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लापरवाही की वजह से सड़ गया करोड़ों का गेहूं, किसानों के पेट पर लात, आखिर कौन जिम्मेदार?

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3 जुलाई 2023 ! शिवपुरी जिला मुख्यालय में स्थित पनामा कंपनी के साइलो गेहूं भंडारण केंद्र पर 15 करोड़ से ज्यादा का 76000  क्विंटल गेहूं सड़ कर बर्बाद हो गया. जबकि कंपनी और सरकार ने दावा किया था कि सायलो बैग में गेहूं खराब नहीं होता. अब जब इतनी बड़ी तादाद में गेहूं सड़कर पूरी तरह बर्बाद हो गया है, तब प्रशासन के आला अधिकारी गाहे-बाहे झांकते नजर आ रहे हैं. वहीं, जिला कलेक्टर शिवपुरी का कहना है कि मामले की पूरी तरह जांच कराने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी .

जानकारी के मुताबिक, साइलो केंद्र भेड़ फार्म परोड़ा ने साल 2020-21 में किसानों से लगभग 4.10 लाख क्विंटल गेहूं सीधे खरीदा और साइलो बैग में उसे भरकर सुरक्षित रखने का दावा किया. पनामा एग्रीकल्चर कंपनी द्वारा साइलो बैग में 2 साल तक गेहूं पूरी तरह सुरक्षित रखने का दावा किया गया था, लेकिन समय रहते गेहूं का उठाव नहीं हुआ और बैग भी जगह-जगह से फट गए. ऐसे में बोरियों में भरकर रखा गया गेहूं मौजूदा समय में 76000 क्विंटल से ज्यादा गेहूं पूरी तरह  बर्बाद हो गया.  साइलो केंद्र पर जो गेहूं रखा है उसकी तस्वीरें साफ तौर पर बयां कर रही हैं कि यह किस तरह से गरीबों के पेट पर सीधी सीधी लात है.

कहते हैं दूध का जला हुआ छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है, लेकिन यहां मामला बेहद उल्टा है. बता दें कि लापरवाही का यह नजारा 2019 में भी सामने आया था, जब इस कंपनी ने 4.80 करोड़ रुपए का गेहूं खरीदा और उसे भंडारण के लिए रखा. लेकिन यह गेहूं वहां सुरक्षित नहीं रखा जा सका और सड़ गया. यहां से सीख लेने की बजाय  कंपनी ने वही गलती दोबारा की और अब यह 76 हजार क्विंटल अनाज सड़कर बर्बाद हो गया.

इसको लेकर मध्य प्रदेश वेयरहाउस कॉरपोरेशन संभाग ग्वालियर के अधिकारी संदेश कुमार पुरोहित का कहना है कि शिवपुरी स्थित साइलो गेहूं भंडारण केंद्र पर सड़े हुए गेहूं के बर्बाद होने के बाद नुकसान की भरपाई करने के लिए कंपनी को नोटिस भेजा जा रहा है. उन्होंने कहा कि  नुकसान की सारी भरपाई कंपनी की ओर से की जाएगी .वहीं, नाम ना छापने की शर्त पर कंपनी से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि मामला कंपनी की लापरवाही का नहीं बल्कि सरकार की अनदेखी का है.  साल 2020 में 41000  मीट्रिक टन गेहूं खरीद कर सायलो बैग में रखा गया था. जिसमें 2 साल में गेहूं का उठाव होना था, लेकिन ढाई साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी अक्टूबर 22 से गेहूं का उठाव शुरू कराया गया. इसके पीछे उन्होंने साफ तौर पर यह बताया कि निर्णय केंद्र व प्रदेश सरकार के स्तर से होना है इसलिए इसमें अनदेखी और लापरवाही हुई है.

सोर्स : NDTV इंडिया” 


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