मनुष्य जीवन मे वृक्षो की क्या महत्त्व है : जयंती नायक
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मनुष्य जीवन मे वृक्षो की क्या महत्त्व है : जयंती नायक

मनुष्य जीवन मे वृक्षो की क्या महत्त्व है : जयंती  नायक रायपुर:– श्री रावतपुरा सरकार यूनिवर्सिटी रायपुर में  अध्यनरत बी.ए. एल.एल.बी. प्रथम वर्ष छात्रा (BA.L.LB. ¹St Year student) जयंती(निकिता) नायक ने हमारे जीवन मे वृक्षो की भुमिका बताते हुए अपने विचार व्यक्त किये।  हमारे जीवन मे वृक्षो की महत्व !    पेड़ हमारे जीवन में भोजन और पानी […]

बाबा साहब,भारतीय संविधान और मौजूदा खतरे
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बाबा साहब,भारतीय संविधान और मौजूदा खतरे

संविधान सभा के लिए दो बार चुने गए थे बाबा साहब आजादी के लिए हुए समझौते और तिथि तय हो जाने के बीच ही संविधान सभा के लिए चुनाव हुए थे। जुलाई 1946 में करीब 10 लाख पर एक के हिसाब से एक सदस्य के साथ 292 सदस्य चुने गए। इनके अलावा 93 प्रतिनिधि रियासतों […]

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असत्याग्रही का इतिहास लेखन

बांग्लादेशी घुसपैठियों को खदेड़ बाहर करने के आक्रामक और विभाजनकारी एजेंडे के साथ बंगाल चुनाव लड़ने पहुंचे प्रधानमंत्री खुद बीच चुनाव में बांग्लादेश में घुसपैठ कर बैठे और मुजीब जैकेट्स बांटते-बांटते खुद ही खुद को मुजीबुर्रहमान से बड़ा नहीं, तो कम-से-कम उनका समकक्ष मुक्तियोद्धा बनने का करतब दिखाने पर आमादा-ए-फसाद होकर ऐसा दावा कर गए […]

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तीरथ कीर्तन उर्फ़ निकलना उधड़ी हाफपैंट से नये जीरो का

🔴 जिस समय देश और उसकी जनता अपने ताजे इतिहास की सबसे ज्यादा और सर्वआयामी मुश्किलों में हो, सरकार के क़दमों में इन संकटों की भरमार से बाहर निकलने की उम्मीद की किरण तक न दिखाई पड़ रही हो – ऐसे समय में इस तरह की विदूषकी को सिर्फ तीरथ कीर्तन मानना या किसी अज्ञानी […]

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उधर छाती पर सवार शेर-इधर जंगलराज में छुट्टा घूमता टाइगर

उधर जम्बूद्वीपे भारतखण्डे की जनता “शेर पालने की कीमत” चुकाने के मजे लेते हुए कराह रही है। इधर टाइगर अपने जिन्दा होने का शोर मचाते हुए मध्यप्रदेश के जंगल राज में शिकार करता छुट्टा घूम रहा है। शेर पालने वाला जुमला बढ़ती महँगाई, बेलगाम बेरोजगारी और सरकारी सम्पत्तियों की धुँआधार बिक्री, सौ दिन से ज्यादा […]

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जहँ- जहँ पाँव पड़े कारपोरेट के-तहँ तहँ खेती बँटाढार

सार रूप में कहानी यह है कि आधी रात में अलाने की भैंस बीमार पड़ी। बीमारी समझ ही नहीं आ रही थी। उन्हें किसी ने बताया कि ठीक यही बीमारी गाँव के फलाने की भैंस को भी हुयी थी। वे दौड़े-दौड़े उनके पास गए और वो दवा पूछकर आये, जो उन्होंने अपनी बीमार भैंस को […]

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अंतरिक्ष छूती आत्मरति

🔵 28 फरवरी को इसरो के प्रक्षेपण केंद्र से जो उपग्रह लांच किया गया है, उसमे नरेंद्र मोदी की तस्वीर भी भेजने का नमूना पेश करके इस बार तो प्रधानमंत्री की आत्ममुग्धता ने “आकाश ही सीमा है” के मुहावरे को भी पीछे छोड़ दिया। सारी सीमाओं को लांघ कर उसे सीधे अंतरिक्ष में पहुँचा दिया। […]

लिए पोषण संबंधी परिणामों में सुधार करने के लिए भारत सरकार का प्रमुख कार्यक्रम है।
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शि‍वराज सिंह के जागरण का कोई जवाब नहीं

मध्यप्रदेश के सीहोर जिले की बुधनी तहसील मुख्यालय से 24 किमी दूर ग्राम जैत में  एक मध्यमवर्गीय कृषक प्रेमसिंह चैहान के घर 5 मार्च 1959 को माता सुदंरबाई ने एक ओजस्वी बालक को जन्म दिया। जो बडा होकर शि‍वराज सिंह चैहान के नाम से सारे जगत में विख्यात हुआ। इसकी झलक शि‍वराज के बचपन में […]

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गोलवलीकरण से गोडसेकरण की ओर

पिछले सप्ताह भारत सरकार के संस्कृति मंत्री के गोलवलकर की महिमा का बखान करते हुए किये गए ट्वीट ने देश के राजनीतिक विमर्श को आधिकारिक रूप से एक नयी नीचाई तक पहुंचा दिया है। यह बखान इसलिए काबिले गौर है, क्योंकि यह मंत्री के पद पर बैठे किन्ही प्रह्लाद पटेल की निजी राय नहीं है […]

सहजानन्द सरस्वती-एक स्वामी- जिन्होंने किसान आंदोलन की दिशा-दशा बदल दी
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सहजानन्द सरस्वती-एक स्वामी- जिन्होंने किसान आंदोलन की दिशा-दशा बदल दी

इतिहास के सबसे विराट किसान आंदोलन ने इन दिनों पूरे देश को झंकृत करके रखा हुआ है। यह किसानों के अद्भुत जागरण और असाधारण जिजीविषा के उभार का समय है ; यह समय एक असामान्य सामाजिक मंथन का समय है, जिसने भारत के नागरिकों को सब कुछ नए तरीके से देखने और समझने और अपनी […]