा है। शहर के अधिकतर इलाकों में कालोनियों को सीवेज नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है। अब सर्वे में मिले अंकों के आधार पर रैंकिंग तय की जाएगी।
बतादें कि बीते तीन दिनों से वाटर प्लस का सर्वे चल रहा है। शुक्रवार व शनिवार को केंद्रीय टीम ने पुराने शहर व भेल क्षेत्र के इलाकों का सर्वे कर चुकी है। रविवार को जोन क्रमांक 7, 8, 9 और 19 के विभिन्न इलाकों में टीम के सदस्यों ने लोगों के घरों में निजी शौचालय के साथ सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों का निरीक्षण किया। यहां की साफ सफाई के बारे में रहवासियों से फीडबैक लिया। निगम अधिकारियों ने बताया कि वाटर प्लस की टीम शहर में शौचालयों के साथ मुख्य रुप से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित जल का पुर्नउपयोग और खुले में बहने वाले सीवेज का मुआयना करेगी। स्वच्छ एप में सिटी प्रोफाइल के आधार पर स्थान का चयन किया जाता है। टीम के सदस्य यहां से मौके की फोटो एप में अपलोड करते हैं। इसी के आधार पर रैकिंग तैयार की जाती है। रविवार को केंद्रीय टीम के सदस्यों ने कोलार, शाहपुरा, चूनाभट्टी, मालवीय नगर, एमपी नगर, कटारा हिल्स समेत अन्य आसपास के इलाकों में वाटर प्लस का सर्वे किया। रहवासियाें से सेप्टिक टेंक के नियमित सफाई की जानकारी ली। शौचालयों में टावेल व साबुन की उपलब्धता का मुआयना किया। खाली प्लाटों में बहने वाले सीवेज के बारे में जानकारी जुटाई।
वाटर प्लस के लिए निगम कर रहा प्रयास
नगर निगम भोपाल वाटर प्लस शहर बनने के लिए सीवेज जल को उपचारित कर पुन: उपयोग कर रहा है। प्रतिदिन शहर के तालाब और जलाशयों में मिलने वाला सीवेज का पानी 14 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए उपचारित किया जा रहा है। इससे रोजाना नगर निगम को 232 लाख लीटर अतिरिक्त जल मिल रहा है। इसका उपयोग निगम के गार्डन व अन्य स्थानों पर लगाए गए पेड़-पौधों की सिंचाई में किया जा रहा है। साथ ही इस जल का उपयोग शौचालय और अन्य सार्वजनिक स्थानों की सफाई के लिए किया जा रहा है।
सोर्स ;-“नईदुनिया”
