जो व्यक्ति घर-घर जाकर वोटो की भीख मांग कर चुनाव जीतता है फिर नेता कहलाता है उसे सुरक्षा गार्ड क्यों रखना पड़ता है उसे किसका डर है जनता का या अपने कर्मों का | व्यंग के माध्यम से नेताओं की सुरक्षा क्यों यह बड़ा ही टेढ़ा-मेढ़ा प्रश्न है कि नेताओं की सुरक्षा क्यों कल ही घर-घर जाकर, पांव छूकर-पड़कर जनता को पटाकर ,खरीद कर चुनाव जीतता है तब जाकर नेता बनता है आदमी से नेता बने चार दिन ही नहीं हो पाते हैं और उसके साथ बंदूकदारी सिपाही चलने लगता है, जो जनता उसे चुनकर भेजती है उससे मिलते समय वही नेता साथ में बंदूक धारी सिपाही लेकर मिलता है नेता ऐसा कौन सा काम कर लेता है कि जनता से मिलते समय डर लगता है |
एक गांव की देहाती महिला ने पूछा की भाई साहब यह नेता कौन होता है ऐसे जानवर का नाम तो आज तक नहीं सुना तो मैंने समझाया कि जब एक आदमी हम लोगों के घर आकर वोटो की भीख मांगता है हम लोगों को आश्वासन देता है कि आपके सभी काम करवा देंगे और चुनाव जीतने के बाद दिखता तक नहीं है वही व्यक्ति नेता कहलाता है स्वाभाविक ही है जो बातें कभी पूरा करता ही नहीं है जनता खिसिया कर मारने ना लगे इसलिए हर छोटे- बड़े नेताओं को अपने साथ बंदूकधारी सिपाही यानी सिक्योरिटी गार्ड अपने साथ रखना पड़ता है ,आखिर बहुत सारे नेताओं का झुंड ही तो सरकार है| वैसे भाई साहब सुरक्षा मूल्यवान चीजों की की जाती है चाहे कितना ही नैतिक चरित्र और नैतिक स्तर में गिरावट आए प्रदेश की मूल्यवान चीजों में नेता भी आते हैं तभी तो गार्ड भी साथ में रखना पड़ता है. मेरे ख्याल से देश में जितने सैनिक सीमा की सुरक्षा में लगे होते हैं करीब इतने ही सैनिक नेताओं की सुरक्षा में लगे होते हैं सोच कर देखो पुलवामा कांड हो गया पर सभी नेताओं का ध्यान देश के अंदर ही था कि कौन नेता किसकी टांग खींच रहा है| ज्यादा से ज्यादा गार्ड नेताओं की सुरक्षा में थे अपनी सुरक्षा करवाने में लगे नेता देश की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दे पाए जब मैं एक नेता से पूछा कि क्या नेताओं के काम इतने खराब होते हैं की खुद की सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी गार्ड रखना पड़ता है तो पहले उन्होंने मुझे घर कर देखा फिर खींसे निपोरते हुए बोले पढ़े लिखे हो कबीर दास जी को जानते हो मैं नहीं कबीर नहीं कबीरपंथी को जरुर जानता हूं तो कहने लगे तुम नालायक ही रहोगे |कबीर दास जी का गए थे- कबिरा इह संसार में भांति भांत के लोग ईमानदार बचे थोड़े बेईमान ज्यादा लोग इसलिए सिक्योरिटी गार्ड रखना पड़ता है वैसे भी चुनाव बिहार पैटर्न पर होते जा रहे हैं | यानी कि पीट कर बूथ कैपचरिंग करके कर्मचारियों को कुएं में फेंक कर या पीठासीन अधिकारी का अपहरण कर बहुत सारे हथकंडे अपना कर एक आदमी नेता बन पाता नेता अपने क्षेत्र में चुनाव जीतने के बाद तुरंत अपनी पसंद के थानेदार को लाते हैं ताकि उनके सारे गैर कानूनी काम सुचारू रूप से चलते रहें इसलिए पुलिस प्रशासन भी ऐसे लोगों के ही इशारे पर चलने लगा है कायदे से पुलिस को निकम्मा तो नेताओं ने ही बना दिया है|
एक नेता के सही मायने में दो उद्देश्य होते हैं देशभक्ति और जनसेवा पुलिस के सिपाही के कंधे पर लिखा होता है देशभक्ति और दूसरे कंधे पर लिखा होता है जनसेवा दोनों का उद्देश्य एक ही है हो गई ना कहावत चरितार्थ चोर चोर मौसेरे भाई हम ज्यादा समझदार तो नहीं है पर इतना जरुर जानते हैं कि हमारे जितने जवान हैं. उनमें से ज्यादातर बड़े अफसर नेताओं और मंत्रियों की सुरक्षा में लगे रहत है अब ऐसी स्थिति में हम चिल्लाएं कि सरकार हमारी सुरक्षा नहीं कर रही है अरे पहले नेता खुद की सुरक्षा तो कर ले तब हमारी तरफ ध्यान देंगे बहुत सारे काम है, विचारों को देश की सुरक्षा प्रदेश की सुरक्षा खुद की सुरक्षा जहां से जीत कर आएं है उस क्षेत्र की सुरक्षा एक नेता के पास यदि सिक्योरिटी गार्ड नहीं है तो वह नेता ही नहीं समझा जाएगा | आजकल नेता का स्टेटस सिंबल ही तो गार्ड है ऐसी परिस्थितियों में आम नागरिक तथा देश की सुरक्षा का सवाल प्राथमिकता खो बैठता है यह परंपरा खत्म होना चाहिए आम आदमी की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए अन्यथा यह प्रश्न कभी हल नहीं हो पाएगा कि नेताओं की सुरक्षा जरूरी है या जनता की ?
PromptTimes: Kayum Khan (MP State Bureau Chief)
