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INS Arighat Submarine: समुद्र में अपनी दूसरी परमाणु पनडुब्बी उतारने को तैयार भारत, जानिए कैसे पड़ेगा दुश्मनों पर भारी

ByPrompt Times

Aug 12, 2024
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India’s INS Arighat Submarine: आईएनएस अरिघात अगले एक या दो महीने के भीतर चालू हो जाएगा। इसके बाद यह आईएनएस अरिहंत के साथ समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए तैनात हो जाएगा जो 2018 से पूरी तरह से काम कर रहा है।

Nuclear-Armed Submarine INS Arighat Submarine: दुश्मनों के मुकाबले के लिए भारत अपनी समुद्री ताकत लगातार बढ़ा रहा है। भारत जल्दी ही परमाणु मिसाइलों से लैस अपनी दूसरी परमाणु पनडुब्बी को हिंद महासागर में उतारने के लिए तैयार है। इसके अलावा दो और परमाणु पनडुब्बियों के निर्माण की परियोजना को भी अंतिम मंजूरी मिलनी बाकी है। 6000 टन के आईएनएस अरिघात (INS Arighat) का निर्माण विजग में जहाज निर्माण केंद्र (SBC) में किया गया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय तक किए गए परीक्षणों के बाद यह कमीशनिंग के लिए पूरी तरह से तैयार है। रिपोर्ट में कहा गया है कि परीक्षणों के दौरान सामने आए तकनीकी समस्याओं को पूरी तरह सुलझा लिया गया और इसमें जरूरी अपग्रेड कर दिए गए हैं।

आईएनएस अरिहंत के साथ तैनात होगा आईएनएस अरिघात

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एसएसबीएन (SSBN- परमाणु-चालित बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ परमाणु-संचालित पनडुब्बियों के लिए नौसैनिक भाषा) एक या दो महीने के भीतर चालू हो जाएगा। इसके बाद यह आईएनएस अरिहंत के साथ समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए तैनात हो जाएगा जो 2018 से पूरी तरह से काम कर रहा है। टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, टारपीडो, एंटी-शिप और जमीन पर हमला करने वाली मिसाइलों से लैस दो परमाणु-संचालित पनडुब्बियों के स्वदेशी निर्माण के लिए 40,000 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। इस परियोजना को अंतिम मंजूरी के लिए पीएम की अगुवाई वाली सुरक्षा पर कैबिनेट समिति के समक्ष रखा गया है।
शुरुआत में एसबीसी में ‘प्रोजेक्ट-77’ के तहत छह ऐसी 6,000 टन की ‘हंटर-किलर’ पनडुब्बियों को तैयार करने का लक्ष्य था। बाद में इसे घटाकर तीन कर दिया गया और फिर आखिर में दो पनडुब्बियां बनाना तय किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले दो एसएसएन को बनने में कम से कम एक दशक लगेगा और यह लगभग 95% स्वदेशी होगा।

चीन और पाकिस्तान के खतरों से निपटने की तैयारी

चीन और पाकिस्तान के खतरों से निपटने के लिए भारत को कम से कम 18 डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों, चार एसएसबीएन (SSBN) और छह एसएसएन (SSN) की जरूरत है। भारत के पास फिलहाल आईएनएस अरिहंत में केवल एक एसएसबीएन है। चीन के पास पहले से ही 60 पनडुब्बियां हैं और वह लगातार इसे बढ़ा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके बेड़े में छह जिन-क्लास एसएसबीएन (Jin-class SSBN) शामिल हैं, जो जेएल-3 मिसाइलों से लैस हैं, जिनकी मारक क्षमता 10,000 किमी है।

समुद्र में भी बढ़ेगी भारत की ताकत

समुद्र से परमाणु हमला करने की क्षमता की तुलना में जमीन और हवा से भारत की परमाणु क्षमताएं अपेक्षाकृत अधिक मजबूत हैं। आईएनएस अरिघात के बाद समुद्र में भी भारत की ताकत बढे़गी। आईएनएस अरिघात 750 किलोमीटर रेंज वाली के-15 मिसाइलों से लैस होगा, लेकिन आईएनएस अरिहंत से अधिक भार ले जाने में सक्षम होगा। 3,500 किलोमीटर की रेंज की K-4 मिसाइलों की क्षमता वाला 7,000 टन का INS अरिदमन(INS Aridhaman)अगले साल चालू किया गया है और यह तीसरा एसएसबीएन (SSBN) है।

K-4 मिसाइलें से होगा लैस

चौथा एसएसबीएन और अधिक K-4 मिसाइलें ले जाने में सक्षम होगा और इसका निर्माण 90,000 करोड़ रुपये की उन्नत प्रौद्योगिकी पोत (ATV) परियोजना के तहत हो रहा है जिसे दशकों पहले लॉन्च किया गया था। टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार और अधिक शक्तिशाली 190 मेगावाट रिएक्टरों के साथ 13,500 टन के एसएसबीएन बनाने की भी योजना है जो और अधिक शक्तिशाली होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत साल 2019 के 3 अरब डॉलर के सौदे के तहत 2026 में रूस से पट्टे पर एक एडवांस अकुला-क्लास एसएसएन (Akula-class SSN ) भी खरीदेगा। बड़े एसएसबीएन भारत की सुर7ा क्षमता को और मजबूत करेंगे और किसी भी दुश्मन देश द्वारा पहले हमले की स्थिति में पुरजोर जवाब देंगे।
SOURCE – TIMES NOW NAVBHARAT

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