इलाहाबाद हाईकोर्ट में मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह विवाद सहित कई मामलों को लेकर सुनवाई चल रही है. इस मामले में अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होनी है. जबकि 1 अप्रैल को शीतला सप्तमी और 2 अप्रैल को शीतला अष्टमी बासोड़ा पूजा है. श्रीकृष्ण कूप में कई सालों से शीतला सप्तमी और बासोड़ा की पूजा होती आ रही है. लेकिन मुस्लिम समुदाय द्वारा श्रीकृष्ण कूप में पूजा करने से रोका जा रहा है. ऐसे में शीतला सप्तमी और बासोड़ा की पूजा को लेकर संशय की स्थिति है. जबकि हिंदू धर्म में बासोड़ा पर्व को बहुत अहम माना गया है. आइए जानते हैं शीतला अष्टमी बासोड़ा पूजा का महत्व और इससे जुड़ी जरूरी बातें.
शीतला सप्तमी और बासोड़ा 2024
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतला अष्टमी या बासोड़ा पर्व मनाया जाता है. इस दिन स्वास्थ्य और समृद्धि की देवी शीतला की पूजा की जाती है. चूंकि इस दिन शीतला माता को ठंडे बासी भोजन का भोग लगाया जाता है इसलिए इसे बासोड़ा कहते हैं. बासोड़ा उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में प्रमुखता से मनाया जाता है.
इस साल हिंदी पंचांग के अनुसार शीतला अष्टमी तिथि 1 अपैल की रात 09 बजकर 09 मिनट से शुरू होगी और 02 अप्रैल को शाम 08 बजकर 08 मिनट पर समाप्त होगी. शीतला अष्टमी की पूजा करने का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 19 मिनट से लेकर शाम 06 बजकर 32 मिनट तक रहेगा. वहीं इससे पहले शीतला सप्तमी की जाती है और तरह-तरह के पकवान बनाकर रखे जाते हैं. फिर अगले दिन बासोड़ा पर इन्हीं बासी पकवानों का देवी शीतला माता को भोग लगता है. बासोड़ा के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता है.
हिंदू धर्म में देवी शीतला को स्वास्थ्य और समृद्धि की देवी माना गया है. ऐसी मान्यता है कि देवी शीतला की पूजा करने से चेचक, चिकनपॉक्स जैसी बीमारियों से छुटकारा मिलता है. साथ ही अन्य बीमारियां भी दूर होती हैं. हाथ में झाड़ू रखने वाली देवी शीतला की पूजा करना घर की दरिद्रता को दूर करके धन की आवक भी बढ़ाता है.
