21 अप्रैल 2022 | देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या एक बार फिर बढ़ रही है और इस बार बच्चे भी इसकी चपेट में हैं। दिल्ली कोरोना ऐप के अनुसार, कोरोना की वजह से अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों में 27% बच्चे हैं। इनमें से कई बच्चे कोमॉर्बिडिटीज वाले हैं यानी वे पहले से ही डायबिटीज, हाइपरटेंशन और दूसरी बीमारियों से पीड़ित हैं। पीडियाट्रिक्स (बाल रोग विशेषज्ञ) का मानना है कि कोरोना को हल्के में लेना रिस्की हो सकता है। खासकर कोमॉर्बिडिटीज वाले बच्चों के लिए।
पहले एक नजर डालते हैं इन आंकड़ों पर फिर आगे की बात करते हैं
66.11% बच्चे हैं डायबिटीज के मरीज
इंडियन जे एंडॉक्रिनल मेटाब, 2015 में पब्लिश रिसर्च के अनुसार, भारत में टाइप-1 डायबिटीज मेलिटस (T1DM) वाले करीब 97,700 बच्चे हैं। वहीं टाइप-2 डायबिटीज वाले बच्चों की संख्या भी बढ़ी है। पैन इंडिया 2015 के सर्वे के अनुसार, 66.11% बच्चों के शरीर में ‘शुगर का असामान्य लेवल’ था।
10 में से 2 बच्चों को है हाइपरटेंशन
2019 के एक सर्वे के अनुसार, हरियाणा, गोवा, गुजरात और मणिपुर में हर 10 में से दो स्कूली बच्चे हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं। साल 2013 में एम्स की रिसर्च में पाया गया कि दिल्ली के स्कूलों में 3-4% बच्चे हाइपरटेंशन के शिकार हैं।
50 हजार से ज्यादा बच्चों को कैंसर
इंडियन कैंसर सोसाइटी के अनुसार, भारत में 1 से 19 साल तक के 50 हजार से ज्यादा बच्चों को कैंसर है। वहीं कैंसर से डायग्नोस किए गए 40 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार हैं।
इन आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए भारतीय पीडियाट्रिक यानी बाल रोग विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बच्चों में कोरोना को हल्के में नहीं लिया जा सकता, हमें वैक्सीनेशन अभियान को तेज करने की जरूरत है।
क्या बच्चों का संक्रमित होना खतरनाक साबित हो सकता है?
अपोलो अस्पताल की पीडियाट्रिक डॉक्टर दीपा भटनागर कहती हैं कि हम वायरस को हल्के में नहीं ले सकते हैं। बच्चों में संक्रमण का गंभीर रूप देखा जा सकता है। इसलिए हमें सतर्क रहना होगा। कोमॉर्बिडिटी यानी डायबिटीज, मोटापा और दिल से संबंधित डिजीज से पीड़ित बच्चों को कोरोना का गंभीर खतरा हो सकता है। हालांकि तीसरी लहर के दौरान कोरोना से होने वाली मौतों में सबसे ज्यादा वो मरीज शामिल थे, जिन्हें पहले से ही डायबिटीज, मोटापा, बीपी या दिल से संबंधित कोई बीमारी थी।
एक नजर बच्चों के वैक्सीनेशन के डेटा पर भी डाल लीजिए-
बच्चों में संक्रमण बढ़ने की एक वजह धीमे वैक्सीनेशन को भी बताया जा रहा है। लोगों का मानना है कि अभी तक बहुत से बच्चों को वैक्सीन नहीं लगी है, इसलिए वो संक्रमित हो रहे हैं।
CoWIN डैशबोर्ड के अनुसार…
- 12-14 साल के बच्चों को 2.41 करोड़ से ज्यादा कोर्बेवैक्स की खुराक दी जा चुकी है।
- 15-18 साल के बच्चों को 9.81 करोड़ से ज्यादा कोवैक्सिन की खुराक दी जा चुकी है।
बच्चों में फैलने वाले कोरोना संक्रमण को लेकर एक्सपर्ट्स की क्या राय है, ये भी जान लीजिए-
एम्स डायरेक्टर, डॉ.रणदीप गुलेरिया कहते हैं-
- कोरोना को लेकर बच्चों के माता-पिता को घबराने की जरूरत नहीं है।
- पिछली लहर में देखा गया है कि संक्रमित बच्चों में हल्के लक्षण होते हैं।
- बच्चे कोरोना संक्रमण से जल्दी रिकवर हो जाते हैं।
- वैक्सीन के लिए एलिजिबल बच्चे वैक्सीन जरूर लगवाएं।
महामारी विशेषज्ञ डॉ. चंद्रकांत लहरिया के मुताबिक-
- बड़ों की तरह बच्चों में भी कोरोना संक्रमित होने का खतरा है।
- बच्चों में या तो हल्के लक्षण होते हैं या कोई लक्षण नहीं होते हैं।
ICMR एडीजी, समीरन पांडा ने बताया-
- 1-17 साल के बच्चे भी बड़ों की तरह कोरोना संक्रमित हो सकते हैं।
- बच्चों में गंभीर बीमारी या मौत होने का खतरा कम होता है।
- बच्चों को स्कूलों में अपना खाना शेयर नहीं करना चाहिए।
- स्कूलों में मास्क और कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए।
यह तो हुई उन बच्चों की बात जिन्हें पहले से डायबिटीज, थायराइड और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां हैं। अब बात करते हैं उन बच्चों की जिन्हें कोई बीमारी नहीं पर कोरोना काल में ऐसी किसी बीमारी का खतरा न हो इसलिए पेरेंट्स को समय-समय पर बच्चों की जांच करवानी चाहिए।
- पेरेंट्स को चाहिए कि बच्चे के ब्लड में शुगर लेवल बढ़ने की समय-समय पर जांच करें।
- थायराइड के लक्षण जन्म से दिखने लगते हैं, अगर घर में किसी को थायराइड है तो बच्चे की जांच भी रेगुलर करवाइए।
- अगर एलर्जी की बीमारी बच्चे को है और वह अस्थमा में न बदले, इसके लिए बचाव करते रहें।
Source;- ‘’दैनिक भास्कर’
