कर्नाटक के गृह मंत्री ने दावा किया कि भाजपा भी जब कर्नाटक और अन्य राज्यों की सत्ता में थी तब मामले वापस लिए थे। उन्होंने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) के खिलाफ भी मामले दर्ज थे। उन्होंने इन मामलों को मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए वापस लिया। कई मामले वापस लिए गए।’’
कर्नाटक के गृहमंत्री जी. परमेश्वर ने 2022 में हुबली में हुए दंगे के आरोपियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने का बचाव किया है। साथ ही इस फैसले को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी जिक्र किया। परमेश्वर ने यह अजीब बयान देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी खुद पर दर्ज मुकदमों को वापस लिया था।
गौरतलब है कि उत्तरी कर्नाटक के हुबली में 16 अप्रैल 2022 को दंगे के दौरान पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी हुई थी। इस मामले में भीड़ में शामिल लोगों को आरोपी बनाया गया था। हालांकि, कर्नाटक सरकार ने अब आरोपियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने शुरू कर दिए हैं। सिद्धारमैया सरकार के इस फैसले के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) यहां के फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन कर रही है। इस बारे में सोमवार को जब गृह मंत्री परमेश्वर से सवाल किया गया तो उन्होंने सरकार के कदम का बचाव किया
सूत्रों के मुताबिक, परमेश्वर को अंजुमन-ए-इस्लाम की तरफ से अर्जी मिली थी, जिसके बाद गुरुवार को मंत्रिमंडल ने कुल 43 मामलों को वापस लेने का फैसला किया जिनमें एक मामला हुबली का भी है। परमेश्वर ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘मामलों को वापस लेने के प्रस्ताव को मंजूरी के बाद अदालत को फैसले की जानकारी दी गई है। अगर अदालत प्रस्ताव को स्वीकार कर लेती है तो मामले वापस हो जाएंगे। अगर ऐसा नहीं होता है तो मामले वापस नहीं होंगे। हम सतर्कता से प्रक्रिया का पालन करेंगे। हम मामले केवल इसलिए वापस नहीं लेंगे, क्योंकि किसी ने ऐसा करने के लिये कहा है।’’
मुकदमों का जिक्र कर भाजपा को घेरा
कर्नाटक के गृह मंत्री ने दावा किया कि भाजपा भी जब कर्नाटक और अन्य राज्यों की सत्ता में थी तब मामले वापस लिए थे। उन्होंने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) के खिलाफ भी मामले दर्ज थे। उन्होंने इन मामलों को मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए वापस लिया। कई मामले वापस लिए गए।’’
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘जब व्यवस्था ऐसी है तो आप किस पर आरोप लगा रहे हैं। हमने व्यवस्था के तहत ही यह फैसला किया है।’’ उन्होंने कहा कि करीब 60 मामलों को वापस लेने के प्रस्ताव थे, लेकिन सरकार ने 43 मामलों को वापस लेने की मंजूरी दी। परमेश्वर से सफाई देते हुए कहा, ‘‘क्या वापस लिए गए सभी मामले अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े हुए हैं । ये सभी मामले किसानों, छात्रों और आम नागरिकों के खिलाफ दर्ज थे, जिन्होंने विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। अगर सभी 43 मामले अल्पसंख्यकों से जुड़े होते तो मैं उनसे (भाजपा से) सहमत होता। हम ऐसा नहीं करते। हम सभी को एक समान देखते हैं।’’
परमेश्वर ने 2020 में डीजे हल्ली और केजी हल्ली में हुए दंगे से जुड़े मामलों को वापस लेने के प्रस्ताव पर कहा कि सरकार उनकी समीक्षा करेगी और तय प्रक्रिया के तहत फैसला करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘मैं अकेला फैसला करने वाला नहीं हूं। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री अकेले फैसला नहीं कर सकते। इसके बीच कई लोगों का दिमाग होता है।’’
भाजपा नेताओं ने कांग्रेस सरकार को घेरा
फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन कर रहे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई.विजयेंद्र , विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर.अशोक, पूर्व उप मुख्यमंत्री सी.एन.अश्वथ नारायण और अन्य पार्टी नेताओं ने सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए इसे तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार दंगे और हिंसा के आरोपों का सामना कर रहे लोगों के मुकदमे वापस ले रही है।
विजयेंद्र ने कहा, ‘‘हत्या की कोशिश और दंगे को भड़काना मामूली अपराध नहीं है फिर भी कांग्रेस न्याय के बजाय वोट बैंक की राजनीति को प्राथमिकता दे रही है।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि गलत काम करने वालों को प्रोत्साहित कर कांग्रेस सरकार असामाजिक तत्वों को बढ़ावा दे रही है और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डाल रही है।
SOURCE – PROMPT TIMES
