
नैनीताल के परिताल के बारे में जानना बहुत दिलचस्प है. यह जगह खास तौर पर पूर्णिमा के दिन परियों के आगमन के लिए प्रसिद्ध है. इस लेख में हम परितालकी पौराणिक कथाओं और इसके महत्व के बारे में विस्तार से जानेंगे. परितालन केवल एक सुंदर जगह है, बल्कि यह हमें पुरानी कहानियों और मान्यताओं से भी जोड़ती है
परिताल क्या है?
नैनीताल, उत्तराखंड का एक सुंदर शहर है, जहां एक खास जगह है जिसे ‘पारिताल’ कहते हैं. यह एक ऐसा स्थान है जहां पर पुरानी कहानियों के अनुसार, विशेष दिन पर खास घटनाएं होती हैं. परिताल नैनीताल के एक हिस्से में स्थित है, और यहाँ पर एक विशेष समय पर बहुत कुछ खास होता है.
परितालकी पौराणिक कथा
परिताल की एक बहुत ही पुरानी कहानी है. कहा जाता है कि हर साल, पूर्णिमा के दिन, यानी चाँद की पूरी रात के समय, वहाँ पर परियां आती हैं. परियां, जो बहुत सुंदर और खास होती हैं, वे देवताओं की मदद करती हैं. लोग मानते हैं कि इस दिन वे परिताल में स्नान करने आती हैं. यह मान्यता बहुत पुरानी है और लोगों में इसे लेकर बहुत विश्वास है.

परिताल कैसे पहुंचें?
परिताल तक पहुँचने के लिए आपको नैनीताल के मुख्य बाजार से थोड़ी दूर जाना पड़ता है. यह जगह नैनीताल के केंद्र से दूर नहीं है, लेकिन यहाँ पहुँचने के लिए आपको कुछ रास्ते पार करने होंगे. अगर आप नैनीताल में हैं, तो आपको परिताल के संकेत मिल सकते हैं, जो आपको सही दिशा में ले जाएंगे.
परिताल का महत्व
परिताल का महत्व बहुत ज्यादा है. इस दिन लोग परितालमें स्नान करने के लिए आते हैं क्योंकि उन्हें विश्वास है कि इस दिन परियां यहाँ आती हैं. यह दिन न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक नजरिए से भीजरूरी जाना जाता है. लोग इस दिन इंतजार करते हैं और परितालमें स्नान करने का बहुत महत्व मानते हैं.
