• June 4, 2026 9:48 pm

10 साल जेल में रहने के बाद बरी, जेल से निकलने के 7 महीने में मौत, डीयू के पूर्व प्रफेसर साईबाबा ने किया देहदान

ByPrompt Times

Oct 14, 2024
Share More

Saibaba Death : दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जी.एन. साईबाबा की इच्छा अनुसार उनका पार्थिव शरीर गांधी मेडिकल कॉलेज को दान किया जाएगा। उन्होंने ऑपरेशन के बाद की समस्याओं के चलते सरकारी अस्पताल में 58 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। उनकी आंखें भी दान कर दी गई हैं।

 

हैदराबाद : दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जी.एन. साईबाबा के परिवार के सदस्यों ने रविवार को कहा कि साईबाबा की इच्छा के अनुसार उनका पार्थिव शरीर यहां के सरकारी मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया जाएगा। परिजनों ने बताया कि पार्थिव शरीर 14 अक्टूबर को गांधी मेडिकल कॉलेज को सौंप दिया जाएगा। माओवादियों से कथित संबंधों के एक मामले में महज सात महीने पहले बरी किए गए साईबाबा का ऑपरेशन के बाद की समस्याओं के कारण शनिवार को एक सरकारी अस्पताल में निधन हो गया था। वह 58 वर्ष के थे।

 

परिवार ने बताया कि निम्स के शवगृह में रखे गए साईबाबा के पार्थिव शरीर को 14 अक्टूबर को गन पार्क ले जाया जाएगा और वहां से उनके भाई के आवास पर ले जाया जाएगा। वहां सार्वजनिक रूप से श्रद्धांजलि देने के लिए रखा जाएगा। इसके बाद एक शोक सभा का आयोजन किया जाएगा। एक अधिकारी ने बताया कि शनिवार रात करीब नौ बजे सईबाबा ने अंतिम सांस ली। वह पिछले 20 दिन से ‘निजाम्स इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज’ (निम्स) में भर्ती थे। साईबाबा के परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटी है।

 

नेत्रदान भी किया

साईबाबा की बेटी मंजीरा ने बताया, ‘यह (शरीर दान करना) हमेशा से उनकी (साईबाबा) इच्छा रही है। हमने पहले ही एलवी प्रसाद नेत्र संस्थान (हैदराबाद) को उनकी आंखें दान कर दी हैं और उनका पार्थिव शरीर भी सोमवार को दान कर दिया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्यों को उम्मीद थी कि साईबाबा ठीक होकर घर वापस आ जाएंगे।

 

बॉम्बे हाई कोर्ट ने किया था बरी

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने माओवादियों से कथित संबंध मामले में साईबाबा और पांच अन्य को मार्च में बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ मामला साबित करने में विफल रहा है। अदालत ने उनकी आजीवन कारावास की सजा भी रद्द कर दी थी।

 

जेल प्रशासन पर साईबाबा ने लगाए थे आरोप

जेल से बरी होने के बाद, साईबाबा व्हीलचेयर पर बैठकर 10 साल बाद नागपुर केंद्रीय कारागार से बाहर आए थे। साईबाबा ने इस साल अगस्त में आरोप लगाया था कि उनके शरीर के बाएं हिस्से के लकवाग्रस्त हो जाने के बावजूद प्राधिकारी 9 महीने तक उन्हें अस्पताल नहीं ले गए और उन्हें नागपुर केंद्रीय कारागार में केवल दर्द निवारक दवाएं दी गईं, जहां वह 2014 में इस मामले में गिरफ्तार किए जाने के बाद से बंद थे।

 

आंध्र प्रदेश के रहने वाले थे साईबाबा

अंग्रेजी के पूर्व प्रोफेसर ने दावा किया था कि उनकी आवाज दबाने के लिए उनका अपहरण किया गया और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। आंध्र प्रदेश के मूल निवासी साईबाबा ने आरोप लगाया था कि प्राधिकारियों ने उन्हें चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने (मुद्दों पर) ‘‘आवाज उठाना’’ बंद नहीं किया तो उन्हें किसी झूठे मामले में गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

 

साईबाबा की मौत UAPA का नतीजा: असदुद्दीन ओवैसी

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) के पूर्व प्रोफेसर जी.एन. साईबाबा की मौत आंशिक रूप से उस गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) का भी परिणाम है, जो अभियुक्तों को लंबे समय तक जेल में रखने की अनुमति देता है। ओवैसी ने साईबाबा के निधन पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, ‘प्रोफेसर साईबाबा की मौत भी बेहद चिंताजनक है। उनकी मौत आंशिक रूप से यूएपीए का नतीजा है, जो पुलिस को बिना किसी सबूत के आपको लंबे समय तक जेल में रखने की अनुमति देता है।’

 

SOURCE – PROMPT TIMES 


Share More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *