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छत्तीसगढ़ में फिर लौट रहे बघेल, इन 5 वजहों से BJP से दूर होती चली गई सत्ता

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1  दिसंबर 2023

छत्तीसगढ़ में भी राजस्थान और मध्य प्रदेश के साथ-साथ 3 दिसंबर को चुनावी परिणाम आने वाला है. चुनाव से पहले आए कई एग्जिट पोल सर्वे यह बता रहे हैं कि कांग्रेस लगातार दूसरी बार चुनाव जीतने जा रही है. भूपेश बघेल लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने 5 साल के इंतजार के बाद फिर से सत्ता में लौटने को लेकर काफी जोर-आजमाइश की थी, लेकिन सर्वे में उसे कामयाबी मिलती नहीं दिख रही है.

Polstrat सर्वे, टुडेज चाणक्या, सी वोटर, Matrize और एक्सिस माई इंडिया जैसे कई सर्वे एजेंसियों की ओर से जारी किए गए सर्वे में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिलने का दावा किया जा रहा है. 90 सदस्यीय विधानसभा में ज्यादातर सर्वे में कांग्रेस को 50 से ज्यादा सीटें मिलने की बात कही जा रही है. एक नजर डालते हैं उन 5 वजहों पर जिसकी वजह से कांग्रेस को यहां पर जीत मिल रही है जबकि बीजेपी की सत्ता में वापसी की उम्मीदों पर पानी फिरता दिख रहा है.

सीएम भूपेश बघेल की छवि

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की साफ-सुथरी छवि कांग्रेस की जीत की वजह बन रही है. उन्होंने 5 साल जिस तरह से राज्य में शासन किया और कई कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की, उसने जनता के बीच उनकी छवि को चमकाया ही है. अपने शासनकाल में बिना किसी विवाद के कुशलतापूर्वक सरकार चलाने की निपुड़ता ने उनकी छवि को चमकाया ही है. राज्य में कांग्रेस ने अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत ‘भूपेश हैं तो भरोसा है’ के नारे से की थी. हालांकि पार्टी के अंदर अंदरुनी विवाद के बीच नारा बदल गया और ‘कांग्रेस है तो भरोसा है’ कर दिया गया.

यही नहीं विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले से सीएम बघेल के करीबियों के यहां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और इनकम टैक्स के छापों की वजह से उनके पक्ष में छवि बनती दिखी. राज्य के लोगों के बीच यह संदेश गया कि ये छापे उन्हें परेशान करने के लिए डाले गए. बीजेपी की ओर से बघेल सरकार को भ्रष्ट बताने की कोशिश भी की गई, लेकिन ऐसा लगता है कि जनता को बघेल सरकार के प्रति कोई खास नाराजगी नहीं है.

BJP के पास सीएम चेहरा नहीं

भारतीय जनता पार्टी को लगातार दूसरी बार चुनाव में हार का सामना करना पड़ रहा है. उनके पीछे की कई वजहों में एक बड़ी वजह यह भी है कि उसके पास मुख्यमंत्री चेहरे का नहीं होना. रमन सिंह लगातार 15 साल तक बीजेपी की ओर से प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन इस बार चुनाव में पार्टी ने रमन सिंह के रूप में सीएम चेहरा नहीं उतारा था. 2018 के चुनाव में रमन सिंह की अगुवाई में ही बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा था.

ये अलग बात है कि रमन सिंह पहले 3 चुनाव में जीत के साथ सरकार बनाने में कामयाब रहे थे. इस बार बीजेपी ने चुनाव में सीएम चेहरा तय नहीं किया. पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह का कहना है कि हम यहां पर सामूहिक नेतृत्व से चुनाव लड़ रहे है. परिणान आने के तुरंत बाद विधायक दल की बैठक में नेता चुन लिया जाएगा.

