30 अप्रैल 2022 | ग्रहों का ऐसा शुभ संयोग करीब 50 साल बाद बन रहा है। जिसमें दो ग्रह उच्च राशि में और दो प्रमुख ग्रहस्वराशिमेंहोंगे।
Akshaya Tritiya 2022: हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया को बहुत ही शुभ तिथि माना जाता है। यह एक अबूझ मुहूर्त है जिसमें कोई भी शुभ कार्य बिना मुहूर्त देखे किया जा सकता है। अक्षय तृतीया हर वर्ष वैशाख के महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस साल यह 3 मई को मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि इस बार अक्षय तृतीया मंगल रोहिणी नक्षत्र के शोभन योग में मनाई जाएगी। ग्रहों का ऐसा शुभ संयोग करीब 50 साल बाद बन रहा है। जिसमें दो ग्रह उच्च राशि में और दो प्रमुख ग्रह स्वराशि में स्थित होंगे। इस दिन चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ और शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में रहेंगे। वहीं इस दिन सूर्य भी अपनी उच्च राशि में स्थित रहेंगे। दूसरी ओर शनि स्वराशि कुंभ और बृहस्पति स्वराशि मीन में विराजमान रहेंगे। अक्षय तृतीया पर ग्रहों की ऐसी स्थिति में होना महालाभ की प्राप्ति के संयोग हैं।
अक्षय तृतीया पर करें दान-पुण्य और पूजा पाठ :
बालाजी धाम काली माता मंदिर के ज्योतिषाचार्य डा. सतीश सोनी के अनुसार अक्षय का अर्थ होता है जिसका कभी भी क्षय न हो यानी कभी नाश न हो। इस दिन किया गया शुभ कार्य, दान-पुण्य, स्नान, पूजा और तप करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। इस दिन सोने के आभूषण खरीदना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन सोना खरीदने से माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। अक्षय तृतीया को शादी, गृह-प्रवेश, कपड़े और जेवर की खरीददारी सहित अन्य शुभ कार्यो कीशुरुआत कर सकते हैं।
अक्षय तृतीया पर दुर्लंभ ग्रह संयोग व 3 राजयोग
अक्षय तृतीया मंगलवार को है इस दिन रोहिणी नक्षत्र रहेगा। इस संयोग के कारण दुर्लभ मंगल रोहिणी योग में शोभन योग बन रहा है। अक्षय तृतीया रोहिणी नक्षत्र, शोभन योग और वृषभ राशि के चंद्रमा के साथ आ रही है। साथ ही शुक्र के अपनी उच्च राशि में होने से मालव्य राजयोग, गुरु के मीन राशि में होने से हंस राजयोग और शनि के अपने घर में विद्यमान होने से शश राजयोग बन रहा है।
अक्षय तृतीया तिथि:
तृतीया तिथि 03 मई मंगलवार को सुबह 05:18 से शुरू होगी जो 04 मई बुधवार सुबह 07:32 पर समाप्त होगी।
अक्षय तृतीया पूजन विधि:
अक्षय तृतीया के दिन व्रत रखने की परंपरा है। अगर आपने व्रत रखा है तो सूर्योदय से पहले स्नान कर लें। इसके बाद पीले वस्त्र धारण करें। अपने घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा को गंगाजल से शुद्ध करें। इसके बाद उन्हें पीले फूल, तुलसी और पीले फूलों की माला अर्पित करें। अब दीप और धूप-अगरबत्ती जलाकर पीले आसन पर बैठ जाएं और विष्णु सहस्त्रनाम या विष्णु चालीसा का पाठ करें। पाठ के बाद आखिर में भगवान विष्णु की आरती करें।
अक्षय तृतीया के चलते बाजारों में आई रोनक:
कोरोनाकाल के कारण 2020 व 2021 में अक्षय तृतीया पर बड़े आयोजन नहीं हो सके थे। पर इस बार कोरोना से मिली राहत के चलते शहर में सामूहिक सहित अन्य विवाह आयोजन होंगे। जिसके लिए बाजारों में खरीदी करने शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के लोग पहुंच रहे हैं। वहीं ईंद को लेकर भी बाजार में खुब खरीदारी हो रही है। तेज धूप होने के बाद भी लोग दिन भर खरीदारी कर रहे हैं। जिससे बाजारों में सुबह से शाम तक रोनक छाई हुई है।
Source :-“नईदुनिया”
