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पीएम मोदी के बढ़ते वैश्विक कद और G20 की अध्यक्षता पर बोला अमेरिका, “भारत रोक सकता है यूक्रेन युद्ध”

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6 जुलाई 2023 ! भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार बढ़ते वैश्विक कद और G20 की अध्यक्षता करने के चलते अमेरिका का भरोसा हिंदुस्तान पर बहुत बड़ा हो चुका है। अमेरिका को विश्वास है कि जिस तरह से भारत की वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता और दबदबा बढ़ा है, उसे देखते हुए लगता है कि वह यूक्रेन युद्ध रोक सकता है। यूक्रेन में अमेरिका की राजदूत ब्रिजेट ए ब्रिंक ने बुधवार को कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर बढ़ते कद और जी-20 की मौजूदा अध्यक्षता के साथ यूक्रेन में युद्ध को खत्म करने में अहम योगदान दे सकता है। अमेरिका को पता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूसी राष्ट्रपति पुतिन के प्रिय मित्रों में हैं और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी उनके संबंध काफी अच्छे हैं। इसलिए यूक्रेन युद्ध को रोकने में वह महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं।

कुछ भारतीय पत्रकारों के लिए एक विशेष ऑनलाइन ब्रीफिंग में ब्रिंक ने कहा कि विभिन्न वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भारत का नेतृत्व अहम है और ‘ग्लोबल साउथ’ पर युद्ध के विपरीत प्रभाव को लेकर नई दिल्ली की बढ़ती चिंता इस बात की ज़मीन तैयार करती है कि वह संकट को कम करने में भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका स्वतंत्रता और लोकतंत्रों का समर्थन करने के लिए भारत समेत दुनियाभर में अपने सभी साझेदारों और सहयोगियों के साथ काम करने की उम्मीद रखता है। ब्रिंक ने कहा, “कीव (यूक्रेन की राजधानी) से हर दिन मैं दो चीज़ें देखती हूं। जंग के विनाशकारी प्रभाव और यूक्रेनी लोगों की क्षमता और जुझारूपन।

अमेरिकी राजदूत ने कहा कि वैश्विक नेतृत्व के लिए भारत की आकांक्षाएं और जी-20 की ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ थीम के जरिए सामूहिक कार्रवाई का उसका आह्वान उस भावना को दर्शाता है जो ‘शांति’ को हासिल करने के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि युद्ध का वैश्विक अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर संयुक्त राष्ट्र चार्टर में उल्लिखित बुनियादी सिद्धांतों पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। ब्रिंक ने कहा, “ इस साल जी-20 की अध्यक्षता के साथ भारत देश का नेतृत्व वैश्विक घटनाक्रमों को आकार देने के लिए अहम है जिसमें यूक्रेन जैसे स्थान भी शामिल हैं।” हालांकि भारत ने यूक्रेन पर रूस के हमले की अब तक निंदा नहीं की है। मगर भारत संघर्ष का वार्ता और कूटनीति के जरिए समाधान करने पर जोर दे रहा है।

पिछले साल सितंबर में उज़्बेकिस्तान के शहर समरकंद में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक द्विपीक्षय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था, “आज का युग युद्ध का नहीं है” और रूसी नेता को संघर्ष समाप्त करने के लिए प्रेरित किया था। ब्रिंक ने कहा, “मैं जानती हूं कि भारत के लोग संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की स्वतंत्रता के महत्व को समझते हैं और भारत के नेताओं ने इन आधारभूत सिद्धांतों के बारे में बात की है।” ब्रिंक ने लोकतंत्र और कानून के शासन पर आधारित वैश्विक व्यवस्था को बनाए रखने के प्रयासों के लिए भी भारत की सराहना की।

सोर्स :-” इंडिया TV ”              


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