कांग्रेस के सोशल इंजीनियरिंग के आगे BJP फेल

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने चुनाव में शानदार तरीके से सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल किया. कांग्रेस ने टिकट बंटवारे में सोशल इंजीनियरिंग का खास ध्यान रखा था और यही वजह है कि एग्जिट पोल सर्वे में कांग्रेस की जीत में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के वोटर्स की अहम भूमिका रही है. अनुसूचित जाति के 49 फीसदी वोटर्स ने कांग्रेस के पक्ष में वोट किया है जबकि अनुसूचित जनजाति के 47 फीसदी वोट कांग्रेस के खाते में गए हैं. ओबीसी भी ज्यादा नाराज नहीं दिखे और 43 फीसदी वोटर्स ने कांग्रेस को वोट दिया.

दूसरी ओर, बीजेपी को अगड़ी जाति के वोटर्स ज्यादा मिले. 47 फीसदी सवर्ण वोटर्स बीजेपी के साथ गए तो 39 फीसदी सवर्ण कांग्रेस के साथ रहे. बीजेपी को एससी-एसटी की तुलना में ओबीसी बिरादरी (48%) के वोट ज्यादा मिले हैं. ऐसे में समझा जा सकता है कि बीजेपी को एससी-एसटी वोटर्स की नाराजगी का सामना करना पड़ा है.

हिंदुत्व कार्ड में BJP से आगे निकल गई कांग्रेस

बीजेपी हर चुनाव में हिंदुत्व कार्ड खेलने की कोशिश में रहती है, लेकिन ऐसा लगता है कि छत्तीसगढ़ में वह इस मामले में कहीं न कहीं पिछड़ गई है. भूपेश बघेल सरकार अपने यहां लगातार साफ्ट हिंदुत्व कार्ड खेलती रही है. चुनावी साल में कांग्रेस ने बड़े स्तर पर हनुमान जन्मोत्सव मनाया. हनुमान जयंती पर जगह-जगह सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ कराया गया. खुद सीएम बघेल भी इसमें शामिल हुए. यही नहीं चुनाव से पहले वाले बजट में प्रदेश सरकार ने रामायण महोत्सव के लिए 12 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया.

साथ ही सरकार ने हिंदु लोगों की आस्था को देखते हुए राम वनगमन पथ का निर्माण कराया. साथ ही प्रदेश में स्थित चर्चित माता कौशल्या मंदिर समेत पांच अहम तीर्थस्थलों में भगवान राम की प्रतिमा का निर्माण कराया. छत्तीसगढ़ में ही देश में एकमात्र कौशल्या माता मंदिर है. हालांकि बीजेपी ने साफ्ट हिंदुत्व की काट के लिए कई बड़ी घोषणाएं की थी. बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में वादा किया कि अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के दर्शन के लिए छत्तीसगढ़ के लोगों को रामलला दर्शन योजना लागू करेंगे.

बघेल सरकार की चर्चित गोधन योजना

भूपेश बघेल सरकार ने अपने 5 साल के कार्यकाल में कई योजनाओं की शुरुआत की. सरकार ने 3 साल पहले 20 जुलाई 2020 में गोधन न्याय योजना का आगाज किया. इस योजना के तहत ग्रामीणों, पशुपालकों और गौशाला से सरकार 2 रुपये किलो के हिसाब से गोबर खरीदती है. और फिर इन गोबर से दीये, अगरबत्ती, जैविक खाद और गुलाल समेत कई तरह के घरेलू प्रोडक्ट बनाए जाते हैं. इसके अलावा सीएम बघेल ने पीएम आवास योजना की जगह ग्रामीण आवास न्याय योजना की शुरुआत की जिसके तहत गरीबों को पक्का मकान दिया जाएगा. इन सब योजनाओं ने राज्य के वोटर्स को प्रभावित किया और भूपेश बघेल फिर से सत्ता में लौटते दिख रहे हैं.

सोर्स :- ” TV9 भारतवर्ष    


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