• June 9, 2026 2:07 pm

पीएम मोदी मिस्र की जिस मस्जिद में जाएंगे उसका भारत से क्या कनेक्शन है?

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24 जून 2023 ! विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने पीएम मोदी के अल-हाकिम मस्जिद के दौरे के बारे में जानकारी देते हुए बताया, ”मिस्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 जून को अल-हाकिम मस्जिद का दौरा करेंगे, जिसे 11वीं शताब्दी में बनाया गया था और दाऊदी बोहरा समुदाय ने इसका जीर्णोद्धार करवाया था.”

इसके अलावा मोदी ‘हेलिओपोलिस कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव सेमेटरी’ भी जाएंगे. यहां मोदी प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मिस्र के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि देंगे.

पीएम मोदी की यह पहली मिस्र यात्रा है और साल 1997 के बाद किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की मिस्र की पहली आधिकारिक यात्रा है.

मिस्र की राजधानी काहिरा दुनियाभर में इस्लामी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है.

यहां इस्लाम से जुड़ीं इमारतें और अलग-अलग कालखंड की मस्जिदें मौजूद हैं. इन्हीं मस्जिदों में से एक है अल-हाकिम मस्जिद.

अल-हाकिम मस्जिद के बारे में जानकारी देते हुए प्रोफेसर डोरिस बेहरेंस अबुसैफ अपनी किताब ‘इस्लामिक आर्किटेक्चर इन काइरो: एन इंट्रोडक्शन’ में लिखती हैं कि जिन परिस्थितियों में अल-हकीम मस्जिद का निर्माण किया गयाा वह असामान्य हैं.

मस्जिद का निर्माण फ़ातिमिद राजवंश के पांचवें ख़लीफ़ा अल-अज़ीज़ ने दसवीं शताब्दी (990 ईस्वी) के आख़िर में शुरू करवाया था.

फ़ातिमिद राजवंश अरब मूल का एक इस्माइली शिया राजवंश था.

निर्माण शुरू होने के एक साल बाद मस्जिद में पहली बार नमाज़ पढ़ी गई, हालांकि इमारत तब भी पूरी तरह से नहीं बनी थी.

इतिहासकारों का मानना है कि तब तक मस्जिद में सिर्फ़ नमाज़ वाला कमरा ही बना था.

अमेरिकी इतिहासकार जोनाथन एम. ब्लूम की किताब ‘द मोस्क ऑफ अल-हाकिम इन काइरो’ के मुताबिक़, इस अधूरी बनी मस्जिद में करीब 12 साल तक नमाज़ अदा करने का सिलसिला चलता रहा और साल 1002-03 में अल-अज़ीज़ के बेटे और फ़ातिमिद राजवंश के छठवें ख़लीफ़ा अल-हाकिम ने मस्जिद का पुनर्निर्माण शुरू कराया.

इन्हीं अल-हाकिम के नाम पर मस्जिद का नाम अल-हाकिम रखा गया है.

दस साल बाद साल 1013 में मस्जिद पूरी तरह से बनकर तैयार हुई.

इस समय मस्जिद की लंबाई 120 मीटर और चौड़ाई 113 मीटर थी.

यह आकार में मशहूर अल-अज़हर मस्जिद से दोगुनी थी और इसके निर्माण की कुल लागत 45 हज़ार दिनार थी.

तब मस्जिद मूल रूप से काहिरा शहर की दीवारों के बाहर थी लेकिन साल 1087 में मस्जिद शहर के अंदर पहुंच गई.

इस काम को फ़ातिमिद राजवंश के आठवें ख़लीफ़ा अल-मुस्तानसिर के वज़ीर बद्र अल-जमाली ने अंजाम दिया था.

बद्र अल-जमाली ने काहिरा शहर की दीवारों को उत्तर दिशा में मस्जिद तक बढ़ा दिया था.

  सोर्स :-“BBC  न्यूज़ हिंदी”                                  


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