• June 5, 2026 8:59 pm

अंबिकापुर में अतिक्रमण के विरूद्ध शुरू हुआ अभियान

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16जुलाई 2022 अंबिकापुर शहर में शासकीय जमीन पर अतिक्रमण के विरुद्ध प्रशासन ने अब कार्रवाई शुरू कर दी है, पिछले दिनों भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने इसकी शिकायत लिखित रूप से की थी। उन्होंने फोटोग्राफ्स के माध्यम से उन क्षेत्रों का भी जिक्र किया था जहां शासकीय जमीन पर अतिक्रमण धड़ल्ले से किया जा रहा है। कलेक्टर ने एसडीएम अंबिकापुर के नेतृत्व में एक टीम का गठन भी कर दिया है। जिसमें तहसीलदार और नायब तहसीलदार भी शामिल हैं।इस टीम के द्वारा शहर की शासकीय भूमि पर एक वर्ष के भीतर किए गए अतिक्रमण का सर्वे किया जा रहा है। सर्वे के बाद शहर के बाहरी और आंतरिक इलाकों में हुए अतिक्रमण का सर्वे कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज की जाएगी। इस बीच नगर के मठपारा में तहसीलदार भूषण मंडावी के नेतृत्व में पहुंचे नायब तहसीलदार किशोर वर्मा की टीम ने शासकीय भूमि पर बने दो मकानों को एक्सीवेटर के जरिए हटवा दिया। इस टीम के साथ नगर निगम का उड़नदस्ता दल भी मौजूद रहा। शहर में अतिक्रमण के सर्वे में नगर निगम के उड़नदस्ता दल को भी शामिल किया गया है।

गौरतलब है कि नगर निगम क्षेत्र में अचानक अतिक्रमण की होड़ मची है। शासकीय खाली भूमि पर अतिक्रमण कर मकान ,दुकान बनाने के साथ शहर के आंतरिक इलाकों में भी कहीं भी ठेले गुमटियां रखकर दुकानदारी शुरू कर दी जा रही है।खासकर नगर के 11 किलोमीटर रिंग रोड में फुटपाथ के ऊपर कब्जा जमा लिया गया है। शहर में शासकीय खुली भूमि पर हो रहे अतिक्रमण की शिकायत भाजपा पार्षद आलोक दुबे के ने हाल ही में कलेक्टर कुंदन कुमार से की थी। लगभग 23 स्थलों का फोटोग्राफ भी उपलब्ध कराया था। भाजपा पार्षद की शिकायत के बाद कलेक्टर ने एसडीएम को अतिक्रमण की जांच करने और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर के निर्देश के बाद अब कार्रवाई शुरू हो गई है। बताया जा रहा है शहर के मठपारा, गंगापुर, बिशुनपुर,गांधीनगर, गोधनपुर, बौरीपारा,घुटरापारा, खैरबार सीमा, नवागढ़ क्षेत्र में सर्वाधिक अतिक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। बाहर से आए लोगों को शासकीय भूमि को औने पौने दाम पर बेचने का खेल भी चल रहा है। पहले भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होती रही है पर एक दो अतिक्रमण हटाने के बाद व देखा देखी कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग की टीम हमेशा वापस लौटी है। लोग घर, मकान बनाकर रहने लगते हैं तब कार्रवाई की जाती है जिससे अतिक्रमण कर घर मकान बनाकर रहने वाले लोगों के सामने संकट उत्पन्ना हो जाता है। इसमें प्रशासन की लापरवाही भी उजागर होती है। शहर में अतिक्रमण की शुरुआत होते समय ही कार्रवाई नहीं होती। विडंबना तो यह है कि लोग इसकी सूचना मौके पर ही अधिकारियों को देते हैं पर कोई पहुंच कर अतिक्रमण को रोकने की पहल नहीं करता। इसी का परिणाम है कि शहर में बेतहाशा शासकीय भूमि पर अतिक्रमण हो रहा है।

Source;-“नईदुनिया”     


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