• June 9, 2026 3:12 am

मैनपाट की मोनेस्ट्री में भूटान और नेपाल के कारीगरों ने बनाई, दलाई लामा भी यहां रुके

Share More

16 अप्रैल2022 | छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाला सरगुजा जिले का मैनपाट अपनी खूबसूरत वादियों के साथ बुद्ध मंदिरों के लिए भी मशहूर है। यहां गौतम बुद्ध के 4 मंदिर हैं। इन्हें मोनेस्ट्री भी कहा जाता है। इनमें से एक मंदिर में बेहद खूबसूरत 20 फीट की प्रतिमा है। जिसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। सोमवार को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर यहां विशेष पूजा अर्चना की जा रही है। तिब्बतियों के सबसे बड़े धर्मगुरु दलाई लामा भी यहां आ चुके हैं और रुक चुके हैं।

मैनपाट में 57 साल पुराना बुद्ध मंदिर भी है। साथ ही 3 और मंदिर हैं। इसमें एक मंदिर को 10 साल पहले बनाया गया था। उसी मंदिर में बुद्ध की 20 फीट की प्रतिमा है। इस मूर्ति को मैनपाट की बॉक्साइट मिश्रित मिट्टी से बनाया गया है। इसका निर्माण नेपाल व भूटान के कारीगरों ने किया है।

वहीं 1965 में बने पुराने मंदिर के नीव में बक्साइट के पत्थर रखे गए थे। कहा जाता है कि तब मैनपाट में ईंट नहीं बनती थी। ऐसे में तिब्बती कैंप निर्माण के लिए वहां से दूर नदी किनारे ईंटे बनवाई गयी। कठिन रास्तों और पहाड़ों के बीच लोगों ने ईंटों, रेत और दूसरी सामग्री पीठ पर ढोकर यहां तक पहुंचाई।

धर्मगुरु दलाई लामा ज़ब भी आए हैं वे इसी बड़े मंदिर में रात्रि विश्राम के लिए रुकते हैं। 2010 में बने नए बुद्ध मंदिर के निर्माण में करीब 7 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। मैनपाट के टांगीनाथ इलाके में इस विशाल मोनेस्ट्री में तिब्बती कल्चर की छटा देखते ही बनती है। तिब्बतियों के इस विशाल मंदिर को बनाने में लामाओं ने मैनपाट के अलावा दूसरे बुद्ध मठाें से इसके लिए राशि जुटाई थी। तिब्बतियों का मैनपाट में यह सबसे बड़ा मंदिर है।

मैनपाट में साठ के दशक में तिब्बतियों को बसाया गया था। इसके बाद से इस इलाके की पहचान बढ़ी है। सात कैंपों में यहां तिब्बती रहते हैं। ठंडा इलाका होने के कारण तिब्बतियों को यहां बसाया गया था। तिब्बतियों ने ही यहां टाऊ और खरीफ में आलू की खेती शुरू की थी। इससे प्रभावित होकर स्थानीय लोग भी इससे जुड़ते गए।

Source;- ‘’दैनिकभास्कर’’


Share More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *