अक्टूबर 26 2023 ! उधर द्वितीय विश्व युद्ध में लोग गोली से मारे जा रहे थे, ठीक उसी समय भारत एक बड़े हिस्से में लोग सड़कों पर भूख से तड़पकर जान दे रहे थे. गरीबों के पास खाने को अनाज नहीं था और अंग्रेजी शासक बंगाल से अनाज का निर्यात कर रहे थे. भारत में हो रही भूख से मौतों की जानकारी जब दुनिया को हुई तो अमेरिका, कनाडा समेत कई अन्य देशों ने अनाज भेजने की पेशकश की जिसे ब्रिटिश हुकूमत ने लेने से इनकार कर दिया.
भूख से मरने वालों का दर्द साझा करती किसी भी रिपोर्ट पर तत्कालीन पीएम विंस्टन चर्चिल कोई फैसला तो नहीं लेते, अलबत्ता भारत और भारतीयों पर कोई न कोई फब्ती जरूर कस देते. नतीजे में 30 लाख से ज्यादा मौतें केवल और केवल भूख से हो गईं.
इन अकाल मौतों के लिए तब के पीएम विंस्टन चर्चिल को जिम्मेदार माना गया. वे तब भी पीएम थे और बाद में दोबारा 26 अक्टूबर 1951 को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने. चर्चिल को ब्रिटेन में एक हीरो के रूप में देखा जाता है. उनके अनेक फैसलों से उनका देश आज भी गौरवान्वित होता आ रहा है. पर भारत जब भी उन्हें देखता है तो सिर्फ और सिर्फ खलनायक के रूप में देखता आया है. आरोप है कि उनकी नीतियों, फैसलों की वजह से ही साल 1943-44 में भारत के बंगाल इलाके में अकाल पड़ा.
राजनेता, सैन्य अफसर और नस्लवादी
नोबेल पुरस्कार विजेता चर्चिल में कई चेहरे छिपे थे. वे कुशल राजनेता थे. सैन्य अफसर थे. लेखक-साहित्यकार थे. कुशल प्रशासक थे. पर, ठीक उसी समय वे नस्लवादी थे. किताबें भरी पड़ी हैं कि उन्होंने भारत और भारतीयों के बारे में कभी अच्छा नहीं सोचा. भारत को लेकर लिए जा रहे उनके कई फैसलों से ब्रिटिश अफसर भी सहमत नहीं होते थे लेकिन वे व्यवस्था के हाथों मजबूर थे.
भूखमरी के हालात कैसे पैदा हुए
आंकड़े गवाही देते हैं कि साल 1943 में जब लोग भूख से तड़प रहे थे तब भी देश में पर्याप्त चावल का उत्पादन हुआ था. साल 1938 से 1943 तक के आंकड़े बताते हैं कि उस समय चावल का उत्पादन सात से नौ मिलियन टन के आसपास हर साल हुआ था. ऐसे में भुखमरी मानव निर्मित थी, यह सहज स्थापित हो जाता है. विश्व युद्ध चल रहा था तो अंग्रेजों ने सैनिकों के लिए बड़े पैमाने पर अनाज निर्यात कर दिया. भारत में तैनात अंग्रेज अफसरों ने बड़े पैमाने पर अपने जवानों के लिए जमाखोरी कर ली. नतीजा अनाज की कमी हो गई. मौसम ने तो दगा दिया ही था.
पीएम के रूप में उस समय चर्चिल की भूमिका इसलिए खलनायक की कही गई क्योंकि उन्होंने मौतों को रोकने की कोई कोशिश नहीं की. अमेरिका, कनाडा ने अनाज आपूर्ति की पेशकश की तो ब्रिटिश पीएम ने कोई फैसला ही नहीं लिया. आस्ट्रेलिया से मदद को चले जहाज को डायवर्ट कर यूरोप बुला लिया. नतीजे में आज के बांग्लादेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा में 30 लाख से ज्यादा लोग असमय काल के गाल में समा गए थे.
सोर्स :- ” TV9 भारतवर्ष “
