30 नवंबर 2023 ! सपा विधायक बलवा गांव में आयोजित शतचंडी महायज्ञ कार्यक्रम में शामिल होने साम्या माता मंदिर पहुंची थीं.
विधायक के जाने के एक दिन बाद, हिंदू संगठन के सदस्यों और भाजपा के बढ़नी चाफा से नगर पंचायत चेयरमैन धर्मराज वर्मा के मंदिर को गंगाजल से धाेने और मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ करवाने की ख़बर है.
मंदिर में विधायक के जाने और फिर भाजपा नेताओं द्वारा मंदिर को धोने के बाद से पूरे मामले से इलाक़े में विवाद की स्थिति पैदा हो गई है. वहीं शतचंडी महायज्ञ का आयोजन करवाने वाले कृष्ण दत्त शुक्ला ने हिंदू संगठन और भाजपा नेता के मंदिर धोने पर ही सवाल खड़े किए हैं .
वो कहते हैं “वो मंदिर मेरा है और आज से नहीं है. सदियों से हिंदू और मुसलमान इस मंदिर में जाते थे. अलग-अलग धर्म के लोग आज भी मंदिर में जाते हैं. ये विवाद किस बात को लेकर फैला रहे हैं हम?”
कृष्ण दत्त शुक्ला सवाल उठाते हैं, “अगर एक मुसलमान के मंदिर जाने पर मंदिर अपवित्र हो जाता है तो हिंदू भी तो मुसलमानों के तीर्थ स्थानों पर जाते हैं. तो उन्हें भी उनके स्थलों पर नहीं जाना चाहिए.”
वो कहते हैं, “हमारे लिए कोई अपवित्र नहीं है. ग्रन्थों में भी यही लिखा है कि मंदिर में जात-पात का कोई भेदभाव नहीं होता है. मंदिर तो धार्मिक स्थल है, वहां कोई भी जाकर के अपना शीश झुका सकता है.”
मंदिर के शुद्धिकरण के नाम पर, मंदिर को धुलावाने की मांग करने वाले भाजपा नेता धर्मराज वर्मा का कहना है कि मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है.
उन्होंने कहा, “लोग समर्पण भाव से यहां आते हैं, जिसका विधायक ने अपमान किया है. वह मांसाहारी हैं. उनके दौरे से मंदिर की पवित्रता प्रभावित हुई.”
धर्मराज वर्मा विधायक पर आरोप लगाते हुए कहते हैं कि “उन्हें और उनके समाज को जब मंदिर से कुछ लेना-देना नहीं हैं तो फिर वह हमारे धार्मिक स्थल पर क्या करने आई थीं? हम लोग हर मंगलवार यहां पर पूजा करते हैं. वो लोग मांस खाने वाले हैं, पता नहीं क्या खाकर यहां आए और मंदिर को अपवित्र कर गए.”
धर्मराज वर्मा ने कहा कि मंदिर में हो रहे यज्ञ में शामिल होने के लिए अगर सपा विधायक सैय्यदा ख़ातून को आयोजकों ने बुलाया भी था, तो भी उनको वहां नहीं आना चाहिए था.
धर्मराज वर्मा ने यह भी बताया, “मुस्लिम विधायक के आने से जो पवित्र स्थान अशुद्ध हुआ था, उसको गंगा जल, गोमूत्र, गोबर और सभी विधि-विधान से पूजा करके फिर से पवित्र कर दिया है.”
मंदिर के शतचंडी यज्ञ में जाने और फिर मंदिर को गंगाजल से धोने के पूरे विवाद पर कहा, “धर्मराज वर्मा की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, सोशल मीडिया में और क्षेत्र की जनता के बीच अपना नाम बनाने के लिए वह ऐसा करते हैं.”
“इन जैसे लोगों की बातों और काम पर मैं ध्यान नहीं देती हैं. ऐसे लोगों को ज़्यादा तवज्जो देने की ज़रूरत नहीं है. धर्मराज वर्मा जैसे लोगों की जगह और इलाज आगरा के अस्पताल में हो सकता है.”
सैय्यादा ख़ातून पूरे मामले को तूल नहीं देने की बात करते हुए कहती हैं, “अगर मेरे क्षेत्र की जनता मुझे बुलाएगी तो मैं ज़रूर जाउंगी. मेरे लिए मंदिर और मस्जिद, सब खुदा के घर हैं.”
सोर्स :-“BBC न्यूज़ हिंदी”
