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दिग्विजय सिंह को CM पद भी एक कॉल पर लॉटरी की तरह मिला था, अध्यक्षी की भी मिलेगी सौगात?

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30   सितम्बर 2022 | कांग्रेस का नया अध्यक्ष कौन होगा इस पर अभी सस्पेंस बना हुआ है। दिग्विजय सिंह इस रेस में अचानक एंट्री ले चुके हैं। अशोक गहलोत की ना के बाद वो अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में दिग्विजय सिंह का नाम आने के बाद उनसे जुड़ा एक पुराना राजनीतिक किस्सा ताजा हो गया है, कि कैसे वो एक फोन कॉल से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए थे। उस कॉल को नरसिम्हा राव ने किया था।

माधवराव सिंधिया के नाम पर चल रहा था गेम
1991 के बाबरी विध्वंस के बाद मध्य प्रदेश में वर्ष 1993 में हुए विधानसभा चुनाव हुए। कांग्रेस पार्टी को बहुमत मिला। चुनाव के बाद कमलनाथ, माधवराव सिंधिया, श्यामचरण शुक्ल जैसे नेता मुख्यमंत्री पद के लिए दौड़ में थे। उस समय तक कहीं भी दिग्विजय सिंह रेस में नहीं थे। उन्होंने विधानसभा चुनाव ही नहीं लड़ा था, वह तो सांसद थे। विधायक दल की बैठक में श्याम चरण शुक्ल का नाम सबसे ऊपर था, तभी अर्जुन सिंह ने पिछड़ा समाज से आने वाले सुभाष यादव का नाम उछाला। अर्जुन सिंह को लग रहा था कि सुभाष यादव को ज्यादा से ज्यादा विधायकों का समर्थन नहीं मिलने वाला है और फिर वो अपने समर्थक विधायकों से माधवराव सिंधिया को सीएम उम्मीदवार के तौर पर पेश कर देंगे।

कमलनाथ रेस से आउट, दिग्विजय का नाम आया
दूसरी ओर माधवराव सिंधिया चुप्पी साधे हुए थे कि ग्वालियर चंबल के 15 विधायकों का समर्थन किसे दिया जाए? विधायक दल की बैठक में कांग्रेस आलाकमान के पर्यवेक्षक के तौर पर प्रणब मुखर्जी, सुशील कुमार शिंदे और जनार्दन पुजारी मौजूद थे। बैठक में विधायकों का रवैया देखकर कमलनाथ भी समझ गए कि उनका चांस नहीं है। यही मौका था जब बैठक में सीएम उम्मीदवार के लिए दिग्विजय सिंह का नाम अचानक सामने आया।

दिग्विजय ने विधायकों से लिखित में समर्थन मांगा
बताया यह भी जाता है कि विधायक दल की बैठक शुरू होने से पहले दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के बीच लंबी चर्चा हुई। जिसमें यह तय किया गया कि उसी का नाम आगे किया जाए जिस पर आम सहमति बन सके। दिग्विजय ने कमलनाथ को यह भरोसा भी दिया कि मध्य प्रदेश के नवनिर्वाचित विधायकों के बीच एक बड़ा खेमा उनके पक्ष में है। दिग्विजय ने बाकायदा कुछ विधायकों से लिखित में समर्थन देने की बात भी की थी।

गुप्त मतदान और नरसिम्हा राव के फोन से पलटी बाजी
कांग्रेस विधायक दल की बैठक शुरू हुई तो किसी भी नेता के नाम पर सहमति नहीं बन पा रही थी। इस बैठक में निर्वाचित विधायकों के अलावा सिर्फ दो ही ऐसे शख्स थे जो विधायक नहीं थे। पहला नाम था- दिग्विजय सिंह का और दूसरा उनके निजी सचिव राजेंद्र रघुवंशी। रघुवंशी वहां रुके थे क्योंकि उन्हें दिग्विजय सिंह की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए विधायकों को आमंत्रित करना था। आम सहमति न होने पर गुप्त मतदान हुआ और नतीजा चौंकाने वाला आया। कुल 174 विधायकों में से 100 ने दिग्विजय के समर्थन में मतदान किया। कांग्रेस हाईकमान को मतदान के नतीजों की जानकारी दी गई। फिर अचानक से प्रणब मुखर्जी को तत्कालीन पीएम नरसिम्हा राव का फोन आया। उन्होंने कहा जिसे भी ज्यादा मत पड़े हैं, उसे सीएम बनाया जाएगा का ऐलान कर दो। बस फिर क्या था- दिग्विजय सिंह चमत्कारी ढंग से मध्यप्रदेश के सीएम की कुर्सी तक पहुंच गए।

कांग्रेस अध्यक्ष पर अचानक रेस में
ताजा घटनाक्रम पर नजर डालें तो दिग्विजय सिंह का नाम कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव में अचानक आया है। पहले राजस्थान सीएम अशोक गहलोत का नाम सबसे आगे चल रहा था। गहलोत अचानक से इस रेस से बाहर हो गए हैं और उनकी जगह दिग्विजय सिंह का नाम कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए सामने आया है। सिंह ने यह भी कहा है कि वह 30 सिंतबर को नामांकन करेंगे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि दिग्विजय सिंह इस रेस में अभी सबसे आगे हैं।

सोर्स:–” हिंदुस्तान” 


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