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बिजली बोर्ड का दफ्तर बंद, दो दिन के काम के लिए लग रहा महीना

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03 फ़रवरी 2023 | सुक्खू सरकार के आते ही कार्यालयों को बंद करने की मुहिम कई जगह लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। कार्यालयों को बंद करने का कारण बताया गया था कि चुनावी दौर में कार्यालय बिना बजट, स्टाफ व भवन के सियासी रोटियां सेंकने के लिए खोले हैं। लेकिन नेरचौक के रत्ती में खोले बिजली बोर्ड के एक्सईएन कार्यालय की ग्राउंड रिपोर्ट की गई तो यहां कुछ और ही तस्वीर नजर आई। यहां कार्यालय भी था और स्टाफ भी। इस कार्यालय में लोगों के काम भी हो रहे थे। इस कार्यालय में चार माह तक पूरी तरह से काम हुआ। कार्यालय खुलने के बाद बल्ह, सुंदरनगर और नाचन विधानसभा क्षेत्रों में नए ट्रांसफार्मर, उपभोक्ताओं की शिकायतों का निवाराण, बिजली की निर्बाध सेवाओं पर काम शुरू हुआ था। अब रिवालसर से बग्गी तक के लोगों को छोटे-मोटे काम करवाने के लिए 20 से 30 किलोमीटर का सफर करना पड़ रहा है। बग्गी की जनता को गोहर जाना पड़ रहा है। नेरचौक के लोग अब सुंदरनगर जा रहे हैं और रिवालसर के लोग फिर से मंड के चक्कर काटने के लिए मजबूर हैं। लोग कह रहे हैं कि अब दो दिन के काम को महीना लग रहा है।

27 अगस्त को कार्यालय खुला, 12 दिसंबर को बंद 
रत्ती में बिजली बोर्ड के भवन में ही यह कार्यालय खोला गया था। इस पर तत्कालीन ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी के नाम की उद्घाटन पट्टिका है। इसमें लिखा है कि कार्यालय 27 अगस्त, 2022 को खुला है और 12 दिसंबर 2022 को इसे बंद कर दिया गया। अब यह कार्यालय पूरी तरह बंद है। इसके गेट पर ताला लटका है। जहां से यहां के लिए स्टाफ भर्ती किया था वहीं उसे वापस भेज दिया है। अभी भी दूर-दूर से कुछ लोग कार्यालय आते हैं। जब उन्हें ताला लटकता दिखता है तो वे पूछते हैं, जिस पर लोग उन्हें बताते हैं कि यह कार्यालय बंद हो गया है। लोगों से पता चला कि पहले इस कार्यालय में बिजली बोर्ड के ही एसडीओ का दफ्तर था, जिसे अब नेरचौक शिफ्ट कर दिया है। यह कार्यालय पूरी तरह से खाली है।

ये काम कर रहा था एक्सईएन कार्यालय
एक्सईएन कार्यालय स्टाफ ने कई कार्यों की रूपरेखा तैयार की थी। इसमें कहां-कहां लाइनेें बदलनी हैं, खंभे कहां-कहां लगाना जरूरी है। बिजली का लोड को किस तरह से मैनेज करना है और इस पर और क्या क्या किया जा सकता है इन सभी कार्यों पर कार्यालय की ओर से खाका तैयार किया गया था। बोर्ड के अधिकारियों ने तो कुछ योजनाओं के टेंडर भी लगा दिए थे, मगर जैसे ही डि नोटिफाइड की अधिसूचना जारी हुई सभी काम धरे के धरे रह गए।

कार्यालय बंद होने के कारण अब छोटे-छोटे कार्यों के लिए सुंदरनगर जाना पड़ रहा है। जो काम एक या दो दिन में होते थे, अब महीने बाद भी नहीं हो रहे हैं।
– करुण वर्मा, निवासी कंसा चौक

एक्सईएन कार्यालय बल्ह की जनता की वर्षों पुरानी मांग थी। कई सालों बाद मांग पूरी हो गई थी, मगर अब यह बंद हो जाने से रोजाना दिक्कतें हो रहीं हैं।
 – रणवीर सपहिया, निवासी पैड़ी

सरकार का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है। नेरचौक के लोगों को रोजाना बिजली के लोड कम होने की समस्या ने जकड़ रखा है। ऐसे में कार्यालय बहुत जरूरी था।
  -नेत्र सिंह नायक, नेरचौक।

विद्युत बोर्ड का मंडल कार्यालय आनन-फानन में खोला था। इसमें बजट का प्रावधान नहीं था। जल्द ही मुख्यमंत्री बजट के साथ विद्युत डिवीजन को यहां पर खोलेंगे।

– साहिल ठाकुर, बल्ह युकां के अध्यक्ष

सुख की नहीं, दुख की सरकार : गांधी
यह सुख की नहीं दुख की सरकार साबित हो रही है। कार्यालय बंद करने का विरोध किया जा रहा है। जब तक यह कार्यालय नोटिफाइड नहीं कर दिया जाता, तब तक विरोध जारी रहेगा। – इंद्र सिंह गांधी, विधायक 

सोर्स :-“अमर उजाला ”                          


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